बॉलीवुड अभिनेता विवेक ओबेरॉय को आखिरी बार रोहित शेट्टी के निर्देशन में बनी वेब सीरीज 'इंडियन फाॅर्स' में देखा गया था। विवेक अब तक इंडस्ट्री को कई हिट फिल्में दे चुके हैं। उन्होंने 'मस्ती' फ्रेंचाइजी, 'साथिया', 'शूटआउट एट लोखंडवाला' और 'ओमकारा' जैसी हिट फिल्मों में काम किया है। अब उन्होंने अपने वर्तमान के फिल्मी करियर की यात्रा के बारे में खुलकर बात की। हाल ही में विवेक ओबेरॉय ने बताया कि कैसे उन्होंने अभिनेता बनने से पहले व्यावसायिक यात्रा शुरू की और अभी भी उसी आय पर निर्भर हैं।
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विवेक ओबेरॉय
- फोटो : इंस्टाग्राम
विवेक ओबेरॉय ने हाल ही में एबीपी लाइव को दिए साक्षात्कार में कहा कि मैंने अभिनेता बनने से पहले बिजनेस में कदम रखा था। 15 साल की उम्र में मैंने एक छोटा सा धंधा शुरू किया था, क्योंकि मैं बोर्डिंग स्कूल से आया था और मेरे पिता सुरेश ओबेरॉय मुझे 500 रुपये पॉकेट मनी देते थे। मैं लड़कों के बोर्डिंग स्कूल से आया था। मीठीबाई कॉलेज में खूबसूरत लड़कियों को देखा और उन्हें डेट पर ले जाना चाहता था। मुझे हर महीने 500 रुपये दिए जाते थे, लेकिन मैंने एक ही डेट पर सब खर्च कर दिया।'
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उन्होंने आगे कहा, 'मेरे पिता ने मुझे डांटा और पैसे का विवेकपूर्ण तरीके से इस्तेमाल करने और ज्यादा जिम्मेदार बनने को कहा। मैं 15 साल का था। मेरा अहंकार आहत था और मैंने अपनी मां से कहा कि मुझे अपने पिता का पैसा नहीं चाहिए, मैं खुद संभाल लूंगा। मैं उस पर अड़ा रहा और अपने पिता से पैसे नहीं लिए, लेकिन मुझे कॉलेज जाने, चाय और रिक्शा यात्रा के लिए पैसे की जरूरत थी। तभी मैंने गलती से काम करना शुरू कर दिया, एक छोटा सा वॉयस गिग किया, शो कंपोज किए और वहां से थोड़ा-बहुत कमाना शुरू कर दिया।'
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विवेक ओबेरॉय
- फोटो : इंस्टाग्राम @vivekoberoi
विवेक ने अपने स्टॉक पोर्टफोलियो के बारे में बताया। उन्होंने कहा, 'जब मैंने ज्यादा कमाई करना शुरू किया तो मैंने स्टॉक मार्केट में निवेश करना शुरू कर दिया, मैंने इसके लिए ब्रोकर्स से ट्रेनिंग ली। मैंने अपना स्टॉक मार्केट पोर्टफोलियो तब शुरू किया जब मैं 16-17 साल का था। फिर मैंने कुछ कमोडिटी ट्रेडिंग की। मैं 19 साल का था, जब मैंने पहली बार व्हाइटफील्ड, बैंगलोर में अपना व्यवसाय शुरू किया। मैंने 21 साल की उम्र में अपनी हिस्सेदारी बेच दी और आगे की पढ़ाई के लिए न्यूयॉर्क चला गया।'
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उन्होंने कहा, 'मैं वापस लौटा और अभिनेता बन गया, कंपनी बनी, 'साथिया' बनी। जीवन अच्छा था, लेकिन मैं हमेशा एक निवेशक के रूप में शुरुआत करना चाहता था। हालांकि, मैं एक सक्रिय व्यवसायी बन गया। इससे मुझे मदद मिली, जब मैंने बॉलीवुड में संघर्ष करना शुरू किया, जब एक सफल अभिनेता होने के बाद भी मुझे कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, मैं अपने कौशल को साबित करने के बाद भी चुनौतियों का सामना कर रहा था, जब मुझे कोई फिल्म नहीं मिल रही थी तो एक अलग तरह का दबाव था। यही मेरी आय का स्रोत था। मैं अपने व्यवसाय और फिल्मों में अभिनय, कार्यक्रम करने और उपस्थिति के माध्यम से कमाए गए पैसों से अपना घर, धर्मार्थ फाउंडेशन चला रहा था। मैं अपने कर्मचारियों को भी इससे भुगतान करता था।'