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इतिहास के पन्ने: क्या मुगलकाल में तोड़े गए 60 हजार से ज्यादा मंदिर? जानें उन 10 मंदिरों की कहानी जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Sat, 14 May 2022 08:05 AM IST
सार

आज हम आपको बताएंगे कि क्या सच में भारत में 60 हजार से ज्यादा हिंदू, जैन और बौद्ध मंदिरों को तोड़ दिया गया था? साथ ही उन 10 मंदिरों की कहानी बताएंगे जिसके बारे में पूरी दुनिया को मालूम है। 

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History of India: More Than 60 Thousand Temples Destroyed by Mughals Know the History of India About 10 Temples in Hindi
मुगलकाल में कई मंदिरों पर आक्रांताओं ने हमला किया था। - फोटो : अमर उजाला
काशी, मथुरा, दिल्ली, आगरा से लेकर मध्य प्रदेश के धार तक मंदिर-मस्जिद का विवाद जारी है। इन विवादों में हिंदू पक्ष का दावा है कि मुस्लिम आक्रांताओं ने हिंदुओं की आस्था पर चोट पहुंचाई थी। 60 हजार से ज्यादा मंदिरों को तोड़ डाला गया था। कई मंदिरों को तोड़कर मस्जिदों का निर्माण कराया गया था। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि क्या सच में भारत में 60 हजार से ज्यादा हिंदू, जैन और बौद्ध मंदिरों को तोड़ दिया गया था? साथ ही उन 10 मंदिरों की कहानी बताएंगे जिसके बारे में पूरी दुनिया को मालूम है। 
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पहले जान लीजिए अभी किन-किन जगहों पर ज्यादा विवाद चल रहा है?

History of India: More Than 60 Thousand Temples Destroyed by Mughals Know the History of India About 10 Temples in Hindi
विवादों में धार्मिक स्थल - फोटो : अमर उजाला
1. वाराणसी : काशी विश्वनाथ मंदिर से सटा ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद सबसे ज्यादा चर्चा में है। कोर्ट आदेश पर 17 मई से पहले इस परिसर का सर्वे होना है। हालांकि, इससे पहले मुस्लिम पक्ष इस सर्वे पर रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। 

2. मथुरा : मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर विवाद है। 12 मई को इलाहाबाद हाई कोर्ट में इस मामले में सुनवाई हुई। 13.37 एकड़ भूमि के स्वामित्व की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है। याचिका में पूरी जमीन लेने और श्री कृष्ण जन्मभूमि के बराबर में बनी शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की भी मांग की गई है। इस मामले में मथुरा की सेशन कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने इस मामले में 19 मई तक फैसला सुरक्षित रखा है।  

3. दिल्ली : राजधानी दिल्ली स्थित कुतुब मीनार को लेकर भी विवाद जारी है। मीनार की दीवारों पर सदियों पुराने मंदिरों के अवशेष साफ दिखाई पड़ते हैं। इसमें हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और मंदिर की वास्तुकला मौजूद है। इसे मीनार के आंगन में साफ देखा जा सकता है। मीनार के अंदर भगवान गणेश और विष्णु की कई मूर्तियां हैं। कुतुब मीनार के प्रवेश द्वार पर एक शिलालेख है जिस पर लिखा है कि इसमें प्रयुक्त खम्भे और अन्य सामाग्री 27 हिन्दू और जैन मंदिरों को ध्वस्त करके प्राप्त की गई थी। 
 
4. आगरा : ताजमहल को लेकर भी विवाद जारी है। इसे लेकर भी हाईकोर्ट में एक याचिका लगी थी। जिसे गुरुवार को कोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिका लगाने वालों का दावा है कि ताजमहल तेजो महालय नाम का शिव मंदिर है।  

5. धार : मध्य प्रदेश के धार में भोजशाला को लेकर विवाद है। इंदौर हाईकोर्ट में दो मई को याचिका दायर की गई है। इसमें भोजशाला को पूर्णत: हिंदुओं के अधिकार में देने की मांग की गई है। 

क्या सच में 60 हजार से ज्यादा मंदिर तोड़े गए? 
ये जानने के लिए हमने इतिहासकार अशोक गौतम से बात की। उन्होंने कहा, 'मुगलकाल में आक्रांताओं ने काफी तरह से भारत की संस्कृति, हिंदू धर्म की आस्था को खंडित करने की कोशिश की। मंदिरों को तोड़ने का काम इसी में से एक है। मुगल काल में तोड़े गए मंदिरों की एकदम सही संख्या बता पाना मुश्किल है, क्योंकि उस दौरान का इतिहास भी मुगल शासकों ने अपने अनुसार लिखवाया था। हां, ये जरूर कहा जा सकता है कि कई हजार मंदिरों को मुगलों ने तोड़ दिया। कई के सबूत आज भी मौजूद हैं।'
 
