हृदय रोग और कैंसर दुनियाभर में होने वाली मौतों का प्रमुख कारण हैं। हर साल इन दोनों बीमारियों से लाखों लोगों की मौत हो जाती है। इतना ही नहीं इन बीमारियों के इलाज पर होने वाला खर्च भी मरीज और परिजनों को काफी तोड़ देने वाला होता है।
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कैंसर, मिर्गी, मानसिक रोग और दिल की बीमारियों के इलाज से जुड़ी कई नई दवाएं जल्द भारतीय मरीजों तक पहुंच सकती हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने कई नई दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग, मार्केटिंग, इंपोर्ट और क्लीनिकल ट्रायल से जुड़े अहम फैसले लिए हैं।
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यहां जानिए क्या हुए फैसले?
जानकारियों के मुताबिक कैंसर, मिर्गी, मानसिक रोग और दिल की बीमारियों के इलाज से जुड़ी कई नई दवाएं जल्द भारतीय मरीजों तक पहुंच सकती हैं। सीडीएससीओ की तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने कई नई दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग से लेकर मार्केटिंग और क्लीनिकल ट्रायल से जुड़े अहम फैसले लिए हैं।
- समितियों ने कई नई दवाओं और उनके नए उपयोग को मंजूरी देने की सिफारिश की है, जबकि कुछ दवाओं पर अतिरिक्त भारतीय मरीजों का क्लीनिकल डेटा और आगे के क्लीनिकल ट्रायल कराने को कहा है।
- सबसे अहम फैसले कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को लेकर हुए हैं।
- समिति ने डाराटुमुमैब इंजेक्शन को ब्लड कैंसर के एक प्रकार (मल्टीपल मायलोमा) के नए मरीजों के इलाज में अतिरिक्त उपयोग के लिए इंपोर्ट और मार्केटिंग की अनुमति देने की सिफारिश की है।
- इसके लिए स्थानीय फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल से छूट देने की भी सिफारिश की गई है, लेकिन कंपनी को भारत में फेज-4 क्लीनिकल ट्रायल करना होगा।
मिर्गी और मानसिक रोगों की दवाओं पर भी फैसले
न्यूरोलॉजी और साइकियाट्री एसईसी ने मिर्गी की नई दवा सेनोबामेट टैबलेट की मैन्युफैक्चरिंग और मार्केटिंग की सिफारिश की है। समिति ने कहा है कि यह दवा केवल न्यूरोलॉजिस्ट के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जाएगी।
- इसके अलावा क्वेटियापिन ओरल सस्पेंशन को भी मंजूरी देने की सिफारिश की गई है।
- वहीं ब्रेक्सपिप्राजोल टैबलेट के नए इंडिकेशन को भी हरी झंडी दी गई है। हालांकि सभी प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिली।
- बापेंटिन एक्सटेंडेड रिलीज 200 मिलीग्राम टैबलेट पर समिति ने कहा कि यह स्ट्रेंथ दुनिया में कहीं भी मंजूर नहीं है। इसलिए पहले इसकी बायोएवेलेबिलिटी स्टडी करानी होगी।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।