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वंधामा नरसंहार की तस्वीरें: 28 साल बाद भी जिंदा है कश्मीरी पंडितों पर जुल्म की डरावनी यादें, जो आज भी डराती है
अजीम यूसुफ/फिरदौस अहमद अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: निकिता गुप्ता
Updated Sun, 25 Jan 2026 01:32 PM IST
सार
25 जनवरी 1998 की रात गांदरबल के वंधामा गांव में आतंकियों ने 23 कश्मीरी पंडितों समेत 24 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी, जिससे पूरा कश्मीर शोक में डूब गया। 28 साल बाद भी उस खौफनाक नरसंहार की यादें लोगों के दिलों में जिंदा हैं और दर्द आज भी उतना ही गहरा है।
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गांदरबल के वंधामा गांव में कश्मीरी पंडितों का खंडहर बना घर।
- फोटो : अमर उजाला
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हर साल 25 जनवरी को गांदरबल के वंधामा में हुई खौफनाक वारदात लोगों की यादों में ताजा हो जाती है। इस दिन नकाबपोश बंदूकधारियों ने 23 कश्मीरी पंडितों की बेरहमी से हत्या कर दी थी। यह घटना 25 व 26 जनवरी 1998 की दरमियानी रात को हुई थी। लोगों ने बताया कि उस समय तक ज्यादातर कश्मीरी पंडित घर छोड़ चुके थे। वंधामा में चार-पांच परिवार हमारे साथ खुशी-खुशी रह रहे थे। उस काली रात वे स्थानीय मस्जिद में तरावीह की नमाज पढ़ रहे थे। तभी उन्हें गोलियों की आवाजें और चीखें सुनाई दीं। यह रमजान के महीने में शब-ए-कद्र की रात थी जब इस गांव में खून-खराबा हुआ।
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गांदरबल के वंधामा गांव में कश्मीरी पंडितों का खंडहर बना घर।
- फोटो : अमर उजाला
लोगों ने पहले सोचा कि गणतंत्र दिवस के मौके पर कोई झड़प हुई है लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनके ही कस्बे के कई लोगों के सीने इन गोलियों से छलनी हो गए हैं। डर के मारे कोई भी मस्जिद से बाहर नहीं निकल पाया। हमारी औरतें बाहर से आईं और बताया कि मंदिर समेत पंडितों के घरों में आग लग गई है। एक स्थानीय व्यक्ति ने याद करते हुए बताया, हम यह देखने के लिए मस्जिद से बाहर आए कि क्या हो रहा है और मंदिर समेत घरों को आग की लपटों में घिरा देखकर हैरान रह गए, वहां लाशें पड़ी थीं।
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गांदरबल के वंधामा गांव में कश्मीरी पंडितों का खंडहर बना घर।
- फोटो : अमर उजाला
वंधामा के पीर मोहम्मद अशरफ ने बताया कि 26 जनवरी की सुबह पहुंचे तो गांव में रहने वाले 24 लोग जिनमें औरतें, मर्द और बच्चे थे खून से लथपथ पड़े थे। इनमें एक कश्मीरी मुसलमान और 23 कश्मीरी पंडित थे। समुदाय का 14 साल का एक अकेला सदस्य विनोद कुमार जिसे आशु के नाम से जाना जाता था इस खूनी हमले में बच गया और भागकर पास की झाड़ियों में छिप गया।
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गांदरबल के वंधामा गांव में कश्मीरी पंडितों का खंडहर बना घर।
- फोटो : अमर उजाला
परिवारों के साथ जम्मू से आए पांच मेहमानों की भी हत्या: मरने वालों में गांव के चार परिवारों के सदस्य और पांच मेहमान भी शामिल थे जो जम्मू से अपने रिश्तेदारों से मिलने आए थे। सभी इस खूनी वारदात में मारे गए। अधिकारियों ने इन मौतों के लिए आतंकियों को जिम्मेदार ठहराया।
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गांदरबल के वंधामा गांव में कश्मीरी पंडितों का खंडहर बना घर।
- फोटो : अमर उजाला
तत्कालीन संयुक्त मोर्चे के प्रधानमंत्री आईके गुजराल 28 जनवरी को वंधामा पहुंचे। उनके साथ तत्कालीन गवर्नर जनरल केवी कृष्णराव (रिटायर्ड), मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला और तत्कालीन केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रो. सैफुद्दीन सोज भी थे। पुलिस ने गांदरबल पुलिस स्टेशन में मामला भी दर्ज किया। मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया तो पूरा कश्मीर शोक में डूबा था। बंधामा के हर बाशिंदे की आंख नम थी। लोगों के अनुसार, आशु ने पुलिस को बताया था, हर जगह चीख-पुकार मची थी, बंदूकधारियों ने मेरे परिवार के सभी सदस्यों को घसीटा और उन पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं। उन दरिंदों ने मंदिर में भी आग लगा दी।
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