दुनियाभर में बढ़ती संक्रामक बीमारियां गंभीर चिंता का कारण बनी हुई हैं। बीते वर्षों में हमने कोरोना महामारी, निपाह, बर्ड फ्लू जैसी बीमारियों का व्यापक असर देखा। अमर उजाला में हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि कोरोना नए वैरिएंट्स के साथ फिर से बढ़ने लगा है, हालांकि इसके मामले काफी कंट्रोल में आ गए।
Infection Outbreak: 50 साल में पहली बार इस संक्रामक बीमारी का प्रकोप, बच्चों-बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खतरा
ऑस्ट्रेलिया में दशकों बाद डिप्थीरिया का पहला प्रकोप सामने आया है, जिससे दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों ने भारत में भी इस बीमारी को लेकर लोगों को अलर्ट कर दिया है। इसे वैक्सीन के जरिए आसानी से रोका जा सकता है।
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ऑस्ट्रेलिया में डिप्थीरिया का प्रकोप
22 अप्रैल को जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 23 मार्च से सांस से जुड़े डिप्थीरिया के 17 मामले सामने आए हैं। वहीं मई 2025 से त्वचा को प्रभावित करने वाले क्यूटेनियस डिप्थीरिया के 60 से अधिक केस सामने आए हैं।
- इस साल अब तक राज्य में 34 मामले रिपोर्ट किए गए हैं।
- कुछ क्षेत्र में, दिसंबर 2025 के बाद से डिप्थीरिया के मामलों में तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है।
- इन मामलों में मरीजों की उम्र 0-4 वर्ष से लेकर 70-74 साल के बीच की है।
ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 1926 और 1935 के बीच ऑस्ट्रेलिया में 4,000 से ज्यादा लोगों की डिप्थीरिया से मौत हुई थी। ऑस्ट्रेलिया में 1930 के दशक में टीकाकरण शुरू हुआ, और 1950 के दशक के बाद से यह बीमारी कंट्रोल में आ गई।
हालांकि कोविड महामारी के बाद से टीकाकरण का कवरेज कम हो गया है, जिसके कारण मामलों में लगातार बढ़ोतरी जारी है।
ऑस्ट्रेलिया में बढ़ते डिप्थीरिया के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दूसरे देशों को भी अलर्ट किया है। गौरतलब है कि कोविड के दौरान हुई वैक्सीनेशन में चूक के चलते भारत सहित कई देशों में मम्प्स-मीजल्स के मामले बढ़े हुए देखे गए थे।
चूंकि टीकाकरण की दर कम हुई है ऐसे में विशेषज्ञ डिप्थीरिया के खतरे के लेकर भी लोगों को अलर्ट कर रहे हैं।
डिप्थीरिया और इसके खतरे को जानिए
डिप्थीरिया एक गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो कोरिनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया नामक बैक्टीरिया के कारण होता है।
- ये मुख्य रूप से सांस की नली या त्वचा को प्रभावित करता है।
- इसके कारण गले में खराश, बुखार और गले में एक खास तरह की मोटी, भूरे रंग की झिल्ली बन जाती है।
- गंभीर स्थितियों में इस संक्रमण के कारण नसों से संबंधित जोखिम, हार्ट फेलियर और मौत तक का खतरा रहता है।
कैसे फैलती है ये बीमारी?
संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या नजदीकी संपर्क में आने से ये संक्रमण फैलता है। कुछ मामलों में यह त्वचा को भी प्रभावित कर सकता है, जिसमें घाव और संक्रमण हो जाता है।
- जिन लोगों का टीकाकरण (डीपीटी वैक्सीनेशन) पूरा नहीं हुआ है, उनमें इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता है।
- छोटे बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर इम्युनिटी वाले लोग इस तरह के संपर्क के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
- भीड़भाड़ वाले इलाकों, खराब स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी वाले क्षेत्रों में यह बीमारी तेजी से फैल सकती है।
क्या है इसकी पहचान और बचाव के तरीके
डिप्थीरिया के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 2 से 5 दिनों के भीतर दिखाई देने लगते हैं। शुरुआत में ये सामान्य सर्दी-खांसी जैसा लगता है जिसमें गले में खराश, बुखार, कमजोरी और सिरदर्द की समस्या होती है।
- बीमारी बढ़ने पर गले में एक मोटी परत बन जाती है, जो सांस लेने और निगलने में कठिनाई पैदा करती है।
- इसके अलावा गर्दन में सूजन, आवाज बैठने और सांस फूलने की भी दिक्कत हो सकती हैं।
- गंभीर मामलों में बैक्टीरिया दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है।
- नर्वस सिस्टम पर असर पड़ने से लकवा जैसी स्थिति भी हो सकती है।
डिप्थीरिया से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है। बच्चों को डीपीटी (डिप्थीरिया, पर्टुसिस और टेटनस) वैक्सीन समय पर लगवाना बेहद जरूरी है। यह वैक्सीन शरीर को इस संक्रमण से लड़ने की ताकत देती है। अगर किसी में डिप्थीरिया के लक्षण दिखाई दें, तो उससे दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों ने ऑस्ट्रेलिया में प्रकोप को देखते हुए भारत में भी लोगों को अलर्ट किया है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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