कोरोना वायरस को लेकर अध्ययन कर रही शोधकर्ताओं की टीम ने पाया है कि साल 2019 के आखिर में सामने आए सार्स-सीओवी-2 वायरस के रूप में अब कई प्रकार से बदलाव आ चुका है। कोरोना वायरस पहले की अपेक्षा अब अधिक संक्रामक हो गया है, साथ ही कुछ स्थितियों में इसके लंबे समय तक जीवित रहने की आशंका भी बढ़ गई है। यूरोप सहित भारत में हाल के महीनों में बढ़े संक्रमण के लिए विशेषज्ञ इसे एक प्रमुख कारण के तौर पर देख रहे हैं।
Covid-19 Study: इन चीजों पर महीने भर तक जीवित रह सकता है कोरोना वायरस, री-इंफेक्शन का भी खतरा बढ़ा
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30 दिनों तक जीवित रह सकता है वायरस
एप्लाइड एंड एनवायर्नमेंटल माइक्रोबायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि फ्रोजन और रेफ्रिजरेटेड मीट पर वायरस एक महीने से भी अधिक समय तक सक्रिय पाए गए हैं। अमेरिका स्थित कैंपबेल यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर और अध्ययन की लेखिका एमिली एस. बेली कहती हैं, वायरस की तापमान आधारित जीवित रहने की अवधि को लेकर अध्ययन में आश्चर्यजनक परिणाम देखे गए हैं। हमने मांस और मछली उत्पादों को रेफ्रिजरेशन (4 डिग्री सेल्सियस) और फ्रीजर तापमान (शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे) दोनों पर संग्रहित करके इसका अध्ययन किया।
क्या कहती हैं अध्ययनकर्ता?
प्रोफेसर बेली कहती हैं, दक्षिण पूर्व एशिया में कोरोना के कम्युनिटी ट्रांसमिशन के कारणों को जानने के लिए यह शोध किया गया, इस क्षेत्र में फ्रोजन मीट का सेवन अधिक किया जाता रहा है। रिपोर्ट से पता चलता है कि पैक्ड मीट उत्पाद उन क्षेत्रों में वायरस का स्रोत हो सकते हैं। हमारा लक्ष्य यह जांचना था कि इस वातावरण में समान वायरस जीवित रह सकते हैं या नहीं? हमने पाया कि कुछ चीजों पर वायरस 30 दिनों तक जीवित रह सकता है।
यह अध्ययन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सार्स-सीओवी-2 आंत के साथ-साथ श्वसन पथ में भी रेप्लीकेट हो सकता है।
री-इंफेकशन का भी बढ़ा खतरा
कोरोना वायरस के स्वरूप में आ रहा बदलाव इसके जल्द री-इंफेकशन का भी खतरा बढ़ा रहा है। अब तक के अध्ययनों में माना जा रहा था कि एक बार संक्रमण से ठीक होने के बाद 12 सप्ताह तक दोबारा संक्रमित होने का जोखिम नहीं होता है, हालांकि हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि नए वैरिएंट्स के कारण यह अवधि अब घटकर 28 दिन ही रह गई है। यानी कि अगर आप एक बार संक्रमित हुए हैं तो एक महीने के भीतर आप फिर से वायरस की चपेट में आ सकते हैं।
BA.4 और BA.5 सब-वैरिएंट का खतरा
न्यू साउथ वेल्स और ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्सों से इस तरह के मामले सामने आए हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि हमारे पास अभी तक तुलनात्मक नहीं है, लेकिन यहां BA.4 और BA.5 जैसे ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट का संक्रमण रहा है, ऐसे में माना जा रहा है कि इन वैरिएंट्स से महीने भर में भी री-इंफेकशन का खतरा बढ़ रहा है। ये वैरिएंट्स अधिक आसानी से संचरित होते हैं और टीकाकरण करा चुके या संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में फिर से संक्रमण पैदा करने में सक्षम हैं।
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स्रोत और संदर्भ
Persistence of Coronavirus Surrogates on Meat and Fish Products during Long-Term Storage
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