देश में कई राजनीतिज्ञ ऐसे हैं जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों से आकर सियासत में अपनी किस्मत आजमाई है। इसी क्रम में आज हम आपको कुछ ऐसे राजनीतिज्ञों के बारे में बता रहे हैं, जो प्रशासनिक सेवाओं के बाद राजनीति में आए और अलग-अलग पार्टियों के
नौकरी के बाद राजनीति में उतरे ये 5 नौकरशाह, क्या चुनावी मैदान में फहरा पाएंगे जीत का झंडा?
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भारती घोष
भारती घोष पूर्व आईपीएस अधिकारी और पश्चिम बंगाल की घाटल लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार हैं। कभी उन्हें तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के करीबियों में गिना जाता था, लेकिन 4 फरवरी को उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार पर अपराध तंत्र और ठग तंत्र का आरोप लगाते हुए भाजपा का दामन थाम लिया। भारती पर भी वर्तमान में कई आपराधिक आरोप हैं। वह घाटल लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। उनका मुकाबला टीएमसी के दीपक अधिकारी और कांग्रेस उम्मीदवार मोहम्मद सफीउल्लाह से है। घाटल सीट पर छठे चरण में यानी 12 मई को मतदान होंगे।
अपराजिता सारंगी
बिहार की रहने वाली अपराजिता सारंगी 1994 बैच की ओडिशा काडर की आईएएस अधिकारी हैं। उनके रिटायरमेंट में 11 साल बाकी थे जब उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन देकर भाजपा के साथ अपनी राजनीतिक पारी की शुरूआत की। अपराजिता पिछले साल 27 नवंबर को अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हुई थीं। वो साल 2006 से 2009 तक भुवनेश्वर नगर निगम की कमिश्नर भी रह चुकी हैं। इस बार अपराजिता भुवनेश्वर लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार हैं, और उनके सामने बीजू जनता दल के अरूप पटनायक खड़े हैं।
अरूप पटनायक
1979 बैच के आईपीएस ऑफिसर अरुप पटनायक मुंबई के पुलिस कमिश्नर रह चुके हैं। उन्होंने 2015 में रिटायर होने के बाद पिछले साल अप्रैल में ही मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की मौजूदगी में बीजू जनता दल ज्वॉइन कर लिया था। इस बार अरूप भुवनेश्वर लोकसभा सीट से भाजपा की अपराजिता सारंगी के खिलाफ मैदान में हैं।
प्रीता हरित
प्रीता हरित भारतीय राजस्व सेवा की पूर्व प्रिंसिपल इनकम टैक्स कमिश्नर हैं। मार्च 2019 में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देकर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। प्रीता इस बार आगरा लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। उनका मुकाबला भाजपा के एस पी सिंह बघेल और महागठबंधन के बसपा उम्मीदवार मनोज कुमार सोनी से है।