फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Covid-19 Study: इन चीजों पर महीने भर तक जीवित रह सकता है कोरोना वायरस, री-इंफेक्शन का भी खतरा बढ़ा

Sat, 16 Jul 2022 02:59 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 16 Jul 2022 02:59 PM IST
विज्ञापन
coronavirus survival on meat and frozen food items, reinfection of covid latest news in hindi
कोरोना से री-इंफेक्शन का खतरा - फोटो : PTI

कोरोना वायरस को लेकर अध्ययन कर रही शोधकर्ताओं की टीम ने पाया है कि साल 2019 के आखिर में सामने आए सार्स-सीओवी-2 वायरस के रूप में अब कई प्रकार से बदलाव आ चुका है। कोरोना वायरस पहले की अपेक्षा अब अधिक संक्रामक हो गया है, साथ ही कुछ स्थितियों में इसके लंबे समय तक जीवित रहने की आशंका भी बढ़ गई है। यूरोप सहित भारत में हाल के महीनों में बढ़े संक्रमण के लिए विशेषज्ञ इसे एक प्रमुख कारण के तौर पर देख रहे हैं।



विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस के स्वरूप में आया यह परिवर्तन काफी चुनौतीपूर्ण स्थितियों का कारण बन सकता है, इस खतरे को ध्यान में रखते हुए सभी लोगों को अतिरिक्त सुरक्षा बरतते रहने की आवश्यकता है।

संक्रमण के शुरुआती दिनों के अध्ययनों में माना जा रहा था कोरोना वायरस सतह पर कुछ मिनटों तक ही जीवित रह सकता है, साथ ही दूसरी लहर तक अध्ययनों में इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई थी कि वायरस हवा में भी रह सकते हैं या नहीं? हालांकि म्यूटेशन के बाद सामने आए वैरिएंट्स को लेकर वैज्ञानिकों का कहना है कुछ स्थितियों में कोरोना वायरस कई चीजों पर 30 दिनों से अधिक समय तक भी जीवित रह सकता है, इसके अलावा हवा में भी वायरस के कारण इनडोर संक्रमण का खतरा बना हुआ है। इन निष्कर्षों को देखते हुए कोरोना को हल्के में लेने की गलती करनी भारी पड़ सकती है।

coronavirus survival on meat and frozen food items, reinfection of covid latest news in hindi
फ्रोजन आइटम्स पर कोरोना की जीवित अवधि अधिक - फोटो : iStock

30 दिनों तक जीवित रह सकता है वायरस 

एप्लाइड एंड एनवायर्नमेंटल माइक्रोबायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि फ्रोजन और रेफ्रिजरेटेड मीट पर वायरस एक महीने से भी अधिक समय तक सक्रिय पाए गए हैं। अमेरिका स्थित कैंपबेल यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर और अध्ययन की लेखिका एमिली एस. बेली कहती हैं, वायरस की तापमान आधारित जीवित रहने की अवधि को लेकर अध्ययन में आश्चर्यजनक परिणाम देखे गए हैं। हमने मांस और मछली उत्पादों को रेफ्रिजरेशन (4 डिग्री सेल्सियस) और फ्रीजर तापमान (शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे) दोनों पर संग्रहित करके इसका अध्ययन किया।

coronavirus survival on meat and frozen food items, reinfection of covid latest news in hindi
कोरोना के बढ़ने का खतरा - फोटो : Pixabay

क्या कहती हैं अध्ययनकर्ता?

प्रोफेसर बेली कहती हैं, दक्षिण पूर्व एशिया में कोरोना के कम्युनिटी ट्रांसमिशन के कारणों को जानने के लिए यह शोध किया गया, इस क्षेत्र में फ्रोजन मीट का सेवन अधिक किया जाता रहा है। रिपोर्ट से पता चलता है कि पैक्ड मीट उत्पाद उन क्षेत्रों में वायरस का स्रोत हो सकते हैं। हमारा लक्ष्य यह जांचना था कि इस वातावरण में समान वायरस जीवित रह सकते हैं या नहीं? हमने पाया कि कुछ चीजों पर वायरस 30 दिनों तक जीवित रह सकता है।

यह अध्ययन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सार्स-सीओवी-2 आंत के साथ-साथ श्वसन पथ में भी रेप्लीकेट हो सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
coronavirus survival on meat and frozen food items, reinfection of covid latest news in hindi
कोरोना संक्रमण का खतरा - फोटो : PTI

री-इंफेकशन का भी बढ़ा खतरा

कोरोना वायरस के स्वरूप में आ रहा बदलाव इसके जल्द री-इंफेकशन का भी खतरा बढ़ा रहा है। अब तक के अध्ययनों में माना जा रहा था कि एक बार संक्रमण से ठीक होने के बाद 12 सप्ताह तक दोबारा संक्रमित होने का जोखिम नहीं होता है, हालांकि हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि नए वैरिएंट्स के कारण यह अवधि अब घटकर 28 दिन ही रह गई है। यानी कि अगर आप एक बार संक्रमित हुए हैं तो एक महीने के भीतर आप फिर से वायरस की चपेट में आ सकते हैं।

विज्ञापन
coronavirus survival on meat and frozen food items, reinfection of covid latest news in hindi
भारत में कोरोना संक्रमण के मामले - फोटो : Pixabay

BA.4 और BA.5 सब-वैरिएंट का खतरा

न्यू साउथ वेल्स और ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्सों से इस तरह के मामले सामने आए हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि हमारे पास अभी तक तुलनात्मक नहीं है, लेकिन यहां BA.4 और BA.5 जैसे ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट का संक्रमण रहा है, ऐसे में माना जा रहा है कि इन वैरिएंट्स से महीने भर में भी री-इंफेकशन का खतरा बढ़ रहा है। ये वैरिएंट्स अधिक आसानी से संचरित होते हैं और टीकाकरण करा चुके या संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में फिर से संक्रमण पैदा करने में सक्षम हैं।

---------------
स्रोत और संदर्भ

Persistence of Coronavirus Surrogates on Meat and Fish Products during Long-Term Storage

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed