जनवरी अंत में आरएमएल अस्पताल जॉइन करने के बाद 12 मार्च को मेरी शादी थी। मैंने शादी के बाद अंडमान निकोबार घूमने का प्लान बनाया था। लेकिन जब मैं सात फेरे ले रहा था, तभी मेरे दोस्तों ने बताया कि छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। सभी को अस्पताल बुलाया है। इमरजेंसी है।
National Doctors Day 2020: समर्पण को सलाम, शादी के मंडप से अस्पताल तक
कोरोना के चलते 12-12 घंटे पीपीई किट पहननी पड़ रही है। भीषण गर्मी के कारण कई बार बेहोश हो चुकी हूं, लेकिन मेरे हौसले बुलंद हैं। दिल्ली में सबसे ज्यादा एनेस्थीसिया डॉक्टर संक्रमित हुए हैं। एक की मौत भी हो चुकी है। इसके बावजूद मैं गंभीर मरीजों की सेवा कर रही हूं। कोरोना काल में ही मेरे भाई की मौत हुई, लेकिन मरीजों में ही उसको देख याद कर लेती हूं:-अंकिता सिंह तोमर पीजी स्टूडेंट हिंदूराव मेडिकल कॉलेज, दिल्ली
(उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर निवासी। सिद्धार्थ मेडिकल कॉलेज, विजयवाड़ा से एमबीबीएस। एनेस्थीसिया एंड क्रिटिकल केयर मरीजों की सेवा में जुटी हुई हैं।)
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हम लोग 15 दिन कोविड वार्ड में ड्यूटी देने के बाद वापस 15 दिन के लिए एक होटल में क्वारंटीन रहती हैं। मंगलवार को जब मैं 15 दिन बाद कोविड वार्ड से बाहर आई तो मां को फोन किया। मां को देखते ही आंखों में आंसू छलक उठे। मैं बार-बार बस यही कह रही थी, “मरीजों में आपको देख लेती हूं मां, मेरी यहां बहुत जरूरत है। यहां इन लोगों का मेरे जैसों के अलावा दूसरा कोई नहीं है।
आप चिंता न करो, मैं वापस जरूर आऊंगी।” इतना सुनते ही उधर से रोती मां के चेहरे पर मुस्कान आ गई और उन्होंने कहा, “शाबाश, बेटा! तू बस ऐसे ही सेवा करती रह। जब तू आएगी तो मैं तेरी पंसदीदा खीर बनाकर दूंगी:-डॉ. ज्योतिका मल्होत्रा ,जूनियर रेजीडेंट, आरएमएल अस्पताल, नई दिल्ली
(गाजियाबाद मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने के बाद दिल्ली के रोहिणी निवासी डॉ. ज्योतिका यहां मरीजों की सेवा में जुटी हुई हैं।)