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Stray Dogs Order: 'आक्रामक, रेबीज से ग्रस्त...'; शीर्ष कोर्ट के आवारा कुत्तों से जुड़े आदेश की पांच अहम बातें

Fri, 22 Aug 2025 01:36 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 22 Aug 2025 01:36 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर के डॉग शेल्टर्स से आवारा कुत्तों को छोड़ने पर रोक लगाने वाले अपने 11 अगस्त के निर्देश में संशोधन कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पकड़े गए कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी जगह पर छोड़ दिया जाए, जहां से उन्हें उठाया गया था।

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आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला - फोटो : Amar Ujala

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि आवारा कुत्तों को पकड़ने के संबंध में अदालत का पहले दिया गया निर्देश यथावत रहेगा। कोर्ट ने अब इस आदेश में कुछ संशोधन कर दिया है। इन बदलावों का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि आक्रामक व्यवहार वाले या रेबीज से ग्रस्त कुत्तों का टीकाकरण किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि आवारा कुत्तों को नसबंदी के बाद आश्रय स्थलों से छोड़ा जा सकता है। हालांकि, आक्रामक व्यवहार वाले या रेबीज से ग्रस्त कुत्तों को आश्रय स्थलों में ही रखा जाएगा।



सुप्रीम कोर्ट ने जो पांच बातें कहीं, उसे जानिए...

  1. आवारा कुत्तों का टीकाकरण किया जाएगा और उन्हें उसी क्षेत्र में छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। आक्रामक कुत्तों और रेबीज से ग्रस्त कुत्तों को नहीं छोड़ा जाएगा।
  2. आवारा कुत्तों को सड़कों पर खाना नहीं खिलाया जा सकता। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) आवारा कुत्तों के लिए निर्धारित भोजन क्षेत्र बनाएगा।
  3. सड़कों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाते पाए जाने पर संबंधित कानूनी ढांचे के तहत कार्रवाई की जाएगी।
  4. निर्धारित भोजन क्षेत्रों के पास नोटिस बोर्ड लगाए जाएंगे, जिनमें बताया जाएगा कि आवारा कुत्तों को केवल ऐसे क्षेत्रों में ही खाना खिलाया जाएगा।
  5. नगर निकायों की ओर से विशेष रूप से नगरपालिका वार्ड में आवारा कुत्तों की आबादी और सघनता को ध्यान में रखते हुए भोजन क्षेत्र बनाए जाएंगे।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला - फोटो : Amar Ujala

पूर्व आदेश की समीक्षा करते हुए मुद्दे के दायरे का विस्तार किया
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने अदालत के एक पूर्व आदेश की समीक्षा करते हुए इस मुद्दे के दायरे का विस्तार किया और आदेश दिया कि सभी समान मामलों को अंतिम राष्ट्रीय नीति के लिए शीर्ष अदालत को स्थानांतरित कर दिया जाए। अदालत ने पहले सभी आवारा कुत्तों को इकट्ठा करने का आदेश दिया था, जिसका उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर की सड़कों को आवारा कुत्तों से मुक्त बनाना था। पशु कार्यकर्ताओं और मशहूर हस्तियों के विरोध के बीच अदालत ने इस मुद्दे पर फिर से विचार करने का फैसला किया और इस सप्ताह की शुरुआत में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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Supreme Court - फोटो : ANI

कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, 'नगरपालिका अधिकारियों को पैरा 12, 12.1 और 12.2 का पालन करना होगा और आवारा कुत्तों को छोड़ने पर लगी रोक हटानी होगी। उन्हें कृमिनाशक दवा दी जाएगी, टीका लगाया जाएगा, आदि और उन्हें उसी क्षेत्र में वापस भेज दिया जाएगा। आक्रामक व्यवहार वाले या रेबीज से ग्रस्त कुत्तों का टीकाकरण किया जाएगा और उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा।'

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Stray Dog - फोटो : PTI

सार्वजनिक रूप से भोजन कराने की अनुमति नहीं
अदालत ने यह भी कहा कि आवारा कुत्तों को किसी भी हालत में सार्वजनिक रूप से भोजन कराने की अनुमति नहीं दी जा सकती और नगर निकायों को नगरपालिका वार्डों में समर्पित भोजन क्षेत्र बनाने का आदेश दिया। अदालत ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

11 अगस्त को कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया था?
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने 11 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को आठ हफ्तों के भीतर आश्रय स्थलों में भेजने का आदेश दिया था। कुत्तों के काटने, रेबीज के मामलों और इससे मौतों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए यह आदेश जारी किया गया था। सरकार के अनुसार, 2024 में कम से कम 37 लाख कुत्तों के काटने की घटनाएं और 54 संदिग्ध रेबीज से मौतें दर्ज की गईं। अदालत ने अधिकारियों को सड़कों से आवारा कुत्तों को पकड़ने का निर्देश दिया था और इस कार्रवाई में किसी भी तरह के हस्तक्षेप के खिलाफ चेतावनी दी थी। अधिकारियों को कम से कम 5,000 कुत्तों के लिए आश्रय स्थल बनाने के लिए भी कहा गया था।

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