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Space Docking Experiment: अंतरिक्ष डॉकिंग के बाद इसरो का नया प्लान, निशाने पर एक और तकनीकी उपलब्धि पर; जानें

Tue, 31 Dec 2024 11:43 AM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, श्रीहरिकोटा
पीटीआई, श्रीहरिकोटा Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 31 Dec 2024 11:43 AM IST
सार

मिशन के निदेशक एम. जयकुमार ने कहा कि पीएसएलवी-सी60 मिशन को पूरा कर लिया गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख एस. सोमनाथ ने कहा कि रॉकेट ने 15 मिनट से अधिक की उड़ान के बाद उपग्रहों को 475 किलोमीटर की वृत्ताकार कक्षा में स्थापित कर दिया है।

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Space docking experiment: Spacecraft injected into right orbit, ISRO eyes another tech feat Know all about it
इसरो का स्पेडएक्स मिशन लॉन्च - फोटो : अमर उजाला

भविष्य के अंतरिक्ष मिशन के लिए महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी अंतरिक्ष 'डॉकिंग' का प्रदर्शन करने वाले इसरो के दो अंतरिक्ष यान सोमवार की देर रात सफलतापूर्वक एक दूसरे से अलग हो गए। उन्हें वांछित कक्षा में स्थापित कर दिया गया। अंतरिक्ष एजेंसी ने इसकी जानकारी दी।

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Space docking experiment: Spacecraft injected into right orbit, ISRO eyes another tech feat Know all about it
ISRO - फोटो : ANI
मिशन के निदेशक एम. जयकुमार ने कहा कि पीएसएलवी-सी60 मिशन को पूरा कर लिया गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख एस. सोमनाथ ने कहा कि रॉकेट ने 15 मिनट से अधिक की उड़ान के बाद उपग्रहों को 475 किलोमीटर की वृत्ताकार कक्षा में स्थापित कर दिया है। उन्होंने कहा कि इसलिए, जहां तक हमारा सवाल है, रॉकेट ने अंतरिक्ष यान को सही कक्षा में स्थापित कर दिया है और 'स्पाडेक्स' उपग्रह एक के पीछे एक चले गए हैं, और समय के साथ ये आगे की दूरी तय करेंगे और उनके करीब 20 किलोमीटर दूरी तय करने के बाद 'डॉकिंग' की प्रक्रिया शुरू होगी।
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ISRO - फोटो : ANI
डॉकिंग प्रक्रिया में एक और सप्ताह का समय लग सकता है
सोमनाथ ने मिशन नियंत्रण केंद्र में अपने संबोधन में कहा कि हमें उम्मीद है कि डॉकिंग प्रक्रिया में एक और सप्ताह का समय लग सकता है और यह बहुत कम समय में...करीब सात जनवरी को होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मिशन में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा पीओईएम-4 है, जिसमें स्टार्टअप, उद्योग, शिक्षा जगत और इसरो केंद्रों से 24 पेलोड हैं। सोमनाथ ने कहा कि इन्हें मंगलवार सुबह प्रक्षेपित किया जाना है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक रात भर काम करेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पीओईएम-4 ऑपरेशन करने के लिए वांछित कक्षा स्तर तक पहुंच जाए।
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ISRO - फोटो : ANI
मिशन में पीओईएम-4 भी
सोमनाथ ने बाद में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में पत्रकारों से कहा कि पीएसएलवी-सी60 मिशन ने 220 किलोग्राम वजन वाले दो स्पाडेक्स उपग्रहों को 475 किलोमीटर की वांछित वृत्ताकार कक्षा में स्थापित किया गया है जबकि पहले 470 किलोमीटर की दूरी तय की गई थी। इस मिशन में पीओईएम-4 भी है, जिसमें अनुसंधान और विकास के लिए 24 पेलोड हैं।
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ISRO - फोटो : ANI
'पेलोड हैं, उपग्रह नहीं'
अंतरिक्ष विभाग के सचिव सोमनाथ ने कहा कि वे पेलोड हैं, उपग्रह नहीं। उन्हें अगले दो महीनों में प्रयोग करने के लिए (पीएसएलवी रॉकेट के) चौथे चरण से जोड़ा जाएगा। पीएसएलवी रॉकेट के ऊपरी चरण को 350 किलोमीटर की निचली कक्षा में लाया जाएगा और यह प्रक्रिया अभी जारी है। उसके बाद हम कई और गतिविधियां करेंगे।
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