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कहानी उन दस मंदिरों की, जिसके बारे में पूरी दुनिया जानती है

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मार्तण्य सूर्य मंदिर, अनंतनाग कश्मीर  - फोटो : अमर उजाला
1. मार्तण्य सूर्य मंदिर, अनंतनाग कश्मीर 
कश्मीर घाटी के अनंतनाग में कर्कोटा समुदाय के राजा ललितादित्य मुक्तिपाडा ने लगभग 725-61 ईस्वी में इस ऐतिहासिक और विशालकाय मार्तण्य सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया था। ये कश्मीर के सबसे पुराने मंदिरों में शुमार है। अनंतनाग से पहलगाम के बीच एक जगह है, जिसे मटन कहा जाता है। कहा जाता है कि इसे मुस्लिम शासक सिकंदर बुतशिकन ने तुड़वाया दिया था।   

मुस्लिम इतिहासकार हसन अपनी किताब 'हिस्ट्री ऑफ कश्मीर' में लिखते हैं कि 1393 के आसपास सबसे ज्यादा कश्मीरी पंडितों पर सुल्तान बुतशिकन ने कहर बरपाया था। इतिहासकार नरेंद्र सहगल ने भी इसका जिक्र अपनी किताब व्यथित जम्मू कश्मीर में किया है। इसमें उन्होंने लिखा है, 'पंडितों पर जब अत्याचार हो रहा था तब हजरत अमीर कबीर (तत्कालीन धार्मिक नेता) ने ये सब अपनी आंखों से देखा। उसने मंदिर नष्ट किया और बेरहमी से कत्लेआम किया।'
 

2. सोमनाथ मंदिर, काठियावाड़ गुजरात

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सोमनाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला
गुजरात के काठियावाड़ में 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर है। ये समुद्र के किनारे स्थित है। इसका जिक्र महाभारत, श्रीमद्भागवत और स्कंद पुराण में भी विस्तार से है। कहा जाता है कि चंद्रदेव ने भगवान शिव को अपना नाथ मानकर यहां उनकी तपस्या की थी। चंद्रदेव को सोम नाम से भी जाना जाता है। इसलिए इस मंदिर का नाम सोमनाथ पड़ा। 

आक्रांताओं ने इसे 17 बार लूटा और क्षतिग्रस्त किया, लेकिन हर बार ये उतनी ही मजबूती के साथ फिर खड़ा हुआ। यह मंदिर ईसा पूर्व से पहले ही अस्तित्व में आ गया था। इसका पुनिर्निर्माण 649 ईस्वी में वैल्लभी के मैत्रिक राजाओं ने किया। पहली बार इस मंदिर को 725 ईस्वी में सिंध के मुस्लिम सूबेदार अल जुनैद ने तुड़वाया। इसके बाद राजा नागभट्ट ने इसका पुनिर्निर्माण 815 ईस्वी में करवाया। 

1024 में फिर से महमूद गजनवी ने इसपर हमला बोला और मंदिर की पूरी संपत्ति लूटने के बाद इसे नष्ट कर दिया। महमूद गजनवरी के आक्रमण के बाद 1093 ईस्वी में गुजरात के राजा भीमदेव, मालवा के राजा भोज ने इसका पुनिर्निर्माण कराया। 1297 में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति नुसरत खां, 1395 में मुजफ्फरशाह, 1412 में उसके बेटे अहमद शाह, 1665 ईस्वी और 1706 में औरंगजेब ने इस पर हमला किया। मंदिर को क्षतिग्रस्त किया और लूटपाट की।
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3. राम जन्मभूमि, अयोध्या, उत्तर प्रदेश :

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अयोध्या श्रीराम मंदिर का प्रस्तावित मॉडल - फोटो : अमर उजाला
इतिहासकारों के मुताबिक, 1528 में बाबर के सेनापति मीर बकी ने अयोध्या के राम मंदिर को तुड़वाकर बाबरी मस्जिद बनवाई थी। 1949 में कुछ लोगों ने गुंबद के नीचे राम मूर्ति की स्थापना कर दी थी। 1992 में कारसेवक ने विवादित ढांचे को तोड़ दिया। कोर्ट की लंबी लड़ाई के बाद 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया। 

 
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