उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में सोमवार शाम एक आतंकी हमले में सीआरपीएफ के तीन जवान शहीद हो गए। हमले में चार जवान घायल भी हुए हैं। कार सवार दहशतगर्दों ने सीआरपीएफ पार्टी को निशाना बनाते हुए अंधाधुंध फायरिंग की। सीआरपीएफ जवानों की जवाबी कार्रवाई से दहशतगर्द मौके से भाग निकले। घटना के बाद पूरे इलाके में व्यापक पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। हमले की जिम्मेदारी द रिजिंटेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है।
टीआरएफ ने ली हंदवाड़ा हमले की जिम्मेदारी, आतंकी गनी के फिर से सक्रिय होने की आशंका
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आतंकियों ने हंदवाड़ा के वंगाम इलाके में तैनात सीआरपीएफ पार्टी पर शाम लगभग पौने छह बजे हमला करते हुए अंधाधुंध फायरिंग की। इसमें सात जवान घायल हो गए। इन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां तीन ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद सीआरपीएफ, सेना और पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
सूत्रों के अनुसार इस इलाके से सटे क्रालगुंड का एक आतंकी गनी भाई क्रालगुंड और आसपास के इलाकों में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता है। कुछ साल सक्रिय रहने के बाद उसने आत्मसमर्पण कर दिया था। पिछले डेढ़ साल से वह दोबारा सक्रिय हुआ है। आशंका है कि हमले में वह शामिल रहा होगा। क्रॉस फायरिंग में एक किशोर के भी मारे जाने की सूचना है। सीआरपीएफ प्रवक्ता पंकज सिंह ने बताया कि घटनास्थल पर एक और शव बरामद किया गया है लेकिन हथियार नहीं मिले हैं। शव आतंकी का है या किसी और का, यह पता लगाया जा रहा है।
हमले में शहीद होने वालों में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के चचकादुआ गांव के अश्विनी कुमार यादव, बिहार के औरंगाबाद जिले के गोह के संतोष कुमार मिश्रा और तमिलनाडु के चंद्रशेखर शामिल हैं। आतंकियों ने घटनास्थल की पूरी रेकी कर ली थी। उन्हें पता था कि सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति के लिए रोजाना यहां सीआरपीएफ के जवानों की तैनाती रहती है। आतंकियों ने ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए ही हमले को अंजाम दिया।
बीते दो दिन में सुरक्षाबलों के आठ जवान शहीद हो गए हैं। हंदवाड़ा में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में पाकिस्तानी लश्कर कमांडर हैदर और एक स्थानीय आतंकी मारा गया था। इस मुठभेड़ में सेना के कर्नल आशुतोष शर्मा, मेजर अनुज सूद, एसआई सगीर काजी सहित सेना के और दो जवान शहीद हुए थे।