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Smoking: सिगरेट की लत से छुटकारा कैसे पाएं? अरशद वारसी ने बताया 1 हफ्ते में स्मोकिंग छोड़ने का सीक्रेट

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sun, 15 Mar 2026 09:01 PM IST
सार

बॉलीवुड अभिनेता अरशद वापसी ने बताया है कि हेल्थ, परिवार और फिटनेस को प्राथमिकता देने के लिए उन्होंने सिगरेट छोड़ने का फैसला किया। वह करीब तीस साल से इस आदत का शिकार थे। फिर इससे कैसे मुक्ति पाई, आइए जान लेते हैं।

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अरशद वारसी ने छोड़ी स्मोकिंग - फोटो : Freepil.com

धूम्रपान हमारी सेहत के लिए सबसे बड़े दुश्मनों में से एक है। इसे कई बीमारियों का घर माना जाता है। जो लोग तंबाकू का सेवन करते हैं उनमें समय के साथ कई तरह की श्वसन समस्याओं, दिल की बीमारी और कैंसर तक का खतरा बढ़ जाता है। धूम्रपान को विशेषज्ञ एक खतरनाक लत मानते हैं, जो धीरे-धीरे शरीर को गंभीर बीमारियों की चपेट में लाती जाती है।



स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर किसी को धूम्रपान की लत है और वो इसे छोड़ देता है तो इससे होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को कम किया जा सकता है। बॉलीवुड अभिनेता अरशद वारसी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने धूम्रपान छोड़ दी है। करीब 35 साल से उन्हें धूम्रपान की आदत थी, हालांकि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही रणनीति से उन्होंने निकोटिन की लत पर काबू पाया है। 

अरशद वारसी ने लोगों से भी धूम्रपान छोड़ने की अपील की है, इसके लिए उन्होंने कुछ टिप्स भी दिए हैं।

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अरशद वारसी ने शेयर की अपनी कहानी - फोटो : इंस्टाग्राम@arshad_warsi

अरशद वारसी ने कैसे छोड़ी सिगरेट?

अरशद वारसी ने बताया 35 साल तक धूम्रपान करने की आदत, सिर्फ एक हफ्ते में छूट गई है। उन्होंने इसके लिए एक मोबाइल ऐप को क्रेडिट दिया है। एक इंटरव्यू में उन्होने कहा, कोई भी समझदार इंसान सबसे पहले यही कहेगा कि आप किसी ऐप की मदद से सिगरेट पीना कैसे छोड़ सकते हैं? मैं पिछले 35 वर्षों से सिगरेट पी रहा था, मुझे भी लगता था मैं इसे कभी नहीं छोड़ पाऊंगा।
 

  • मैं सिगरेट छोड़ने के लिए इतना बेताब था कि मैंने सोचा, चलो एक बार कोशिश करके देखते हैं।
  • मैं कसम खाकर कहता हूं, मैंने सिर्फ एक हफ्ते में सिगरेट पीना छोड़ दिया और उसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं हुआ। 
  •  'QuitSure' एप ने इसमें मदद की है। इसमें सिगरेट का एक टिक मार्क बना होता है। यह आपके अवचेतन मन को एक तरह से फिर से प्रोग्राम कर देता है। 
  • ये एप आपको समझने में मदद करता है कि निकोटिन वास्तव में क्या है और इसे कैसे छोड़ा जा सकता है?
  • अरशद कहते हैं, मैं उन सभी लोगों को इस एप के इस्तेमाल के लिए रिकमेंड करता हूं जो सिगरेट छोड़ना चाहते हैं पर हो नहीं पा रहा है।
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स्मोकिंग के कई नुकसान - फोटो : Freepil.com

अच्छी सेहत के लिए धूम्रपान छोड़ना जरूरी

अरशद वापसी ने इंटरव्यू में बताया कि परिवार और फिटनेस को प्राथमिकता देने के लिए उन्होंने सिगरेट छोड़ने का फैसला किया।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, धूम्रपान छोड़ना जरूरी है क्योंकि इससे फेफड़ों के कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और इम्युनिटी कमजोर होने का खतरा बढ़ता है। 

जब आप सिगरेट पीते हैं तो इसमें मौजूद निकोटिन नामक रसायन बहुत तेजी से फेफड़ों के जरिए खून में घुलकर मस्तिष्क तक पहुंच जाता है। यह दिमाग में डोपामिन नामक फील-गुड हार्मोन रिलीज करता है, जिससे आपको थोड़ी देर के लिए आराम और खुशी का एहसास होता है। यही सुख धीरे-धीरे आदत में बदल जाता है। दिमाग बार-बार उसी एहसास को पाने के लिए निकोटिन की मांग करने लगता है। 

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धूम्रपान के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com

धूम्रपान को क्यों माना जाता है इतना खतरनाक?

तमाम अध्ययन इस बात को प्रमाणित करते हैं कि धूम्रपान कई गंभीर बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है। 
 

  • सिगरेट के धुएं में लगभग 7,000 से अधिक रसायन पाए जाते हैं, जिनमें से 70 से अधिक कैंसर पैदा करने वाले हो सकते हैं। 
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, धूम्रपान हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बनता है।
  • धूम्रपान का असर सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है और खून की नसों पर भी नकारात्मक असर हो सकता है।



शरीर के किन अंगों पर कैसे पड़ता है स्मोकिंग का असर

धूम्रपान का प्रभाव शरीर के लगभग हर अंग पर पड़ता है। 
 

  • लगातार धूम्रपान करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो जाती है।
  • धूम्रपान से खून गाढ़ा कर देता है और जिससे धमनियों में प्लाक जमने का खतरा बढ़ जाता है।
  •  धूम्रपान ब्लड प्रेशर को भी बढ़ा सकता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा रहता है।
  • धूम्रपान को मुंह-गले और खाने की नली के कैंसर का भी बड़ा कारण माना जाता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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