डॉ. राजन गांधी
कोरोना के कारण घर बैठे रहने और फिजिकल एक्टिविटी पर विराम लगने से कई लोगों का रूटीन गड़बड़ा गया। वहीं कुछ लोगों ने इस कठिन दौर में ये समझ भी लिया कि आने वाली चुनौतियों से लड़ने में अच्छी सेहत सबसे बड़ी नियामत है। यही कारण था कि लॉकडाउन खुलते ही बड़ी संख्या में लोगों ने जिम और एरोबिक्स जैसी जगहों को जॉइन कर लिया। यह एक अच्छा संकेत भी रहा कि लोग सेहत को लेकर जागरूक हुए लेकिन बिना विचारे, बिना सही मार्गदर्शन लिए एक्सरसाइज करना मुश्किल भी खड़ी कर सकता है। यह केवल कोरोना के बाद की स्थिति ही नहीं है। अधिकांशतः लोग एक्सरसाइज शुरू करने या फिटनेस एक्टिविटी की शुरुआत करते समय विशेषज्ञ से राय लेने के बारे में नहीं सोचते। ज्यादातर मामलों में किसी की देखा-देखी या कहीं से सुनकर-पढ़कर लोग कोई भी एक्टिविटी अचानक शुरू कर देते हैं। यह सोचे बिना की इसका उनके शरीर पर क्या असर होगा। खासकर अगर वे पहली बार या बड़े लम्बे गैप के बाद एक्सरसाइज शुरू कर हों तो। हर एक शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है। इसलिए जरूरी है कि एक्सरसाइज या फिटनेस एक्टिविटी से जुड़ने से पहले भी मार्गदर्शन लिया जाए। जानिए कैसे एक्सरसाइज भी बन सकती है आपके लिए मुश्किल।
Health Tips: व्यायाम से फायदे की जगह हो सकते हैं ये नुकसान, इन बातों का रखें ध्यान
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योग
योगा, एक्सरसाइज की प्राचीन भारतीय पद्धति है, जो न केवल शरीर बल्कि दिमाग की तंदुरुस्ती के लिए भी एक बहुत अच्छा विकल्प होती है लेकिन इसका असर उल्टा नुकसानदायक भी हो सकता है अगर आपने इसे गलत तरीके से अपनाया तो। योग पद्धति में शरीर के हर हिस्से के लिए कोई व्यायाम या क्रिया होती है। इसी तरह हर समस्या के लिहाज से क्रियाओं के परहेज भी होते हैं। उदाहरण के लिए, शीर्षासन हर व्यक्ति को करने की सलाह नहीं दी जाती, इसी प्रकार पेट के रोगों से ग्रसित या किसी सर्जरी से गुजर चुके लोगों को भी बहुत दबाव डालने वाली योग क्रिया करने से मना किया जाता है। यहां तक कि ॐ का जाप भी कुछ परिस्थितियों में वर्जित होता है। इसलिए यदि आप योगा को चुन रहे हैं तो पहले सही प्रशिक्षक को चुनें।
ट्रेडमिल पर चलना
ट्रेडमिल या जिम वाली साइकिल आजकल लोग आसानी से खरीदकर घर भी ले आते हैं। अधिकांश मामलों में कुछ दिनों बाद ये मशीनें घर के एक कोने में उपेक्षित सी पड़ी नजर आती हैं। इन दोनों ही मशीनों पर अचानक या जरूरत से ज्यादा समय बिताना हानिकारक हो सकता है। आपने कई बार सुना होगा कि ट्रेडमिल पर चलते चलते किसी को हार्ट अटैक आ गया। ऐसा होने की आशंका तब सबसे ज्यादा होती है जब वजन ज्यादा हो, बहुत दिनों बाद एक्सरसाइज की जा रही हो, व्यक्ति हाई बीपी और शुगर का पेशेंट हो और ये दोनों ही कंट्रोल में न हों या कोई पहली बार ये एक्सरसाइज कर रहा हो। यहां एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि ट्रेडमिल और जिमिंग वाली साइकिल दोनों ही अधिकांश बंद जगहों पर होती हैं। ऐसे में उनका उपयोग करने पर पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन भी नहीं मिल पाती और यह भी स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है।
दौड़ लगाना या जॉगिंग करना
जाॅगिंग एक बहुत ही अच्छा व्यायाम जिसका फायदा पूरे शरीर को मिलता है। लेकिन एक दिन अचानक उठकर दौड़ने लगना हर उम्र और शारीरिक स्थिति के लिए फायदेमंद नहीं होता। अगर आप 40 साल के बाद, बढ़े हुए वजन के साथ अचानक दौड़ना या जॉगिंग करना शुरू कर देते हैं तो यह आपकी हड्डियों के साथ साथ दिल के लिए भी मुश्किल खड़ी कर सकता है। नियमित व्यायाम करने वाले, खिलाड़ी या आर्मी जवान रोजाना कई किलोमीटर दौड़ते हैं और इससे उन्हें फायदा भी मिलता है। लेकिन यह उनका रूटीन होता है और इसके लिए वे वॉर्म अप, स्ट्रेचिंग, सही रूटीन और सही तरीके से दौड़ने का मार्गदर्शन भी लेते हैं। यह एक तथ्य है कि दौड़ते या जॉगिंग करते समय शरीर का पूरा वजन एकसाथ पैरों पर पड़ता है, वहीं दिल पर एक्स्ट्रा लोड आ जाता है। आपकी अब तक कड़क हो चुकी मसल्स को इससे नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता है। इसलिए अगर दौड़ना शुरू करना हो तो पहले कुछ दिन सही जूते पहनकर लगातार तेज चलकर अभ्यास करें। इसके बाद 5 मिनिट्स दौड़ने से शुरुआत करें फिर इस समय को धीरे धीरे बढ़ाएं।
अन्य शारीरिक व्यायाम
इसी तरह जुम्बा, एरोबिक्स, रस्सी कूदना, किसी प्रकार का मार्शल आर्ट आदि जैसी एक्टिविटीज को भी एकदम शुरू करने से बचें। ये आपकी हड्डियों, मसल्स, को नुकसान पहुंचाने से लेकर आपकी रीढ़ को खतरे में डाल सकती हैं और ह्रदय, लिवर आदि जैसे अंगों के लिए भी मुश्किल खड़ी कर सकती हैं। अगर आप ओवरवेट हैं, पहले से किसी समस्या से ग्रसित हैं तो सबसे अच्छा तरीका है डॉक्टर की सलाह से एक्सरसाइज चुनना। आप ब्रिस्क वॉक यानी तेज चलने का विकल्प भी चुन सकते हैं, यह हर व्यक्ति और हर उम्र के लिए कारगर होता है।
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नोट: डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।