फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इन दिनों अपनी आंख में खून के धब्बे और सूजन की समस्या को लेकर काफी चर्चा में हैं। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान वह आंखों पर काला चश्मा लगाए नजर आए। हालांकि उन्होंने सेना को दिए एक संबोधन में मजाक में अपनी समस्या को ताकत की निशानी बताया।
Emmanuel Macron: फ्रांस के राष्ट्रपति की आंखों में दिखे खून के धब्बे और सूजन, कहीं ये कोई गंभीर समस्या तो नहीं
Davos 2026: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की आंखों में खून के धब्बे और सूजन की समस्या देखी गई। फ्रांसीसी अधिकारियों ने बाद में पुष्टि की है कि मैक्रों को सबकंजंक्टिवल हेमरेज हुआ है।
फ्रांसीसी राष्ट्रपित को हो गई सबकंजंक्टिवल हेमरेज की समस्या?
फ्रांसीसी अधिकारियों ने बाद में इस बात की पुष्टि की कि मैक्रों की आंख में खून की नस फट गई थी। स्थानीय मीडिया से एक बातचीत के दौरान कंसल्टेंट ऑप्थल्मोलॉजिस्ट डॉ मफाजो होव ने कहा कि तस्वीरों में देखकर ऐसा लगता है कि मैक्रों को सबकंजंक्टिवल हेमरेज हुआ है।
यह स्थिति तब होती है जब आंख की सतह पर मौजूद कोई छोटी खून की नस फट जाती है। इससे कंजंक्टिवा के आसपास खून बह जाता है, जिससे आंखें लाल हो सकती हैं या उनमें सूजन नजर आ सकती है।
डॉ कहते हैं, आमतौर पर ये समस्या किसी चोट, दुर्घटना या फिर चेहरे पर थप्पड़ या मुक्का लगने से हो सकती है। कुछ स्थितियों में ये दिक्कत अपने आप भी होती देखी गई है।
क्या है इसका कारण?
नेत्र रोग विशेषज्ञ मफाजो होव कहते हैं, ज्यादातर मामलों में यह अपने आप होता है। लोग अक्सर सुबह उठते हैं, शीशे में देखते हैं और इसे नोटिस करते हैं। उन्हें बिना किसी दर्द और बिना किसी साफ वजह के इस तरह की दिक्कत हो सकती है।
- चोट लगने के बाद भी ऐसा हो सकता है, हालांकि ऐसे मामलों में आपको आमतौर पर पलक और आसपास की त्वचा भी नीली दिखती है।
- जब मरीज इस तरह की समस्या के साथ आते हैं, तो हम आमतौर पर उनका ब्लड प्रेशर चेक करते हैं। हाई ब्लड प्रेशर भी इस समस्या का कारण बन सकता है। ब्लड प्रेशर बढ़ने की वजह से भी नसों के फटने का खतरा रहता है।
- वैसे तो यह सात से दस दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है, पर कभी-कभी थोड़ा ज्यादा समय भी लग सकता है।
दवाओं और संक्रमण के कारण भी आंखों में होती है ऐसी दिक्कत
मेडिकल एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कुछ मामलों में, दवाओं के कारण भी सबकंजंक्टिवल हेमरेज होने की आशंका बढ़ जाती है।
- पार्किंसंस रोग की दवाओं के कारण आंखों में इस तरह की दिक्कतें होने का जोखिम देखा जाता रहा है।
- इसके अलावा खून पतला करने वाली दवाओं के कारण भी त्वचा के नीचे और आंख में ब्लीडिंग होने की दिक्कत हो सकती है। स्ट्रोक और हार्ट अटैक को रोकने के लिए ये दवाएं दी जाती हैं।
गौरतलब है कि बीते दिनों कई रिपोर्ट्स में एडेनोवायरस संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी की भी खबरें सामने आई थीं, जिसके कारण सर्दी-जुकाम जैसे लक्षणों के साथ कंजंक्टिवाइटिस, आंखों के अगले हिस्से में सूजन और लालिमा हो सकती है।
ऑप्थल्मोलॉजिस्ट डॉ मफाजो होव कहते हैं, राष्ट्रपति मैक्रों की उपलब्ध तस्वीरें देखकर ये नहीं लगता है कि ये कंजंक्टिवाइटिस है। वायरल कंजंक्टिवाइटिस बहुत अलग होता है। इसमें आंखों से पानी आता है और ये अक्सर दोनों आंखों में होता है। इसलिए बहुत स्पष्ट तौर पर ये नहीं कहा जा सकता है कि राष्ट्रपति की आंखों की ये समस्या किस वजह से है।
पहले भी कई हस्तियों में देखी गई थी ये दिक्कत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इससे पहले एक-दो बार महारानी एलिजाबेथ द्वितीय भी सार्वजनिक रूप से ऐसी ही लाल आंखों के साथ दिखाई दीं थीं।
- सितंबर 2015 में पर्थशायर में यूरोपियन इवेंटिंग चैंपियनशिप के दौरान महारानी की आंख में इस तरह की दिक्कत नजर आई थी।
- सितंबर 2019 में, जो बाइडेन (उस समय राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार) भी एक टेलीविजन शो के दौरान सबकंजंक्टिवल हेमरेज जैसी स्थिति के साथ नजर आए थे। इसमें कहा जा रहा था कि ये पार्किसंस या किसी अन्य दवा के साइड-इफेक्ट के कारण हो सकता है।
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स्रोत
The story behind Emmanuel Macron’s striking sunglasses look at Davos
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