हांगकांग में एक युवक को दोबारा कोरोना संक्रमण होने का मामला सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया का पहला ऐसा मामला है। 33 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल युवक इस युवक को साढ़े चार महीने बाद दोबारा संक्रमण हुआ है। उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। खबरों के मुताबिक, वह स्पेन से लौटा है। मामला सामने आने के बाद उन दावों पर सवाल उठता है, जिनमें कहा जा रहा था कि कोरोना से ठीक होने के बाद मरीज में वायरस के खिलाफ लंबे समय तक के लिए इम्यूनिटी विकसित हो जाती है। इस युवक में तो साढ़े चार महीने बाद ही इम्यूनिटी खत्म हो गई।
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इस देश में दोबारा कोरोना संक्रमण का पहला मामला, साढ़े चार महीने में खत्म हो गई इम्यूनिटी
Tue, 25 Aug 2020 05:11 PM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Tue, 25 Aug 2020 05:11 PM IST
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Coronavirus Reinfection
- फोटो : iStock
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कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
- हांगकांग यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजिस्ट केल्विन कायवेंग का कहना है कि हमारे शोध से यह बात साबित होती है कि कोविड-19 का संक्रमण होने के बाद शरीर में बनी इम्यूनिटी जीवनभर नहीं रहती। संक्रमण दोबारा हो सकता है और जल्दी भी हो सकता है। उन्होंने सलाह दी है कि अगर संदिग्ध तौर पर भी लक्षण दिखते हैं तो जांच जरूर कराएं।
Coronavirus Test
- फोटो : Social Media
कैसे सामने आया मामला?
- 33 वर्षीय युवक में दोबारा संक्रमण का मामला स्क्रीनिंग के बाद सामने आया है। वह इसी महीने यूरोपियन देश स्पेन से लौटा था और हांगकांग एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग के दौरान जब उसका पीसीआर टेस्ट हुआ, तो जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई। यह युवक साढ़े चार महीने पहले ही कोरोना से रिकवर हो चुका था और माना यह जा रहा था कि उसमें कोरोना से लड़ने के लिए इम्यूनिटी विकसित हो गई होगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
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कोरोना वायरस की जांच (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
जीनोम कोडिंग से समझने की कोशिश
- हांगकांग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता जीनोम कोडिंग के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि युवक को दोबारा संक्रमण कैसे हुआ। इसके लिए कोरोना वायरस के दो स्ट्रेन की जेनेटिक कोडिंग का विश्लेषण किया जा रहा है। पहला, जिसका सैंपल मार्च और अप्रैल में लिया गया था और दूसरा, जो यूरोप में जुलाई और अगस्त में पाया गया था। शोधकर्ताओं के मुताबिक, वायरस के म्यूटेशन यानी रूप बदलते रहने के कारण ये दोनों स्ट्रेन बहुत अलग है।
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कोरोना वायरस की जांच
- फोटो : Amar Ujala
- मालूम हो कि पूर्व में हुए एक शोाध में दावा किया गया था कि कोरोना से रिकवर होने के बाद मरीज में कई हफ्ते तक इसके कण रह सकते हैं और इसी कारण व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आ सकती है। पहले भी कोरोना के दोबारा संक्रमण के मामले मिले हैं, लेकिन हांगकांग वाले मामले की तरह किसी की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई थी।