बीते दो-तीन दशकों में जिन बीमारियों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर सबसे ज्यादा दबाव बढ़ा है, कैंसर उनमें से एक है। इसे सिर्फ बढ़ती उम्र के साथ होने वाली बीमारी मानने की गलती न करें, युवा से लेकर बच्चे तक सभी इस रोग का शिकार पाए जा रहे हैं। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि खान-पान में गड़बड़ी, दिनचर्या की समस्या के अलावा कई पर्यावरणीय और आनुवांशिक स्थितियां भी इस जानलेवा रोग को बढ़ाती जा रही हैं।
Cancer Medicine: कैंसर रोगियों के लिए राहत भरी खबर, भारत में लॉन्च हुई बेहद किफायती दवा
जाइडस लाइफसाइंसेज ने गुरुवार (22 जनवरी 2026) को बताया कि उसने भारत में कई तरह के कैंसर के इलाज के लिए एक बायोसिमिलर लॉन्च किया है। कंपनी ने बताया है कि उसने भारत में 'तिष्ठा' नाम से निवोलुमैब का दुनिया का पहला बायोसिमिलर लॉन्च किया है।
पहले जान लीजिए बायोसिमिलर क्या है?
बायोसिमिलर, पहले से ही प्रयोग में लाई जाने वाली किसी ब्रांड नेम वाली दवाओं की ही तरह होती हैं। ये दवाएं जीवित स्रोतों (जैसे यीस्ट, बैक्टीरिया, या कोशिकाओं) से बनती हैं और ब्रांड वाली दवाओं की तरह ही काम भी करती हैं। अक्सर ये कम कीमत में उपलब्ध होती हैं।
कैंसर के इलाज के लिए बायोसिमिलर 'तिष्ठा'
जाइडस लाइफसाइंसेज ने गुरुवार (22 जनवरी 2026) को बताया कि उसने भारत में मल्टीपल कैंसर के इलाज के लिए एक बायोसिमिलर लॉन्च किया है। कंपनी ने बताया है कि उसने निवोलुमैब दवा का दुनिया का पहला बायोसिमिलर लॉन्च किया है जिसे भारत में 'तिष्ठा' नाम से उतारा गया है। गौरतलब है कि निवोलुमैब एक इम्युनोथेरेपी ड्रग है जो शरीर के इम्यून सिस्टम को कैंसर सेल्स से लड़ने में मदद करती है। निवोलुमैब के 100mg की कीमत 50,000 से एक लाख तक होती है।
एक चौथाई से भी कम होगी कीमत
अहमदाबाद स्थित दवा कंपनी ने एक रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि तिष्ठा 100mg और 40mg डोज में उपलब्ध होगी, जिनकी कीमत क्रमशः 28,950 रुपये और 13,950 रुपये होगी। कंपनी ने बताया कि ये कीमतें अब तक की दवाओं की कीमतों का लगभग एक चौथाई हैं।
जाइडस लाइफसाइंसेज के एमडी शरविल पी पटेल ने कहा, तिष्ठा के लॉन्च के साथ, हम मरीजों के जरूरत के आधार पर खास थेरेपी के जरिए इम्यूनो-ऑन्कोलॉजी तक पहुंच बढ़ा रहे हैं। हमारा लक्ष्य मरीजों को उनके पूरे इलाज के दौरान लगातार देखभाल देना है। कंपनी कैंसर रोगियों के लिए हाई-क्वालिटी बायोसिमिलर इम्यूनोथेरेपी की पहुंच आसान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे 5 लाख से ज्यादा मरीजो को फायदा होने की संभावना है।
--------------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।