Parenting Tips: बच्चा मोबाइल छोड़कर किताबों से दोस्ती करने लगेगा, अपनाएं ये 5 आसान तरीके
सही माहौल, रोचक गतिविधियां और थोड़ी समझदारी से बच्चों में विकसित करें पढ़ने की आदत
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वसुंधरा वाथम
आज के डिजिटल दौर में जहां बच्चों का अधिकतर समय मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम में बीतता है, वहीं किताबों के प्रति उनकी रुचि कम होती जा रही है। ऐसे में लगभग हर माता-पिता की यही इच्छा होती है कि उनका बच्चा खुद से किताब उठाए, पढ़ने में आनंद महसूस करे और सीखने को केवल परीक्षा तक सीमित न समझे। हालांकि पढ़ने की आदत एक दिन में विकसित नहीं होती, बल्कि इसके लिए सही माहौल, नियमित अभ्यास और धैर्य की जरूरत होती है। यदि पढ़ाई को रोचक, व्यावहारिक और बच्चों की रुचि के अनुसार बनाया जाए, तो वे बिना किसी दबाव के सीखने लगते हैं और इसके लिए आपको कुछ आसान और प्रभावी तरीके अपनाने होंगे।
बेसिक कॉन्सेप्ट को मजबूत बनाएं
- किसी भी विषय को समझने की शुरुआत उसकी मजबूत नींव से होती है।
- यदि बच्चा शुरुआती अवधारणाओं को अच्छी तरह समझ लेता है, तो आगे की पढ़ाई उसके लिए आसान हो जाती है।
- इसलिए बच्चों को केवल रटने के बजाय विषय को समझने के लिए प्रेरित करें।
- कठिन बातों को सरल उदाहरणों, चित्रों और कहानियों के माध्यम से समझाएं।
- साथ ही खेल, पहेलियां और क्विज जैसी गतिविधियों का सहारा लें।
- जब सीखना मजेदार बनता है, तो बच्चा खुद ही किताबों की ओर आकर्षित होने लगता है।
पढ़ाई को रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ें
- बच्चों को यह महसूस कराएं कि पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर दिन की जिंदगी में उसका उपयोग होता है।
- खाना बनाते समय सब्जियों और फलों की पहचान कराना, खरीदारी के दौरान गिनती और तुलना सिखाना, घड़ी देखकर समय समझाना या कैलेंडर पढ़ाना जैसी छोटी-छोटी गतिविधियां सीखने को आसान और रोचक बनाती हैं।
- जब बच्चा पढ़ाई का वास्तविक जीवन से संबंध समझता है, तो उसकी रुचि अपने आप बढ़ने लगती है।
रोजाना पढ़ने की आदत डालें
- पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए नियमित अभ्यास सबसे जरूरी है।
- रोजाना 15 से 20 मिनट का एक निश्चित समय किताबों के लिए तय करें।
- शुरुआत में छोटे-छोटे लक्ष्य रखें, जैसे प्रतिदिन एक पेज पढ़ना, एक नई कहानी जानना या एक नया शब्द सीखना।
- धीरे-धीरे यह अभ्यास बच्चे की दिनचर्या का हिस्सा बन जाएगा।
- नियमित पढ़ाई से न केवल उसकी समझ बेहतर होगी, बल्कि उसका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
गलतियों को सीखने का अवसर बनाएं
- बच्चों से गलती होना बिल्कुल स्वाभाविक है।
- ऐसे में उन्हें डांटने या डराने के बजाय उनकी गलतियों को सुधारने का मौका दें।
- प्यार से समझाएं कि गलती करना सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
- समय-समय पर छोटे टेस्ट, सवाल-जवाब या मजेदार गतिविधियों के जरिये उनकी समझ को परखें।
- इससे बच्चों में आत्मविश्वास बना रहता है और वे बिना किसी डर के नई चीजें सीखने के लिए प्रेरित होते हैं।
घर में पढ़ने का सकारात्मक माहौल बनाएं
- बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने आसपास देखते हैं।
- यदि घर के बड़े भी किताबें, अखबार या पत्रिकाएं पढ़ते हैं, तो बच्चों पर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- घर में एक छोटा-सा रीडिंग कॉर्नर बनाएं, जहां रंग-बिरंगी किताबें, कहानी संग्रह और चित्र पुस्तकें रखी जाएं।
- बच्चों के साथ बैठकर कहानी पढ़ें और उस पर चर्चा करें।
- इससे पढ़ाई एक मजेदार पारिवारिक गतिविधि बन जाएगी और बच्चे स्वाभाविक रूप से किताबों के करीब आने लगेंगे।