डायबिटीज या मधुमेह एक ऐसी बीमारी हैं, जिसकी वजह से खून में शुगर (चीनी/शर्करा) की मात्रा बढ़ जाती है। अमेरिका में नेत्रहीनता की तीसरी बड़ी वजह भी यही बीमारी है। कुछ दशकों पहले तक हमारे देश में यह बीमारी उम्र के साथ बढ़ती थी। लेकिन अब यह लाइफस्टाइल जनित बीमारी का रूप ले चुकी है। अब बच्चे और युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे देश में इस बीमारी से पीड़ित आधे लोगों को यह पता ही नहीं है कि उन्हें यह बीमारी है। जिन्हें पता है, उनमें से भी आधे यानि कुल पीड़ितों में से एक-चौथाई लोगों को ही इसका इलाज मिल पाता है। मधुमेह पीड़ितों पर हुए एक शोध से यह पता चला है कि 15 से 49 आयु वर्ग के केवल आधे वयस्क अपनी इस बीमारी के बारे में जानते हैं। सिर्फ एक-चौथाई पीड़ितों को ही इसका इलाज मिल पाता है और उनका ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है। आइए, जानते हैं इस बारे में विस्तार से:
50 फीसदी भारतीय नहीं जानते कि उन्हें डायबिटीज है, जानें इसके बारे में वो सबकुछ जो आपको जानना चाहिए
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कई मामलों में तो इसका पता लगने में इतनी देर हो जाती है कि लोगों की दृष्टि चली जाती है। इसकी वजह से किसी का कोई अंग खराब हो जाता है तो किसी को किडनी की बीमारी हो जाती है। शोध पत्रिका बीएमसी मेडिसिन में भी प्रकाशित अध्ययन के नतीजों में बताया गया है कि मधुमेह से निपटने के लिए सबसे पहले लोगों को इसके बारे में जानकारी होना जरूरी है। लेकिन, इससे ग्रस्त 47.5 फीसद लोगों को अपनी बीमारी के बारे में पता ही नहीं होता, जिस वजह से उन्हें इलाज नहीं मिल पाता।
शोध के प्रमुख बिंदु
- शोध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार सर्वेक्षण के वर्ष 2015-16 के आंकड़ों का उपयोग
- 29 राज्यों व 7 केंद्र शासित प्रदेशों के 15-49 वर्ष के करीब 7.2 लाख लोग शामिल
- शोधकर्ताओं ने पाया कि 52.5 फीसदी पीड़ित को ही मालूम है कि उन्हें डायबिटीज है
- लगभग 40.5 फीसद लोगों ने बताया कि डायबिटीज कंट्रोल के लिए दवा ले रहे हैं
शोध के अन्य प्रमुख बिंदु
- कुल पीड़ितों में से सिर्फ 24.8 फीसदी लोगों का डायबिटीज कंट्रोल में पाया गया
- दवा से 20.8 फीसदी पुरुषों और 29.6 फीसदी महिलाओं का डायबिटीज कंट्रोल में
- लगभग आधे डायबिटीज पीड़ितों को अपने हाई ब्लड शुगर लेवल की जानकारी नहीं है
- डायबिटीज से अनजान लोगों की संख्या गोवा और आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा
- उत्तर प्रदेश में डायबिटीज के मरीज कम, लेकिन इलाज से वंचितों की संख्या ज्यादा
पिछले साल पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई), मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन समेत अन्य संस्थानों के अध्ययन में इस बात का खुलासा हो चुका है कि देश में डायबिटीज के 75 फीसदी से अधिक मरीजों में शुगर नियंत्रित नहीं है। वहीं, करीब आधे मरीजों को इस बात की जानकारी ही नहीं रहती कि उन्हें डायबिटीज है।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज फेडरेशन की रिपोर्ट के अनुसार, 8.8 फीसदी भारतीय डायबिटीज से पीड़ित हैं। देश की 125 करोड़ की आबादी में से लगभग 11.5 करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं। यानि कि चीन के बाद सबसे ज्यादा डायबिटीज पीड़ित भारत में ही हैं।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार डायबिटीज और डिलिपिडीमिया, हाइपरटेंशन, मोटापा जैसी अन्य गैर-संक्रामक बीमारियां सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बहुत बड़ा और निरंतर बढ़ने वाला बोझ बनते जा जा रहे हैं। इसके कारणों की पड़ताल में सामने आया है कि दरअसल औसत भारतीयों की जीवनशैली काफी बदल चुकी है। लोग घर के खाने की बजाय बाहर का खाना, जंक फूड, फास्ट फूड वगैरह पर जोर देने लगे हैं। इन बदलावों के कारण समाज में मोटापा बहुत तेजी से फैलने लगा। वर्तमान में डायबिटीज मरीजों की तादाद बढ़ने का बड़ा कारण मोटापा है।