नागरिकता संशोधन विधेयक को मोदी कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। संसद भवन के एनक्सी बिल्डिंग में हुई कैबिनेट की बैठक में फैसला किया गया कि इस विधेयक को दो-तीन दिनों के अंदर संसद में चर्चा के लिए पेश किया जाएगा । सरकार शीतकालीन सत्र में ही इस बिल को पारित करवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।
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संसद का शीतकालीन सत्र
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एनआरसी के बाद नागरिकता संशोधन विधेयक के कई प्रावधानों को लेकर विपक्ष पुरजोर विरोध करने की तैयारी में लगा हुआ है। पूर्वोत्तर के कई राज्यों के नेताओं ने इसे लेकर विरोध जाहिर किया है। इस मुद्दे पर गृहमंत्री अमित शाह ने एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई थी लेकिन उसमें भी कोई सहमति नहीं बन सकी।
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Narendra Modi- Amit Shah
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कई सभाओं के दौरान भी नागरिकता कानून में संशोधन की बात कर चुके हैं। इस कानून के विरोध में सबसे मुखर आवाज पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की है। वे पहले से ही पश्चिम बंगाल में एनआरसी को लागू करने से इनकार करती रही हैं।
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पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह
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इस विधेयक के पास होने से वर्तमान कानून में बदलाव आएगा। जानिए, इसका फायदा किसे मिलेगा और देश में रह रहे करोड़ों लोगों पर इसका क्या असर होगा।
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नागरिकता संशोधन बिल
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नागरिकता संशोधन विधेयक में क्या है प्रस्ताव?
नागरिकता संशोधन विधेयक में नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन का प्रस्ताव है। इसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के शरणार्थियों के लिए नागरिकता के नियमों को आसान बनाना है।