Agam Khare Amar Ujala Samvad: 'हरियाणा स्वर्णिम शताब्दी की ओर' थीम पर आधारित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में स्वास्थ्य और तकनीक जगत के विशेषज्ञों ने उभरते स्वास्थ्य संकटों पर गंभीर चर्चा की। इस दौरान उजाला सिग्नस के सीईओ नितिन नाग और एब्सोल्यूट के फाउंडर अगम खरे ने आज की युवा पीढ़ी में बढ़ते सप्लीमेंट कल्चर पर चिंता जताई।
Amar Ujala Samwad: खुद से प्रोटीन पाउडर लेना कितना सुरक्षित, ऐसा करने से किन बीमारियों का बढ़ जाता है जोखिम?
Effects Of Protein Supplements On Liver: प्रोटीन पाउडर का सेवन करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसी विषय पर एब्सोल्यूट के फाउंडर अगम खरे ने अमर उजाला संवाद में कुछ कहा जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए। साथ ही प्रोटीन पाउडर खाने के नुकसान भी जानेंगे।
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किडनी पर पड़ता है अतिरिक्त बोझ
जब हम बिना जरूरत के अत्यधिक प्रोटीन पाउडर का सेवन करते हैं, तो शरीर में नाइट्रोजन अपशिष्ट का स्तर बढ़ जाता है। इन अपशिष्टों को शरीर से बाहर निकालने के लिए किडनी को दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय तक ऐसा करने से किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगती है और किडनी स्टोन या 'क्रोनिक किडनी डिजीज' का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टर हमेशा सलाह देते हैं कि प्रोटीन की मात्रा शरीर की आवश्यकता और शारीरिक गतिविधि के अनुसार ही होनी चाहिए।
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बाजार में मिलने वाले कई प्रोटीन पाउडर्स में छिपे हुए एडिटिव्स और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं जो लिवर के लिए टॉक्सिक हो सकते हैं। बिना परामर्श के इनके सेवन से लिवर में सूजन या 'नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर' जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि डाइटिशियन या किसी डॉक्टर से सलाह लेकर ही प्रोटीन पाउडर का सेवन करना चाहिए।
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कई लोगों को प्रोटीन पाउडर से ब्लोटिंग (पेट फूलना), कब्ज और गंभीर एसिडिटी की शिकायत होने लगती है। हमारा पाचन तंत्र प्राकृतिक भोजन की तुलना में सिंथेटिक प्रोटीन को पचाने में अधिक संघर्ष करता है। इसलिए अगर किसी को प्रोटीन पाउडर से ऐसी समस्या होती है तो तुरंत अपने डॉक्टर से परामर्श लेनी चाहिए।
अगम खरे और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए पहले प्राकृतिक खाद्य पदार्थों जैसे दालें, पनीर, अंडे, सोयाबीन और नट्स का सहारा लेना चाहिए। सप्लीमेंट केवल तभी लें जब आपकी डाइट से जरूरत पूरी न हो पा रही हो और वह भी किसी विशेषज्ञ की निगरानी में। ध्यान रखें बिना सोचे-समझे लिया गया सप्लीमेंट आपकी 'मसल बिल्डिंग' की चाहत को अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचा सकता है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।