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पुरुषों को बैठकर पेशाब करना चाहिए या खड़े होकर?

Sun, 23 Feb 2020 12:08 PM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Sun, 23 Feb 2020 12:08 PM IST
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best way to pee for men
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

कई देशों में कई संस्कृतियों में बच्चों को सिखाया जाता है कि लड़के खड़े होकर पेशाब करते हैं जबकि लड़कियां बैठकर। मगर अब कई सारे देशों के स्वास्थ्य विभाग, इस व्यापक रूप से फैली और स्वाभाविक सी धारणा को लेकर सवाल उठा रहे हैं। पुरुषों को पेशाब कैसे करना चाहिए? यह सवाल कई बार स्वास्थ्य और साफ-सफाई को लेकर पूछा जाता है तो कुछ लोगों के लिए यह समान अधिकारों का भी मामला है। तो फिर सही कौन है? और सबसे जरूरी सवाल ये कि पुरुषों के लिए कौन सा तरीका सही है?

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

अधिकतर पुरुषों के लिए खड़े होकर पेशाब करने से आसान तरीका और कुछ नहीं है। इससे काम जल्दी भी निपटता है और यह एक तरह से व्यावहारिक तरीका भी है। क्या आपने कभी पुरुषों के सार्वजनिक मूत्रालयों के बाहर लंबी कतारें देखी हैं? वास्तव में शायद ही आपने कभी वहां कोई कतार देखी होगी। पुरुष अंदर जाते हैं और कुछ ही देर में निकल आते हैं। तुरंत निपट जाने वाले इस प्रक्रिया के पीछे दो कारण हैं-

पुरुष तुरंत पेशाब कर सकते हैं क्योंकि उन्हें ऐसा करने के लिए कई सारे कपड़े नहीं हटाने पड़ते।

क्योंकि पुरुषों के यूरिनल्स क्यूबिकल्स (लघु कक्षों) की तुलना में कम जगह घेरते हैं। इसलिए यूरिनल लगे हों तो कम जगह में अधिक पुरुष पेशाब कर सकते हैं। लेकिन कई विशेषज्ञ बताते हैं कि मूत्र विसर्जन करते समय शरीर की स्थिति कैसी है, इसका असर बाहर निकल रहे पेशाब की मात्रा पर भी पड़ता है। लेकिन कई विशेषज्ञ बताते हैं कि मूत्र विसर्जन करते समय शरीर की स्थिति कैसी है, इसका असर बाहर निकल रहे पेशाब की मात्रा पर भी पड़ता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

पेशाब करने के पीछे का विज्ञान
आइए जानते हैं कि हम पेशाब करते कैसे हैं। पेशाब बनता है हमारे गुर्दों में। गुर्दे हमारे खून से अपशिष्टों को अलग करते हैं। फिर यह पेशाब ब्लैडर यानी एक थैली में इकट्ठा होता है। इसी कारण हम बार-बार टॉयलट जाने से बचते हैं, रात को आराम से सो पाते हैं और दिन में काम कर पाते हैं। आमतौर पर ब्लैडर 300 से 600 मिलीलीटर तक पेशाब को इकट्ठा कर सकता है। मगर जब यह दो-तिहाई भर जाता है तो हमें पेशाब करने की जरूरत महसूस होने लगती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media

ब्लैडर को पूरी तरह खाली करने के लिए हमारे नर्वस सिस्टम का पूरी तरह से ठीक होना जरूरी है। क्योंकि यही सिस्टम हमें बताता है कि कब टॉयलट जाना है और आसपास कोई जगह न हो तो कब तक और कितना पेशाब हम रोक सकते हैं। जब हम पेशाब करने के लिए सुविधाजनक स्थिति में पहुंच जाते हैं तो हमारे पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां और यूरेथ्रा को घेरने वाली एक गोल-सी मांसपेशी फैल जाती है। फिर हमारा ब्लैडर सिकुड़ता है और पेशाब को यूरेथ्रा यानी मूत्रमार्ग में खाली कर देता है। इस तरह से मूत्र शरीर से बाहर आ जाता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

बैठना सही या खड़े रहना उचित?

एक स्वस्थ आदमी को पेशाब करने के लिए जोर लगाने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। मगर कई बार पुरुषों के साथ ऐसे स्थायी या अस्थायी हालात पैदा हो जाते हैं कि उन्हें पेशाब करने में मुश्किल आने लगती है। प्लस वन नाम के एक साइंटिफिक पब्लिकेशन का एक अध्ययन कहता है कि जिन पुरुषों के प्रोस्टेट में सूजन हो और इस कारण दिक्कत होती हो तो उनके लिए बैठकर पेशाब करना लाभकारी हो सकता है।

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