Limitless: हुनर और हौसले का पाठ पढ़ाने निकलीं मानुषी छिल्लर, कामयाब बेटियों संग बातचीत की शुरू की सीरीज

अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: वर्तिका तोलानी Updated Tue, 25 Jan 2022 08:18 AM IST
मानुषी छिल्लर
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कोरोना की तीसरी लहर न आई होती तो इस हफ्ते दुनिया जहान में लोग यशराज फिल्म्स की नई हीरोइन मानुषी छिल्लर के बड़े परदे पर डेब्यू की बातें कर रहे होते। उनकी फिल्म ‘पृथ्वीराज’ 21 जनवरी को रिलीज होनी थी, लेकिन दिल्ली में सिनेमाघरों की बंदी ने तमाम हिंदी फिल्मों की रिलीज डेट बदल दी। अक्षय कुमार के साथ लॉन्च होने की अब भी राह देख रहीं मानुषी ने इस बीच कुछ नया करने की ठानी और शुरू की बातचीत की ऐसी श्रृंखला जिसमें देश की चुनिंदा विजेताओं से वह बात करेंगी और बताएंगी कि कुछ करने का जज्बा, जोश और जुनून हो तो नामुमकिन कुछ भी नहीं है।

मानुषी छिल्लर
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मानुषी कहती हैं, “बड़े होने के दौरान और अब भी मैं ऐसी कई महिलाओं से प्रभावित रही हूं जो लगातार रूढ़ियां तोड़ने का काम कर रही हैं। मेरे मन में हमेशा से कुछ ऐसा करने का विचार था जो मुझे इन सामाजिक प्रतीकों से रूबरू होने का मौका दे सके और मुझे उनकी जिंदगी के बारे में और अधिक जानने में मदद करे। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर मैंने गीता फोगाट के साथ इसे शुरू किया है और इस श्रृंखला में मैं अभी ऐसी तमाम दूसरी महिलाओं से भी बातें करुंगी जिन्होंने अपने बूते कुछ हासिल किया है और जिनका जीवन दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकता है। मैं हमेशा से एक ऐसा प्लेटफार्म तैयार करना चाहती थी जो देश भर की महिला आइकन को एक साथ लाए।”

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मानुषी छिल्लर
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पूर्व विश्वसुंदरी मानुषी छिल्लर ने अपनी इस श्रृंखला का नाम ‘लिमिटलेस’ रखा है। वह कहती हैं, "हर लड़की में दमकने की असीम क्षमता है। उन्हें केवल सही सपोर्ट सिस्टम और सही वातावरण की जरूरत है। बातचीत की इस सीरीज के माध्यम से हम ऐसी लोकप्रिय बेटियों से बातचीत करेंगे जो अपनी इच्छा शक्ति और प्रतिभा के जरिए आधुनिक भारत की प्रतिमान बन चुकी हैं और जो दूसरी लड़कियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।”
मानुषी छिल्लर
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लैंगिक समानता को लेकर आवाज उठाने के लिए यूनिसेफ ने मानुषी को भी अपने साथ जोड़ा है। लड़कियों के लिए समान अधिकारों को लेकर बात करने वाली मानुषी कहती हैं, "यह एक बड़ा विरोधाभास है कि जहां एक तरफ हमारे देश में महिलाएं राजनीति, बिजनेस, कला, खेल, शिक्षा और विज्ञान आदि हर क्षेत्र में उच्चतम स्तर लीड कर रही हैं, फिर भी लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ हिंसा और, लैंगिक भेदभाव, बाल विवाह और कन्या भ्रूण हत्या आम बात है। कोविड-19 महामारी ने इनमें से कई लैंगिक पूर्वाग्रहों की गति को और तेज कर दिया है। मैं चाहती हूं कि हर एक लड़की को समान अवसर मिले। अपने सपनों को पूरा करने के लिए अपनी सामर्थ्य का भरपूर इस्तेमाल कर सकने के साथ ही वह भेदभाव और सामाजिक पूर्वाग्रह से रहित जिंदगी जी सके।"
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