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तस्वीरें: कश्मीरी शादियों पर पाबंदियों का साया, घटी मेहमानों की सूची, व्यापारियों पर भी पड़ा असर

एजेंसी, श्रीनगर Published by: Pranjal Dixit Updated Mon, 19 Aug 2019 10:52 PM IST
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No lavish weddings in Kashmir Marriage, Mutton sellers, wazwan cooks, jewellers pay the price
जम्मू-कश्मीर में पारंपरिक शादियों के इस मौसम में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद लागू प्रतिबंध समारोहों पर भारी पड़ रहे हैं। लोग भव्य आयोजनों के स्थान पर साधारण ढंग से समारोह का आयोजन कर रहे हैं। इसकी सीधा असर पड़ रहा है शादी समारोह से जुड़े कारोबारियों पर। मसलन मांस विक्रेता, टेंट वाले, वाजवान (विशेष कश्मीरी व्यंजन)बनाने वाले खानसामे, जेवरात कारोबारी इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इनके व्यापार में लगभग 70 फीसदी तक गिरावट आयी है। 
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पाबंदियों के दरम्यान जो स्थानीय दैनिक समाचार पत्र प्रकाशित हो रहे हैं उनमें शादी समारोह साधारण तरीके से आयोजित किए जाने तथा अधिकांश को रद्द किए जाने के विज्ञापन व्यापक पैमाने पर प्रकाशित हो रहे हैं। सोमवार को ऐसे ही एक समाचार पत्र में इस प्रकार के 25 से अधिक विज्ञापन प्रकाशित हुए हैं। 

 
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एक विज्ञापन दाता ने लिखा है कि मौजूदा हालात में मेरे बेटे का विवाह समारोह साधारण तरीके से आयोजित किया जाएगा। जबकि वलीमा (शादी के बाद होने वाली दावत) को रदद् कर दिया गया है। असुविधा के कारण पछतावा होता है। एक स्थानीय उर्दू दैनिक में प्रकाशित विज्ञापन पढ़ता है। चूंकि व्यापक पैमाने पर समाचार पत्रों का वितरण नहीं हो पा रहा है ऐसे में लोग रिश्तेदारों को सूचना देने के लिए स्थानीय टीवी चैनल्स का भी सहारा ले रहे हैं। ये निजी टीवी चैनल मुफ्त में लोगों का ऑडियो व वीडियो संदेश प्रसारित कर रहे हैं।
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एक स्थानीय नागरिक अब्दुल मजीद की बेटी का निकाह शनिवार को है। वह कहते हैं कि ये निजी टीवी चैनल डीटीएच (डायरेक्ट टू होम) प्लेट फार्म पर उपलब्ध हैं। इसलिए इनके माध्यम से रिश्तेदारों तक आसानी से संदेश पहुंचाया जा सकता है। क्यों कि इस हालात में दूसरा कोई साधन उपलब्ध नहीं है। 
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मेहमानों की सूची 800 से घटकर 200 पर टिकी
शादियों के इस सीजन में कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विशेष कश्मीरी व्यंजन वाजवान बनाने वाले खानसामा मुश्ताक अहमद के अनुसार, एक औसत शादी की दावत में अतिथियों की सूची में 600-800 लोग शामिल होते हैं परंतु अब हमें केवल 150-200 लोगों के लिए खाना पकाने के लिए कहा जाता है। इसमे सिर्फ दूल्हे या दुल्हन के करीबी परिवार और दोस्त शामिल होते हैं। अहमद ने कहा कि मौजूदा दौर में उसकी कमाई 70 प्रतिशत से अधिक घट गई है। की कमी आई है। वह कहते हैं कि वर्ष 2008 के बाद से शादियों का यह पांचवां मौसम है जो अलग-अलग कारणों से प्रभावित हुआ है। वर्ष 2014 में जब बाढ़ ने तबाही मचायी थी तब भी कमोबेश इसी तरह की परिस्थितियां बनीं थी। 

 
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