लद्दाख में सिंधु नदी के तट पर हर साल लगने वाला सिंधु दर्शन महोत्सव भी कोरोना काल की भेंट चढ़ गया है। हर साल जून महीने के आखिरी सप्ताह में होने वाले महोत्सव में देश-विदेश से हजारों लोग हिस्सा लेते हैं। सभ्यता और संस्कृति के अनोखे संगम के इस प्रतीक में केंद्र सरकार भी अपनी भागीदारी करती रही है।
इस साल नहीं होगा लद्दाख में सिंधु दर्शन महोत्सव, ऐसे अद्भुत नजारे विदेशियों को भी यहां खींच लाते थे
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लेह स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी काउंसलर ग्याल वांग्याल के अनुसार लद्दाख के इस बड़े महोत्सव सिंधु दर्शन महोत्सव को इस साल कोरोना के चलते स्थगित करना पड़ा है। देश के अलावा विदेशों में भी लोगों को इस उत्सव का बेसब्री से इंतजार रहता था। लेकिन इस बार परिस्थितियां ही ऐसी हैं कि महोत्सव को आयोजित नहीं किया जा सकता।
महोत्सव में हिस्सा लेने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से लोग जम्मू पहुंचकर सड़क मार्ग से लद्दाख पहुंचते थे। ऐसे में जम्मू में भी खासी रौनक रहती थी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व अन्य कई संगठन यात्रियों का स्वागत करते थे और कई तरह के कार्यक्रमों का जम्मू में इस दौरान आयोजन किया जाता था।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत सह कार्यवाह अवतार कृष्ण के अनुसार सिंधु दर्शन महोत्सव सभ्यता और संस्कृति का संगम है और हमारी प्राचीन संस्कृति से भी जुड़ा हुआ है। कोरोना काल के चलते इस साल सिंधु दर्शन महोत्सव का आयोजन नहीं हो पाया है। अब इसे अगले साल आयोजित किया जाएगा।
सिंधु दर्शन महोत्सव लेह से तकरीबन 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कस्बा शे मानला में मनाया जाता है। सिंधु नदी के तट पर पूजा पाठ के अलावा लद्दाख की परंपराओं और संस्कृतियों को देखने का स्वर्णिम अवसर इस उत्सव के माध्यम से देश के लोगों को मिलता है। हिंदू, बौद्ध, सिख और अन्य धर्म के लोग उत्सव में शामिल होकर पूजा अर्चना करते हैं। महोत्सव में कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है।
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