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ये लड़की केसुला का पेड़ बन सकती है!

अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Mon, 20 Mar 2017 01:21 PM IST
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जेकेके में प्रस्तुति देते कलाकार - फोटो : अमर उजाला
जवाहर कला केंद्र में चल रहे परफोर्मिंग आर्ट फेस्टिवल नवरस के दौरान कई रंग देखने को मिल रहे हैं। नवरस में जहां गायन के दिग्गज कलाकारों की प्रस्तुतियां हुई, तो वहीं अदाकारी के अनोखे रंग भी देखने को मिले। सुबह की रागों के कार्यक्रम मार्निंग रागाज में शास्त्रीय गायिका श्रुति साडोलिकर ने विभिन्न रागों को सुनाया। वहीं मीट द आर्टिस्ट के तहत गायिका शुभा मुद्गल और यतींद्र मिश्रा ने जानी मानी गायिका लता मंगेशकर पर आधारित पुस्तक लता मंगेशकरः ए म्यूजिकल जर्नी पर चर्चा की।  नाटक फूल केसुला फूल के मंचन ने भी जमकर तालियां बटोरी, इस अनूठी कहानी में एक लड़की  पेड़ का रूप धारण कर सकती है।
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खिलने लगा केसुला का फूल

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जेकेके में प्रस्तुति देते कलाकार - फोटो : अमर उजाला
समारोह के तहत रंगायन में राजेंद्र पांचाल निर्देशित और ए. के. रामानुजन लिखित एवं अनुवादित नाटक ‘फूल केसुला फूल‘ का मंचन किया गया। यह नाटक कन्नड़ लोककथा से प्रेरित है। मानव एवं प्रकृति के अंतर-संबंधों पर आधारित यह नाटक अम्बिकादत्त चतुर्वेदी, दुर्गादान सिंह गौड़, रघुराज सिंह हाड़ा, मुकुट मणिरराज एवं सुधा जौहरी जैसे विभिन्न लेखकों की रचनाओं एवं कविताओं के संग्रह पर आधारित था।
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लगा दर्शकों का जमावड़ा

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प्रस्तुतियां देखते दर्शक - फोटो : अमर उजाला
यह एक केसुला नाम की लड़की की कहानी है, जिसे प्रकृति से विशेष वरदान मिला हुआ है जिससे वह स्वयं को केसुला के पेड़ में बदल सकती है और पुनः मनुष्य स्वरूप में भी लौट सकती है। नाटक आगे बढ़ता है और एक राजकुमार को केसुला से प्यार हो जाता है और वह इसके लिए सबकुछ भुला देता है। घटनाक्रम आगे बढ़ता है और केसुला से राजकुमार की बहन सुन्दरी नफरत करने लगती है और वह बदला लेने की सोचती है। वह केसुला को जंगल में ले जाती है और उसे केसुला के पेड़ में परिवर्तित होने के लिए बाध्य करती है। जेकेके में इन प्रस्तुतियों को देखने बड़ी संख्या में दर्शक भी पहुंचे।

गूंजी शुभा मुद्गल की दमदार आवाज

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प्रस्तुति देते हुए शुभा मुद्गल - फोटो : अमर उजाला
जानी मानी हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका शुभा मुद्गल ने जेकेके में अपने बैंड के साथ मल्टी-कल्चरल फेस्टिवल नवरस में प्रस्तुति दी। अपनी प्रस्तुति के दौरान शुभा ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत और पॉप फ्यूजन म्यूजिक की जुगलबंदी प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम शुरू किया। कार्यक्रम में अपने म्यूजिक प्रोजेक्ट के लिए बनाई गई मूल रचनाओं के अतिरिक्त शुभा ने दमदार आवाज के माध्यम से प्रख्यात कवियों गुलजार और प्रसुन जोश की रचनाओं को गहराई दी। उन्होंने सावरियां, कल की रात गिरी थी शबनम, सीखों ना नैनों की भाषा, खुद पर ही, जैसे गीत सुनायें और लोगों की वाहवाही लुटी।

 
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मॉर्निंग रागाज में सुबह की बंदिशे

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जेकेके में प्रस्तुति देते कलाकार - फोटो : अमर उजाला
जेकेके लॉन्स में मॉर्निंग रागाज़ कार्यक्रम में शास्त्रीय गायिका श्रुति साडोलिकर ने प्रातःकालीन राग अहीर भैरव में भोर भई...., राग विभास में हे श्याम श्याम..., राग ललित में घटने लागी रैन... और राग भैरवी में डारो ना, डारो ना रंग मोपे डारो ना... बन्दिश सुनाई। राग अहीर भैरव और ललित में उन्होंने विलम्बित तीन ताल में जबकि राग विभास रूपक ताल मध्य लय में राग भैरवी तीन ताल मध्य लय में प्रस्तुत की।
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