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कुछ यूं बदल रहा है भारत में बारिश का पैटर्न, मानसून के बाद भी बढ़ेंगे सूखे दिन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 12 Jun 2018 11:23 AM IST
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मानसून आ चुका है और यह लगातार तीसरा साल है जब मौसम विभाग सहित देश की दूसरी एजेंसिया मानसून के सामान्य रहने की बात कह रही हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि मानसून सामान्य रहने के बाद भी देश के कई हिस्से सूखे से जूझ रहे हैं। वहीं कहीं कहीं 24 घंटे में रिकॉर्ड बारिश हुई लेकिन पीने का पानी वहां भी नहीं है। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि कुछ सालों से बारिश का ट्रेंड बदल रहा है। यह सिर्फ दुनिया में नहीं बल्कि भारत में भी पिछले तीन सालों में मानसून का पैटर्न बदला है।
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मौसम विभाग का मानना है कि 66 फीसदी संभावना सामान्य या ज्यादा बारिश होने की है। विभाग का मानना है कि सीजन के इन चार महीनों के दौरान सबसे ज्यादा संभावना 96-110 फीसदी बारिश होने की है। वहीं 66 फीसदी संभावना है जिसमें से 13 फीसदी संभावना सामान्य से ज्यादा बारिश की है।
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लेकिन इन सब के बीच बड़ी बात यह है कि कितने सटीक होते हैं बारिश के अनुमान

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तो बता दें कि पिछले 10 साल में सिर्फ 3 बार अनुमान के आसपास मानसून रहा है। जबकि 50 सालों में औसत या सामान्य बारिश 96 -104 फीसदी के बीच रही है। मजेदार बता यह है कि मौसम विभाग हर साल लंबी अवधि के लिए मानसून का अनुमान जारी करता है। इसी के आधार पर औसत बारिश तय की जाती है। इस अंदाजे में 5 फीसदी कम या ज्यादा की गुंजाइश तो होती है यानी बारिश 105 फीसदी भी हो सकती है और 95 फीसदी भी। और पिछले दस सालों के अनुमान पर नजर डालें तों महज तीन बार ही मानसून का सही अनुमान लगा पाया है बाकी सालों में अनुमान वास्तविक बारिश में 7-9 फीसदी का अंतर रहा है।
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अब सवाल उठता है कि मौसम विभाग कैसे करता है भविष्यवाणी: विभाग चार तरीके से बारिश की भविष्यवाणी करता है। शॉर्ट रेंज यानी 12 से 72 घंटे, मीडियम रेंज यानी 5 से 7 दिन, एक्सटेंडेट आउटलुक यानी 15 से 30 दिन और मंथली या लंबे समय की भविष्यवाणी।
 
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बारिश हमारी अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। देश की जीडीपी में कृषि क्षेत्र की करीब 15 फीसदी, जबकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है। 
यही नहीं मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 50 साल में देश में औसत या सामान्य बारिश 96-104 फीसदी के बीच रही है। देश में जितनी बारिश साल भर में होती है उसमें से 75 से 80 मानसून में होती है । मध्य और उत्तर- पश्चिमी भारत में साल की 90 फीसदी से अधिक बारिश मानसून में होती है। 

 
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