जम्मू-कश्मीर के बेगपोरा में मारा गया हिजबुल कमांडर रियाज अहमद नायकू बेहद शातिर था। वह एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए सड़क मार्ग का कम ही उपयोग करता था। इतना ही नहीं घर पहुंचने के लिए उसने एक सुरंग बना रखी थी। कल यानी कि मंगलवार रात इलाके में उसकी मौजूदगी की सूचना मिलते ही सेना ने सबसे पहले उस सुरंग को खंगालना शुरू किया। खुद को शातिर समझने वाला आतंकी शायद ये भूल गया था कि यही सुरंग उसकी मौत का रास्ता तैयार करेगी।
नायकू की सुरंग ही बनी उसकी मौत का रास्ता, घाटी में रियाज ने शुरू किया था ये रिवाज
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नायकू ने कई सुरक्षाकर्मियों के परिजनों का अपहरण किया और करवाया था। घाटी के कई युवाओं को गुमराह करके उसने उन्हें आतंकी भी बनाया था। घाटी में किसी आतंकी के मारे जाने पर उसे बंदूकों से सलामी देने का चलन भी रियाज नायकू ने शुरू किया था। आज उसके मारे जाने के बाद जम्मू कश्मीर के पूर्व डीजीपी वैद ने कहा कि वह कई पुलिसकर्मियों के अपहरण और हत्या के लिए जिम्मेदार था।
रियाज अहमद नायकू घाटी का सबसे वांछित आतंकी था। मुठभेड़ में सबजार भट्ट की मौत के बाद से इसने कमान संभाली थी। दिसंबर 2012 में हिजबुल में शामिल हुआ और महज पांच सालों में संगठन के प्रमुख बन गया। वह तकनीक में महारत रखता था। एक आतंकी के जनाजे में शामिल होने के बाद उसने सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान को समर्थन देने की बात कही थी।
नायकू सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर 2016 में पोस्टर ब्वॉय बुरहान वानी की मौत के बाद आना शुरू हुआ था। उसके सिर पर 12 लाख रुपए का इनाम था। अवंतीपुरा के दुरबग के नायकू मोहल्ले का निवासी नायकू घाटी के वांछनीय आतंकियों की A++ श्रेणी में आता था।
उसने घाटी में सब्जार भट की मौत के बाद हिजबुल मुजाहिद्दीन के मुखिया का पद संभाला था। नायकू को पूरी घाटी में हिजबुल का कमांडर माना जाता था। सुरक्षा एजेंसियों ने इससे पहले उसे कई बार घेरा था, लेकिन हर बार वह किसी तरह बचकर भाग निकलने में सफल हो जाता था।