कोविड के नए और पुराने स्ट्रेन में क्या अंतर है? कितने खतरनाक हैं नए वेरिएंट्स? जानें सबकुछ
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भारत में पाया गया कोविड-19 का नए डबल म्यूटेंट वायरस को काफी प्रभावी माना जा रहा है। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह कोविड-19 संक्रमण से चल रहे भारत के मुकाबले को भी प्रभावित कर सकता है। इस वायरस को 70 गुना अधिक संक्रामक माना गया है। आइए जानते हैं कि पुराने वायरस के मुकाबले यह कितना अलग और प्रभावी है साथ ही इससे मुकाबले के लिए किस तरह के एहतियात बरतने की जरूरत हो सकती है।
क्या होता है म्यूटेशन और स्ट्रेन
वायरस और अन्य रोगजनकों में म्यूटेशन होना स्वाभाविक है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार वायरस अपनी प्रतिकृति बनाता रहता है, इन परिवर्तनों को "म्यूटेशन" कहा जाता है। जब वायरस एक या उससे अधिक म्यूटेशन कर लेता है, तो इन बदलावों को मूल वायरस के वैरियंट्स के रूप में जाना जाता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इन परिवर्तनों के दौरान वायरस के जीन में भी अंतर हो सकता है, जो उन्हें स्वस्थ कोशिकाओं को पार करके लोगों को अधिक प्रभाविता से संक्रमित करने के योग्य बनाता है।
डबल म्यूटेशन क्या है?
अब तक मिले कोरोना के तीन नए वेरिएंट को सबसे अधिक जोखिम वाला माना जा रहा है। ये यूके (बी.1.1.7 वेरिएंट), दक्षिण अफ्रीका (बी.1.351 वेरिएंट) और ब्राजील (B.1.1.28.1) के वेरियंट्स। अब बात करते हैं डबल म्यूटेशन की। जब वायरस के दो परिवर्तन किसी एक तीसरे सुपर संक्रामक स्ट्रेन बनाने के लिए एक साथ आते हैं तो इसे डबल म्यूटेशन कहा जाता है।
सर्दी-खांसी और बुखार को कोविड-19 वायरस का प्रमुख लक्षण माना जाता रहा है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि वायरस का नया स्ट्रेन अधिक प्रभावशाली तरीकों से शरीर पर हमला बोलता है। नए स्ट्रेन से संक्रमित लोगों में बुखार अधिक गंभीर रूप से देखा गया है। इसके अलावा नए स्ट्रेन के कारण सुनने में समस्या, मांसपेशियों में दर्द, त्वचा में संक्रमण और दृष्टि संबंधी विकार जैसे कुछ अन्य लक्षण भी देखे जा रहे हैं।