नवरात्रि के त्योहार में मां दुर्गा की पूजा की जाती है। इन 9 दिन हर भक्त मां को प्रसन्न करने की कोशिश करता है। मां दुर्गा को सोलह श्रृगांर से सजाया जाता है। आपने भी कई लोगों से यह बात जरूर सुनी होगी कि बहुओं और लड़कियों को व्रत, त्योहार पर श्रृंगार करना चाहिए। लेकिन क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों कहा जाता है। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि सोलह श्रृगांर करने से घर में सुख और समृद्धि आती है। ऋग्वेद में भी सोलह श्रृंगार का वर्णन किया गया है। जिसमें इस बात को कहा गया है कि सोलह श्रृगांर करने से न केवल खूबसूरती बढ़ती है बल्कि भाग्य भी अच्छा होता है। महिलाएं मां भगवती को खुश करने के लिए इस पावन पर्व पर ये श्रृंगार करती हैं। आइए जानते हैं आखिर कौन-कौन से हैं ये श्रृंगार...
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इस खास वजह से नवरात्रि में करना चाहिए 16 श्रृंगार
लाइफस्टाइल डेस्क,अमर उजाला
Published by: ललित फुलारा
Updated Tue, 01 Oct 2019 09:52 AM IST
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- फोटो : instagram
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bindi
बिंदी
कुमकुम या बिंदी को माथे पर लगाना पवित्र माना जाता है। सुहागिन स्त्रियों को कुमकुम या सिंदूर से अपने ललाट पर लाल बिंदी लगानी चाहिए। वैसे अब स्टीकर बिंदी का चलन है तो आप चाहें तो इसे भी लगा सकती हैं।
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sindoor
सिंदूर
सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि सिंदूर लगाने से पति की आयु में वृद्धि होती है।
eye makeup
काजल
चेहरे की सबसे खूबसूरत चीज और मन का आइना होती हैं आपकी आंखें। जिनका श्रृंगार होता है काजल। इसे महिलाएं अपनी आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए लगाती हैं। इसके अलावा काजल बुरी नजर से भी बचाए रखता है।
चेहरे की सबसे खूबसूरत चीज और मन का आइना होती हैं आपकी आंखें। जिनका श्रृंगार होता है काजल। इसे महिलाएं अपनी आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए लगाती हैं। इसके अलावा काजल बुरी नजर से भी बचाए रखता है।
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मेहंदी
मेहंदी के बिना हर सुहागन का श्रृंगार अधूरा माना जाता है। किसी भी शुभ कार्यक्रम के दौरान महिलाएं हाथों और पैरों मे मेहंदी रचाती हैं। ऐसा माना जाता है कि नववधू के हाथों में मेहंदी जितनी गाढ़ी रचती है, उसका पति उसे उतना ही अधिक प्रेम करता है।
मेहंदी के बिना हर सुहागन का श्रृंगार अधूरा माना जाता है। किसी भी शुभ कार्यक्रम के दौरान महिलाएं हाथों और पैरों मे मेहंदी रचाती हैं। ऐसा माना जाता है कि नववधू के हाथों में मेहंदी जितनी गाढ़ी रचती है, उसका पति उसे उतना ही अधिक प्रेम करता है।
