National Girl Child Day 2026: बेटियों की सुरक्षा किसी भी परिवार के लिए सबसे बड़ा चिंता का विषय है। देश में महिला सुरक्षा के लिए कई तरीके के अभियान और प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि स्त्री अपराध घर से लेकर समाज के हर क्षेत्र में देखने को मिलता है। ऐसे में उनकी सुरक्षा और खुशहाली तय करने की पहली जिम्मेदारी परिवार की होती है। सिर्फ बेटियों की सीमाएं तय करके, या उनके लिए दीवारें खड़ी करके सुरक्षा नहीं जा सकती, इसके लिए सोच मजबूत बनाने की आवश्यकता होती है।
National Girl Child Day 2026: बेटियों को जरूर सिखाएं ये पांच बातें, ताकि लड़कियां रहें सुरक्षित
National Girl Child Day 2026: राष्ट्रीय बालिका दिवस याद दिलाता है कि बेटियों को कमजोर नहीं, सजग बनाना है। उनकी सुरक्षा दीवारें खड़ी करने से नहीं, सोच मजबूत करने से होगी। बेटियों को खुशहाल और सुरक्षित रखना है तो ये बातें सिखाएं।
बेटियों को सिखाएं ये 5 जरूरी बातें
‘ना’ कहना सिखाएं
सबसे पहली और सबसे जरूरी सीख है कि बेटियों को बिना डर और बिना अपराधबोध के ना कहना सिखाएं।
- बेटियों को बताएं कि उनका शरीर उनका है।
- अगर कोई असहज करे तो साफ़ “ना” कहना गलत नहीं
- रिश्तेदार, दोस्त या जान-पहचान, कोई भी अपवाद नहीं
- बेटियों को बताएं कि चुप रहना संस्कार नहीं, खतरा है।
अच्छे और बुरे स्पर्श का फर्क समझाएं
यह बात उम्र के हिसाब से, सरल भाषा में समझानी चाहिए।
- कौन सा स्पर्श ठीक है और कौन नहीं
- अगर कोई गलत छुए तो तुरंत बताना क्यों ज़रूरी है
- डराने की बजाय भरोसे का माहौल बनाएं
याद रखें अगर बच्ची चुप है, तो शायद उसे सुना नहीं गया।
अजनबियों और ऑनलाइन दुनिया से सतर्क रहना सिखाएं
आज खतरा सिर्फ गली-मुहल्लों में नहीं, स्क्रीन के अंदर भी है।
- अनजान लोगों से बात न करना
- फोटो, लोकेशन या पर्सनल जानकारी शेयर न करना
- कोई ऑनलाइन डराए या ब्लैकमेल करे तो तुरंत बताना
खुद पर भरोसा और आत्मरक्षा की आदत डालें
शारीरिक ताकत से ज़्यादा ज़रूरी मानसिक मजबूती है। बेटी को आत्मरक्षा के साथ आत्मविश्वास भी सिखाएं।
- जरूरत पड़े तो शोर मचाना
- भीड़ में मदद मांगना
- बेसिक सेल्फ-डिफेंस सीखना
- आत्मरक्षा का मतलब लड़ना नहीं, खुद को बचाकर निकलना है।