देशभर के वक्फ बोर्डों में जवाबदेही व पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वक्फ संशोधन विधेयक आज 12 बजे लोकसभा में पेश किया गया। इसके जरिए मौजूदा वक्फ कानून में बदलाव किया जाना है। विधेयक पर कार्यमंत्रणा समिति (बीएसी) ने चर्चा के लिए आठ घंटे का समय तय किया है। पूरे विपक्ष समेत कई मुस्लिम संगठन विधेयक के विरोध में हैं, मगर सत्ताधारी भाजपा ने राजग सहयोगियों की मदद से इसे पारित कराने की तैयारी कर ली है। तेलुगुदेशम पार्टी (टीडीपी) और जनता दल-यू विधेयक पर सरकार के साथ हैं।
Waqf Bill: आसान सवाल-जवाब के जरिए समझें वक्फ से जुड़े मौजूदा मामले को; इस पर क्यों मची रार? विस्तार से जानें
लोकसभा में बुधवार को पेश किए गए वक्फ संशोधन विधेयक प्रावधानों में कई अहम परिवर्तन के कारण नए स्वरूप में होगा। विधेयक के कानून बन जाने के बाद वक्फ संपत्ति विवाद सुलझाने में अब राज्य सरकारों को पहले से अधिक शक्तियां हासिल होंगी। इसके अतिरिक्त प्रस्तावित कानून का असर पुरानी मस्जिदों, दरगाहों या मुसलमानों के धार्मिक संस्थानों पर नहीं पड़ेगा।
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वक्फ प्रबंधन के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक निकाय कौन से हैं और उनकी भूमिकाएं क्या हैं?
वक्फ संपत्तियों का प्रशासन वर्तमान में वक्फ अधिनियम-1995 द्वारा किया जाता है। यह केंद्र सरकार द्वारा अधिनियमित और विनियमित है। वक्फ प्रबंधन में शामिल प्रमुख प्रशासनिक निकाय हैं...
- केंद्रीय वक्फ परिषद (सीडब्ल्यूसी): यह सरकार और राज्य वक्फ बोर्डों को नीति पर सलाह देती है, लेकिन वक्फ संपत्तियों को सीधे नियंत्रित नहीं करती है।
- राज्य वक्फ बोर्ड (एसडब्ल्यूबी) : यह हर राज्य में वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन और सुरक्षा करते हैं।
- वक्फ न्यायाधिकरण : विशेष न्यायिक निकाय, जो वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवादों की सुनवाई करते हैं।
वक्फ बोर्ड से संबंधित मुद्दे क्या हैं?
वक्फ संपत्तियों की अपरिवर्तनीयता: एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ के सिद्धांत से विवाद। जैसे कि बेट द्वारका में द्वीपों पर किए गए दावे, जिन्हें अदालतों ने भी उलझन भरा माना है। कानूनी विवाद और कुप्रबंधन: वक्फ अधिनियम, 1995 और इसका 2013 का संशोधन प्रभावकारी नहीं रहा है। इसके कारण कई समस्याएं पैदा हुईं-
- अवैध कब्जे
- कुप्रबंधन व स्वामित्व विवाद
- संपत्ति पंजीकरण और सर्वेक्षण में देरी
- बड़े पैमाने पर मुकदमे और मंत्रालय को शिकायतें
न्यायिक निगरानी नहीं : वक्फ न्यायाधिकरणों के फैसलों को उच्च न्यायालयों में चुनौती नहीं दी जा सकती।
- वक्फ संपत्तियों का अधूरा सर्वेक्षण: सर्वेक्षण आयुक्त का काम खराब रहा है, जिससे देरी हुई है। गुजरात और उत्तराखंड में अभी तक सर्वेक्षण शुरू भी नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश में 2014 में आदेशित सर्वेक्षण अब भी लंबित है। विशेषज्ञता की कमी और राजस्व विभाग के साथ खराब समन्वय ने पंजीकरण प्रक्रिया को धीमा कर दिया है।
- कानूनों का दुरुपयोग : कुछ राज्य वक्फ बोर्डों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया, जिससे सामुदायिक तनाव पैदा हुआ है। निजी संपत्तियों को वक्फ घोषित करने के लिए अधिनियम की धारा 40 का व्यापक दुरुपयोग किया गया है, जिससे कानूनी लड़ाई और अशांति पैदा हुई। 8 राज्यों से मिली जानकारी के अनुसार, वहां धारा 40 के तहत 515 संपत्तियों को वक्फ घोषित किया गया है।
- वक्फ अधिनियम की सांविधानिक वैधता : वक्फ अधिनियम केवल एक धर्म पर लागू है, जबकि अन्य के लिए कोई समान कानून मौजूद नहीं है। दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है, जिसमें सवाल उठाया गया है कि क्या वक्फ अधिनियम सांविधानिक है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
सितंबर 2024 तक के आंकड़ों से पता चलता है कि 5,973 सरकारी संपत्तियों को वक्फ घोषित किया गया है...
- तमिलनाडु: थिरुचेंथुरई गांव का किसान वक्फ बोर्ड के पूरे गांव पर दावे के कारण अपनी जमीन नहीं बेच पाया।
- गोविंदपुर, बिहार: अगस्त 2024 में, बिहार सुन्नी वक्फ बोर्ड के पूरे गांव पर दावे का मामला पटना उच्च न्यायालय में मामला चला। मामला विचाराधीन है।
- केरल: सितंबर 2024 में, एर्नाकुलम जिले के 600 ईसाई परिवार अपनी पुश्तैनी जमीन पर वक्फ बोर्ड के दावे का विरोध कर रहे हैं।
- कर्नाटक: विजयपुरा में 15,000 एकड़ जमीन पर बोर्ड का दावा। किसानों ने विरोध किया। बेल्लारी, चित्रदुर्ग, यादगीर और धारवाड़ में भी विवाद।
- उत्तर प्रदेश: वक्फ बोर्ड के भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन की शिकायतें।