अगर आप अब तक ये सोचते आ रहे हैं कि कान का काम सिर्फ सुनना है तो आप बड़ी भूल कर रहे हैं। कान शरीर के संतुलन को बनाए रखने के लिए भी जरूरी होते हैं। यानी अगर कान में कोई समस्या हो जाए तो आपके लिए सुनना ही नहीं, ठीक से चलना तक मुश्किल हो सकता है।
Ear Infection: कहीं आपके कान में संक्रमण तो नहीं? इन संकेतों से लग सकता है अंदाजा
अगर कान से पीला, सफेद या बदबूदार तरल निकल रहा है, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है। कभी-कभी कान का पर्दा फटने पर भी तरल बाहर आता है, जिससे दर्द अस्थायी रूप से कम हो सकता है।
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क्या आपके कान में भी हो रहा लगातार दर्द?
कान का दर्द होना सबसे आम संकेत है कि कान में संक्रमण हो सकता है। संक्रमण के कारण होने वाला दर्द हल्के दबाव से लेकर तेज चुभन तक हो सकता है। संक्रमण बढ़ने पर तरल जमा होने से दबाव बढ़ता है, जिससे दर्द महसूस होता है। अगर दर्द कुछ घंटों से ज्यादा बना रहे या बढ़ता जाए, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है।
कान में दर्द के साथ संक्रमण के दौरान मध्य कान में तरल जमा हो जाता है, जिससे आवाजें कम सुनाई देती हैं। कई लोग इसे पानी भर जाने जैसा महसूस करते हैं।
दर्द के साथ बुखार तो नहीं आ रहा?
बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण के कारण शरीर का तापमान बढ़ सकता है। बच्चों में 100°F (37.8°C) से अधिक बुखार कान के संक्रमण के साथ देखा जा सकता है। हालांकि हर संक्रमण में बुखार नहीं होता, लेकिन कान दर्द के साथ बुखार होने पर संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है।
कान से तरल पदार्थ या पस आना
अगर कान से पीला, सफेद या बदबूदार तरल निकल रहा है, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है। कभी-कभी कान का पर्दा फटने पर भी तरल बाहर आता है, जिससे दर्द अस्थायी रूप से कम हो सकता है।
ऐसे मामलों में डॉक्टर से तुरंत जांच कराना जरूरी है, क्योंकि सही उपचार की आवश्यकता होती है।
इन संकेतों पर भी दे ध्यान
- संक्रमण की स्थिति में कुछ लोगों को कान में भनभनाहट, सीटी या घंटी जैसी आवाज सुनाई देती है। इसे टिनिटस कहा जाता है।
- शिशु और छोटे बच्चे अपने लक्षण स्पष्ट नहीं बता पाते। अगर बच्चा बार-बार रो रहा है, सो नहीं पा रहा या कान रगड़ रहा है, तो यह कान के संक्रमण का संकेत हो सकता है। लेटने पर कान का दबाव बढ़ने से दर्द अधिक महसूस हो सकता है।
- कई बार कान के संक्रमण श्वसन संक्रमण के बाद होते हैं। अगर जुकाम ठीक होने के बजाय कान दर्द, बुखार या सुनाई कम होने जैसे लक्षण शुरू हो जाएं, तो संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।