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दिनकर जिन्हें हिंदी की वीणा कहते थे वह थे गोपालदास नीरज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 20 Jul 2018 01:50 PM IST
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जीवन कटना था कट गया,
अच्छा कटा, बुरा कटा,
यह तुम जानो,
मैं तो यह समझता हूं,
कर्जा जो मिट्टी का पटना था पट गया।
इतने बदनाम हुए हम तो इस जमाने से,
तुमको लग जाएँगी सदियाँ हमें भुलाने में।
मशहूर कवि और गीतकार गोपाल दास नीरज का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार को दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। वह 93 वर्ष के थे।
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नीरज के निधन के बाद उनकी अनगिनत ,किस्से, कहानियां, गीत, लोकगीत पर चर्चा हो रही है। जीवन में नीरज ने बहुत कष्ट सहा। पेट पालने के लिए और जीवन को अनवरत चलाने के लिए इस गीतकार ने गंगा में गोता में भी गोता लगाया। न, न उन्होंने यह गोता किसी रोमांच के लिए नहीं लगाया बल्कि पेट पालने के लिए लगाया।
जिंदगी में कितनी भी परेशानियां आईं उनकी लेखनी और प्रगाढ होती गई। लेकिन वह कभी निराश नहीं हुए। और अनवरत बिंदास लिखते रहे। क्या नहीं लिखा नीरज ने, गीत, लोकगीत, दार्शनिक गीत, फिल्मी गीत, भक्तिगीत, प्रेमगीत, दोहा, गजल, हाइकू, छंद से कविता यहां तक कि ज्योतिष पर भी कविता लिखी। उन्होंने बताया कि ज्योतिष पर उन्होंने तीन किताबें लिखी हैं- नीरज ज्योतिष दोहावली, शुकनाड़ी, ज्योतिष दोहावली वह भी तीन खंडों में।
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कवि गोपालदास 'नीरज', कवि हरिओम पंवार
- फोटो : अमर उजाला
हाईस्कूल प्रथम श्रेणी में पास करने वाले नीरज
इटावा जिले के पुरावली गांव में बाबू ब्रजकिशोर सक्सेना के घर गोपालदास नीरज का जन्म चार जनवरी 1925 को हुआ। जब वह महज 6 साल के थे, तभी उनके सिर से पिता का साया उठ गया।
बचपन में ही उनके सिर पर घर की जिम्मेदारियां आ गई थीं। घर का चूल्हा जलाने के लिए बचपन में ही काम शुरू कर दिया। बावजूद इसके 1942 में हाई स्कूल की परीक्षा उन्होंने प्रथम श्रेणी में पास की।
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अमर उजाला के मंच पर कवि गोपाल दास नीरज (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
पढ़ते रहे और नौकरी करते रहे दिल टूटा और कविताएं फूटी
नीरज के उपर घर की जिम्मेदारियां थीं तो उन्होंने पढ़ाई के साथ ही नौकरी शुरू कर दी। उन्होंने इटावा की कचहरी में टाइपिस्ट की नौकरी शुरू की। एक सिनेमाघर में काम किया। फिर दिल्ली के सफाई विभाग में टाइपिस्ट का काम किया।
लेकिन वहां नौकरी ज्यादा नहीं चल सकी और उन्होंने नौकरी छूट जाने पर कानपुर के डीएवी कॉलेज में काम किया। फिर बाल्कट ब्रदर्स नाम की एक प्राइवेट कंपनी में 5 साल तक टाइपिस्ट का काम किया। कविताएं भी लिखीं।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
मेरठ में अध्यापन के दौरान क्लास न लेने के आरोप लगे तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया
हिंदी से एमए करने के बाद उन्हें मेरठ कॉलेज में पढ़ाने का मौका मिला। यहां कॉलेज प्रशासन ने इन पर कक्षा नहीं लेने के आरोप लगाए। इससे नाराज होकर उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वे अलीगढ़ के धर्म समाज कॉलेज में हिन्दी विभाग के प्राध्यापक पद पर नियुक्त हुए। फिर यहां से वे मुंबई चले गए।
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