साल 2019 के आखिरी के महीनों में पहली बार दुनिया को सार्स-सीओवी-2 वायरस (कोविड-19 रोग) के बारे में पता चला। देखते ही देखते अगले दो साल में ये वायरस पूरी दुनिया में फैल गया। वैज्ञानिकों की टीम ने आनन-फानन में वैक्सीन तैयार की, जिसने वायरस के प्रकोप को रोकने में काफी मदद की। इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि महामारी के दौरान कोविड वैक्सीन ने 25 लाख से ज्यादा लोगों की जान बचाई है।
अध्ययन में दावा: कोविड वैक्सीन ने रोकी भयावह त्रासदी, महामारी के दौरान बचाई 25 लाख से ज्यादा जिंदगियां
- हालिया शोध के अनुसार, कोविड वैक्सीन ने कुल 25.3 लाख लोगों की जान बचाई, जिनमें 90% से अधिक वे लोग थे जो 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के थे। अगर यह वैक्सीन न होती तो ओमिक्रॉन के चरम समय में दुनिया को और अधिक भयावह त्रासदी का सामना करना पड़ता।
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कोविड वैक्सीन ने बचाई लाखों जिंदगियां
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटा कैथोलिका डेल सैक्रो कुओरे का यह संयुक्त अध्ययन जामा हेल्थ फोरम में प्रकाशित हुआ है। शोध के अनुसार, कोविड वैक्सीन ने कुल 25.3 लाख लोगों की जान बचाई, जिनमें 90% से अधिक वे लोग थे जो 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के थे। अगर यह वैक्सीन न होती तो ओमिक्रॉन के चरम समय में दुनिया को और अधिक भयावह त्रासदी का सामना करना पड़ता।
अध्ययन से पता चलता है कि कोरोना से जिन लोगों की जान बची उनमें से लगभग 82% लोग ऐसे थे जिन्हें संक्रमित होने से पहले टीका लगाया गया था। 57% मौतें अकेले ओमिक्रॉन काल के दौरान टाली गईं।
कुल मिलाकर, अध्ययन का अनुमान है कि कोविड के टीकों ने दुनियाभर में 1.48 करोड़ जीवन के वर्ष (इयर्स ऑफ लाइफ सेव्ड) बचा लिए। ये हर 900 खुराक पर बचाए गए जीवन के एक वर्ष के बराबर है।
कोविड वैक्सीन पर अब तक का सबसे व्यापक अध्ययन
अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. एंजेलो मारिया पेजुल्लो और डॉ. एंटोनियो क्रिस्टियानो ने कहा, पिछले अध्ययनों में विभिन्न मॉडलों, समय-सीमाओं या क्षेत्रीय डेटा का उपयोग करके टीकों द्वारा बचाई गई जानों का अनुमान लगाने का प्रयास किया गया था। हालांकि, यह अध्ययन अब तक का सबसे व्यापक शोध है। इसमें वैश्विक आंकड़ों का उपयोग किया गया है साथ ही इसमें ओमिक्रॉन वैरिएंट के प्रसार की अवधि को भी शामिल किया गया है।
विश्लेषण के लिए, शोधकर्ताओं ने वैश्विक जनसंख्या आंकड़ों की जांच की और समझने का प्रयास किया कि कितने लोग कोविड-19 से बीमार हुए (चाहे टीकाकरण से पहले या बाद मे) और ओमिक्रॉन अवधि के दौरान कितने लोग संक्रमित हुए या फिर उनकी मौत हुई।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
डॉ. पेजुल्लो ने बताया, हमारे आंकड़े पहले के आकलनों से अधिक सटीक हैं, लेकिन यह निर्विवाद रूप से स्पष्ट है कि टीकाकरण ने वैश्विक स्तर पर लाखों जिंदगियां बचाईं। वैक्सीनेशन अब भी इस वायरस के प्रकोप को कम करने और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं से बचाए रखने में सबसे जरूरी और प्रभावी तरीका है।
नए वैरिएंट्स के जोखिमों को कम करने के लिए कई टीकों के अपडेट भी आ चुके हैं, जिनका कई देशों में 60 साल से अधिक उम्र के लोगों पर इस्तेमाल भी किया जा रहा है।
वैक्सीन पर उठते रहे हैं सवाल
इसके इतर कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभावों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई रिपोर्ट्स में चिंता जताई गई थी कि संभवत: हार्ट अटैक के बढ़ते मामले वैक्सीनेशन से संबंधित हो सकते हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि वैक्सीनेशन सुरक्षित है और इससे अचानक मौतों के बढ़े मामले का कोई संबंध नहीं है।
लोकसभा में 25 जुलाई को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने स्पष्ट किया कि कोविड वैक्सीनेशन के कारण वयस्कों में अचानक मृत्यु का जोखिम नहीं बढ़ा है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के हालिया अध्ययन की रिपोर्ट को कोट करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, वैक्सीनेशन और बढ़ते मृत्यु के मामलों के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया है।
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स्रोत
Global Estimates of Lives and Life-Years Saved by COVID-19 Vaccination During 2020-2024
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