Swine Flu Symptoms, Causes And Treatment : महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में इन दिनों स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। मुंबई में स्वाइन फ्लू के अबतक 105 मरीज मिले हैं, तो वहीं छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू से पहली मौत होने का मामला सामने आया है। यहां एक चार साल की बच्ची स्वाइन फ्लू से ग्रसित थी, जिसकी रविवार रात एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। पिछले महीने छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू के 28 मरीज मिले थे। ऐसे में कोरोना वायरस और मंकीपॉक्स के बाद स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामले जोखिम बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन दिनों अधिकतर मरीज सर्दी बुखार जैसे वायरल इंफेक्शन से पीड़ित हैं। बच्चों में हाथ, पैर और मुंह के रोग के मामले सामने आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि स्वाइन फ्लू की पहचान तब हो पाती है जब मरीज की तबीयत वायरल से ज्यादा खराब होने लगती है। इन दिनों मौसमी बीमारी के कारण लोगों को सर्दी जुकाम और बुखार की समस्या भी हो रही है। ऐसे में लोग साधारण बुखार और स्वाइन फ्लू में अंतर नहीं कर पा रहे। यहां स्वाइन फ्लू के लक्षण बताए जा रहे हैं, ताकि मरीज स्वाइन फ्लू की शिकायत होने पर उसकी पहचान कर सके और सही समय पर सही इलाज ले सकें। ये रहे स्वाइन फ्लू के लक्षण, कारण और उपचार।
Health Tips: मुंबई-छत्तीसगढ़ में बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के मामले, जानें इसके लक्षण, कारण और उपचार
क्या है स्वाइन फ्लू?
स्वाइन फ्लू एक वायरल इंफेक्शन है, जो मूल रूप से सूअरों से मनुष्यों में फैला। स्वाइन फ्लू एच1एन1 इन्फ्लूएंजा एक तरह का वायरस है। यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है। नियमित इन्फ्लूएंजा और स्वाइन फ्लू के लक्षण बहुत मिलते-जुलते हैं। गर्मी और मानसून के मौसम में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ जाते हैं। इस बीमारी से बचाव के लिए कई वैक्सीन हैं, साथ ही इलाज के लिए कई तरह के एंटीवायरल उपचार भी मौजूद हैं। इसके अलावा हाइजीन का ख्याल रखकर और सर्जिकल मास्क पहनकर स्वाइन फ्लू से बचा जा सकता है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण?
- बुखार आना
- सिरदर्द होना
- डायरिया होना
- खांसी आना
- छींक आना
- ठंड लगना
- गले में खराश होना
- थकान
- नासिका मार्ग ब्लॉक होना
स्वाइन फ्लू की स्थिति गंभीर होने पर निमोनिया, सांस लेने संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा और डायबिटीज के मरीजों को स्वाइन फ्लू होने पर गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती है।
स्वाइन फ्लू होने के कारण
- इन फ्लू की तरह ही स्वाइन फ्लू का भी प्रसार होता है। किसी संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने के बाद हवा में फैले वायरस से लोग स्वाइन फ्लू की चपेट में आ सकते हैं।
- संक्रमित मरीज द्वारा छुई चीजों के संपर्क में आने से भी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
- किसी व्यक्ति में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखने से लेकर बीमारी होने के 7 दिन बाद तक वायरस फैल सकता है।
किन लोगों को स्वाइन फ्लू का खतरा ज्यादा
अध्ययनों के मुताबिक कुछ लोगों में स्वाइन फ्लू का खतरा अन्य की तुलना में ज्यादा होता है। इनमें शामिल हैं,
- गर्भवती महिलाएं
- हृदय रोग के मरीज
- डायबिटीज के मरीज
- रेस्पिरेटरी समस्याएं जैसे निमोनिया से ग्रसित लोग
- 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और 2 साल से छोटे बच्चे को स्वाइन फ्लू जल्द होने की संभावना रहती है।
