कुत्ते का काटना एक ऐसी आपातकालीन स्थिति है जिसे हल्की सी भी लापरवाही जानलेवा बना सकती है। भारत में रेबीज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है और चौंकाने वाली बात यह है कि रेबीज संक्रमण होने के बाद इसका कोई पुख्ता इलाज नहीं है, इसलिए बचाव ही एकमात्र रास्ता है।
Health Tips: कुत्ते के काटने के तुरंत बाद क्या करना चाहिए, कौन-सी लापरवाहियां बढ़ा देती हैं जान का खतरा?
Rabies Prevention Tips: अक्सर कुछ लोग कुत्ते के काटने पर ऐसी गलतियां करते हैं, जो कई मामलों में जान के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं कि कुत्ते के काटने के बाद क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए?
कुत्ते के काटने के तुरंत बाद घर पर क्या प्राथमिक उपचार करें?
काटने के तुरंत बाद सबसे जरूरी है घाव को बहते हुए पानी और साबुन से कम से कम 10-15 मिनट तक धुलें। साबुन में मौजूद तत्व वायरस की बाहरी परत को नष्ट करने में मदद करते हैं। घाव को रगड़ें नहीं और न ही उस पर पट्टी बांधें, क्योंकि घाव का खुला रहना और ऑक्सीजन के संपर्क में रहना वायरस के प्रसार को धीमा करता है। सफाई के बाद किसी एंटीसेप्टिक लोशन का उपयोग करें और तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
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कौन सी गलतियां संक्रमण और जान के खतरे को बढ़ा देती हैं?
कुत्ते के काटने के बाद की जाने वाली जानलेवा लापरवाहियों को आप इन मुख्य बिंदुओं के जरिए समझ सकते हैं-
- गलत घरेलू उपचार: घाव पर लाल मिर्च, चूना, मिट्टी, तेल या हल्दी जैसा 'देशी इलाज' करना सबसे बड़ी गलती है। ये चीजें वायरस को खत्म करने के बजाय घाव में गंभीर संक्रमण पैदा कर सकती हैं।
- पालतू कुत्ते को लेकर लापरवाही: अक्सर लोग सोचते हैं कि "पालतू कुत्ते ने काटा है तो वैक्सीन की जरूरत नहीं।" यह एक जानलेवा भूल है; कुत्ता पालतू हो या आवारा, डॉक्टर की सलाह और वैक्सीन अनिवार्य है।
- टीकाकरण में देरी: काटने के तुरंत बाद टीका न लगवाना वायरस को शरीर में फैलने और तंत्रिका तंत्र तक पहुंचने का मौका देता है। विषेशज्ञों के मुताबिक कुत्ते के काटने के 24 घंटे के भीतर वैक्सीन लगवाना चाहिए।
- अधूरा वैक्सीन कोर्स: कई लोग एक-दो इंजेक्शन लगवाकर कोर्स छोड़ देते हैं। कोर्स पूरा न करने से शरीर में वायरस के खिलाफ पूरी प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हो पाती।
- घाव को ढकना या पट्टी बांधना: घाव को तुरंत पट्टी से बांधने या टांके लगवाने से वायरस अंदर ही दब जाता है। रेबीज का घाव खुला रखना और ऑक्सीजन के संपर्क में रहना जरूरी है।
- लक्षणों का इंतजार करना: एक बार यदि रेबीज के लक्षण (जैसे पानी से डर लगना या व्यवहार में बदलाव) दिखने शुरू हो जाएं, तो मृत्यु की संभावना लगभग 100% हो जाती है, क्योंकि रेबीज का कोई इलाज नहीं है, केवल बचाव है।
डॉक्टर से मिलने पर कौन से टीके और इंजेक्शन अनिवार्य हैं?
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर घाव की गंभीरता (Category I, II, or III) के आधार पर 'एंटी-रेबीज वैक्सीन' (ARV) का कोर्स शुरू करते हैं। अगर घाव गहरा है, तो 'रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन' (RIG) का इंजेक्शन सीधे घाव के आसपास दिया जाता है ताकि वायरस को तुरंत बेअसर किया जा सके। इसके साथ ही टिटनेस का इंजेक्शन भी लगाया जाता है। डॉक्टर की सलाह के बिना वैक्सीन की कोई भी डोज न छोड़ें।
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जागरूकता ही रेबीज से बचाव का एकमात्र मंत्र है
कुत्ते के काटने की घटना को कभी भी हल्के में न लें। यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सही समय पर की गई सफाई और टीकाकरण रेबीज को 100% रोक सकते हैं। अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए प्राथमिक चिकित्सा के इन नियमों को याद रखें। आवारा कुत्तों से दूरी बनाए रखें और अपने पालतू जानवरों का नियमित टीकाकरण कराएं। आपकी सतर्कता ही आपको और समाज को इस घातक बीमारी से सुरक्षित रख सकती है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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