दूरदर्शन पर एक बार फिर रामायण और महाभारत की वजह से महौल काफी भक्तिमय हो गया है। ऐसे में एक तरफ जहां दर्शक इन टीवी शोज को काफी पसंद कर रहे हैं तो वहीं अमर उजाला भी अपने पाठकों के लिए इन शोज से जुड़े किस्से सामने ला रहा है। ऐसे में बीआर चोपड़ा की महाभारत में धर्मराज युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले अभिनेता गजेंद्र चौहान ने अमर उजाला से बातचीत में कई किस्सों का खुलासा किया।
Exclusive: 'महाभारत' के पूरे शूट के दौरान नहीं हुआ था एक भी हादसा, 'युधिष्ठिर' ने बताए किस्से
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गजेंद्र कहते हैं, 'महाभारत से बहुत प्यार था लोगों को, हमारे जयपुर के शूट के दौरान भीड़ को रोकने के लिए 400 पुलिसकर्मी ड्यूटी पर रहते थे। वहीं मजे की बात है कि वो पुलिसवाले भी अपने परिवार के साथ शूटिंग देखते थे। सारा शूट एक दम शांतिपूर्वक शूट रहता था। ये बहुत बड़ी बात है कि महाभारत के पूरे शूट के दौरान एक भी घटना या हादसा नहीं हुआ। आप सोचिए की शूट में रथ, हाथी , घोड़ा सहित कई हथियारों का इस्तेमाल हुआ। लेकिन बावजूद इसके किसी को खरोंच तक नहीं आई। हथियारों में गदा, तलवार, भाले और क्या क्या नहीं होता था।'
जिंदगी में किरदार के प्रभाव पर गजेंद्र ने कहा, ' कोई भी किरदार जीवन पर हमेशा के लिए इफेक्ट नहीं करता है। क्योंकि वो सिर्फ एक किरदार है और हमें बाकी भी किरदार आगे निभाने हैं। वहीं शो का जो मूल था वो हमारे परिवार में पहले से था, हमारे परिवार में ही कई खूबिया थीं, जैसे झूठ नहीं बोलना, बीड़ी पान सिगरेट आदि का इस्तेमाल नहीं। ये सारी चीजें जन्मजात थीं परिवार में। वहीं मुझे लगता है कि झूठ न बोलें तो बेहतर है।'
महाभारत को दोबारा बनाने के सवाल पर गजेंद्र ने कहा, 'देखिए बना तो सकते हैं लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत आएगी की लिखेगा कौन। डॉक्टर(डॉ राही मासूम रज़ा साहब जिन्होंने महाभारत लिखी थी) साहब को कहां से लाएंगे। मुझे लगता है कि वो एक ऐसी टीम थी जो परमात्मा का कोई आदेश हुआ था जो सब कुछ अच्छा हुआ। जिसको जो किरदार मिले वो उसको जी गया। वहीं शूट में भी अपने आप सारी बातें जरूरत के मुताबिक होती गईं, जब शूट में धूप चाहिए थी तो धूप मिली और ठंडक चाहिए तो ठंडक।'
महाभारत लिखने वाले डॉ राही मासूम रजा के बारे में बात करते हुए गजेंद्र ने कहा, ' राही साहब सेट पर कभी कभी ही आया करते थे। पंडित नरेंद्र शर्मा जी जो भी बोलते थे, उसको चोपड़ा साहब रिकॉर्ड कर लेते थे और उस रिकॉर्डिंग को सुनकर डॉक्टर साहब स्क्रीनप्ले बनाते थे और फिर डायलॉग्स लिखते थे। राही साहब का कहना था कि वो सुबह चार -पांच बजे उठकर महाभारत लिखते हैं। वहीं उनकी स्क्रिप्ट पर हमेशा लिखा होता कि डॉ राही मासूम रज़ा की मेज से। राही साहब की सबसे अच्छी बात थी कि वो हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई जैसा कुछ नहीं मानते थे। कभी कभी वो कहते थे कि मैं पंडित राही मासूम रजा हूं।मैंने हिंदू माइथोलॉजी पर पीएचडी की है।