शरीर को स्वस्थ रखने के लिए स्वस्थ-पौष्टिक आहार का सेवन और नियमित व्यायाम को सबसे जरूरी अभ्यास माना जाता है। हालांकि ऑफिस में काम के प्रेशर, घर की जिम्मेदारियों के दबाव में ज्यादातर लोगों के लिए रोजाना जिम के लिए समय निकाल पाना काफी मुश्किल हो जाता है। अब सवाल ये है कि ऐसे लोग खुद को कैसे हेल्दी रखें?
Good Health: बिना जिम गए भी हार्ट-किडनी को रख सकते हैं हेल्दी, जानिए अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की स्मार्ट सलाह
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अध्ययनों में नियमित व्यायाम-जिम की आदत बनाने की सलाह दी जाती रही है। हालांकि काम के दबाव के कारण ज्यादातर लोगों के लिए रोजाना जिम के लिए समय निकाल पाना कठिन हो सकता है। ऐसे लोग शरीर को कैसे हेल्दी रख सकते हैं? इसके लिए अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के विशेषज्ञों ने आसान और कारगर तरीके बताए हैं।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने एक अध्ययन के आधार पर बताया है कि अगर आप जिम के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं तो रोजाना के दैनिक काम-काज जरूर करने की आदत बना लें। इससे भी कार्डियोवैस्कुलर-किडनी-मेटाबोलिक सिंड्रोम की समस्याएं कम होती हैं और पहले से ही शिकार लोगों में असमय मौत का खतरा भी घट सकता है।
- कार्डियोवैस्कुलर-किडनी-मेटाबोलिक (सीकेएम) सिंड्रोम के स्टेज 2, 3 और 4 के शिकार वयस्कों के लिए रोजाना हल्की फिजिकल एक्टिविटी भी असमय मौत के जोखिमों को कम करने में मदद कर सकती है।
- सीकेएम सिंड्रोम दिल और किडनी की बीमारी, डायबिटीज और मोटापा का कारण बनती हैं।
- घर में झाड़ू-पोछा लगाने, खड़े होकर खाना पकाने, हाथों से कपड़े साफ करने और बागवानी जैसी आदतें भी आपकी सेहत को ठीक रखने में मददगार हो सकती हैं।
- हर दिन हल्की शारीरिक गतिविधि में एक घंटे की की बढ़ोतरी से भी मौत के खतरे को 14-20% तक कमी लाने में मदद मिल सकती है।
हल्की शारीरिक गतिविधि के बड़े फायदे
जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, हल्की शारीरिक गतिविधि जैसे वॉक करना या घर के सामान्य कामकाज के लिए थोड़ा और समय निकालना कार्डियोवैस्कुलर-किडनी-मेटाबोलिक सिंड्रोम वाले लोगों में मौत के खतरे को कम करने वाला पाया गया है।
- अकेले अमेरिका में ही लगभग 90% वयस्कों में सीकेएम सिंड्रोम का कम से कम एक हिस्सा होता है।
- इससे हाई ब्लड प्रेशर, अनियंत्रित कोलेस्ट्रॉल और लिपिड, हाई ब्लड शुगर, ज्यादा वजन या मोटापा और किडनी की बीमारियों का खतरा हो सकता है।
- जब ये फैक्टर्स एक साथ मिलते हैं, तो ये हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर जैसी जानलेवा समस्याओं को भी बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
- हालांकि नियमित रूप से घरेले कामकाज के माध्यम से भी शारीरिक मेहनत को बढ़ाकर इन रोगों और इससे होने वाली मौत के खतरे कम को किया जा सकता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
शोधकर्ताओं ने 2003 से 2006 के नेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एग्जामिनेशन सर्वे के डेटा का इस्तेमाल किया, जिसमें लगभग 7,200 वयस्कों से हेल्थ और फिजिकल एक्टिविटी की जानकारी इकट्ठा की गई थी। इसमें प्रतिभागियों के शारीरिक परीक्षण, ब्लड सैंपल और एक्सेलेरोमीटर से मापी गई 7 दिनों तक की एक्टिविटी लेवल की जानकारी शामिल थी। एक्सेलेरोमीटर ऐसे डिवाइस है जो कई दिनों तक किसी व्यक्ति की मूवमेंट को माप सकती है।
- एक्सेलेरोमीटर रीडिंग का इस्तेमाल करके लेखकों ने नोट किया कि शारीरिक गतिविधि कैसी भी हो, आपकी सेहत को लाभ दे सकती है।
- हल्की फिजिकल एक्टिविटी वे गतिविधियां है जिसे आप बिना सांस फूले कर सकते हैं। सेहत के लिए ये भी कई प्रकार से लाभकारी हो सकती है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कार्डियोवैस्कुलर-किडनी-मेटाबोलिक सिंड्रोम को रोकने के लिए फिजिकल एक्टिविटी, हेल्दी डाइट और सही समय पर दवा लेने की सलाह दी जाती है। अध्ययन के लेखकों कहा कि आम फिजिकल एक्टिविटी गाइडलाइंस में बताई गई मध्यम से लेकर तेज स्तर की गतिविधि आमतौर पर एडवांस्ड स्टेज के रोगियों के लिए मुमकिन नहीं हैं।
जॉन्स हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में एपिडेमियोलॉजी के प्रोफेसर माइकल फैंग कहते हैं, इस बात के सबूत मिले हैं कि वाकिंग या बागवानी जैसी हल्की एक्टिविटी दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है। हालांकि, दिल की बीमारी वाले लोगों के लिए लंबे समय तक वॉक करने की आदत कितनी फायदेमंद है इसकी जांच नहीं की गई है।
-------------
स्रोत:
Movement matters: Light activity led to better survival in diabetes, heart, kidney disease
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।