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Congress: इन चार बड़ी चुनौतियों का सामना करेंगे खरगे, जानें कांग्रेस के लिए नया क्या कर सकते हैं नए अध्यक्ष?
Wed, 26 Oct 2022 11:33 AM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Wed, 26 Oct 2022 11:33 AM IST
सार
खरगे के कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने के बाद ये चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर उनके सामने चुनौतियां कौन-कौन सी हैं? वह कांग्रेस पार्टी को कितना बदल पाएंगे? पार्टी के लिए क्या नया कर सकते हैं? आइए समझते हैं...
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मल्लिकार्जुन खरगे
- फोटो : अमर उजाला
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24 साल बाद कांग्रेस को गैर गांधी परिवार का कोई अध्यक्ष मिला है। कर्नाटक से ताल्लुक रखने वाले मल्लिकार्जुन खरगे ने आज देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाल लिया। 17 अक्तूबर को अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में खरगे ने अपने प्रतिद्वंदी शशि थरूर को छह हजार से भी ज्यादा मतों से हराया था।
मल्लिकार्जुन खरगे
- फोटो : अमर उजाला
खरगे के सामने कौन सी चार चुनौतियां हैं?
इसे समझने के लिए हमने वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार सिंह से बात की। उन्होंने कहा, 'खरगे ऐसे वक्त पार्टी के अध्यक्ष चुने गए हैं, जब कांग्रेस को नई ताकत की जरूरत है। कांग्रेस लगातार देशभर में चुनाव हार रही है। ऐसे में खरगे के सामने चुनौतियों का बड़ा अंबार लगा है।' प्रमोद ने हमें खरगे के सामने की चार बड़ी चुनौतियों के बारे में बताया...
इसे समझने के लिए हमने वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार सिंह से बात की। उन्होंने कहा, 'खरगे ऐसे वक्त पार्टी के अध्यक्ष चुने गए हैं, जब कांग्रेस को नई ताकत की जरूरत है। कांग्रेस लगातार देशभर में चुनाव हार रही है। ऐसे में खरगे के सामने चुनौतियों का बड़ा अंबार लगा है।' प्रमोद ने हमें खरगे के सामने की चार बड़ी चुनौतियों के बारे में बताया...
मल्लिकार्जुन खरगे
- फोटो : अमर उजाला
1. खुद से फैसला लेना : अभी कांग्रेस पर पूरी तरह से गांधी परिवार का राज है। भले ही गांधी परिवार के सदस्य पार्टी में किसी पद पर हों या न हों, लेकिन बगैर उनके कोई फैसला नहीं लिया जा सकता है। ये भी सही है कि कांग्रेस को गांधी परिवार से अलग रखकर बात भी नहीं किया जा सकता है। ऐसे समय में खरगे के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वह स्वतंत्र होकर पार्टी के लिए फैसला ले सकें, जिनमें गांधी परिवार का कोई दबाव न हो।
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सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी ने की मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात।
- फोटो : ANI
2. पार्टी में पड़ रही फूट को रोकना : राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच लड़ाई जारी है। अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर भी थरूर ने एक तरह से मोर्चा खोल रखा है। एक के बाद एक कई कांग्रेस के दिग्गज नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। महाराष्ट्र में भी कांग्रेस विधायकों के बीच नाराजगी है। ऐसी स्थिति में खरगे के सामने दूसरी बड़ी चुनौती पार्टी में लगातार पड़ रही फूट को रोकना है।
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मल्लिकार्जुन खरगे
- फोटो : ANI
3. जनता को विश्वास दिलाना और नए लोगों को जोड़ना : कांग्रेस फिर से तभी चुनाव जीत सकती है, जब वह जनता को ये भरोसा दिला पाए कि उनके लिए यही पार्टी बेहतर है। इसके लिए कांग्रेस को नए लोगों को पार्टी से जोड़ना होगा। खरगे के लिए ये भी एक चुनौती ही है।