डायबिटीज एक गंभीर समस्या है, जिसका खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। बच्चे हों या बुजुर्ग सभी इसका शिकार हो रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज की समस्या रही है, उन्हें विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है। डायबिटीज यानी ब्लड शुगर बढ़े रहने की स्थिति शरीर के अंगों को कई प्रकार से प्रभावित करने वाली हो सकती है। इससे समय के साथ हृदय रोग, किडनी की बीमारी, आंखों और तंत्रिकाओं की समस्या हो सकती है।
Diabetes: डायबिटीज में घाव भरने में क्यों लगती है देरी? डॉक्टर से जानिए कैसे रुक जाता है शरीर का हीलिंग सिस्टम
डायबिटीज हमारे शरीर को कई प्रकार से प्रभावित कर सकती है, इसलिए इसके लक्षण भी उसी आधार पर अलग-अलग होते हैं। इस बीमारी में घावों के ठीक होने में बहुत अधिक समय लगना सबसे आम लक्षण देखा जाता रहा है। पर क्या आपने सोचा कि ऐसा होता क्यों है?
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डायबिटीज में घाव भरने में लगता है ज्यादा समय
जब शरीर में किसी भी तरह का कट, खरोंच या घाव होता है, तो हमारा शरीर तेजी से उस घाव को भरने और घाव को संक्रमण से बचाने में लग जाता है। लेकिन डायबिटीज के मरीजों के लिए ये काम काफी कठिन रहता है। इतना ही नहीं कई बार मामूली सा घाव भी ठीक होने में महीनों तक का समय लग सकता है और कुछ स्थितियों में ये गंभीर संक्रमण का रूप भी ले लेता है।
यहां यह समझना जरूरी है कि डायबिटीज में घाव भरने में इतना समय क्यों लगता है? इसके पीछे क्या कारण हैं? डॉक्टर ने इसे आसान भाषा में समझाया है।
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क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में वरिष्ठ डायबेटोलॉजिस्ट डॉ अल्तमश शेख बताते हैं, डायबिटीज रोगियों में घाव को ठीक होने में अधिक समय लगना बहुत आम है। इसके लिए कई कारणों को जिम्मेदार माना जाता रहा है।
- पहला कारण डायबिटीज की स्थिति में खून में ग्लूकोज की मात्रा काफी बढ़ जाती है। हाई ब्लड शुगर, घाव भरने की प्राकृतिक प्रक्रिया को कई तरह से प्रभावित कर सकती है।
- यह सफेद रक्त कोशिकाओं (WBCs) की कार्यक्षमता को कमजोर कर देती है, जिससे शरीर की संक्रमण से लड़ने की ताकत घट जाती है और संक्रमण के कारण घाव जल्दी नहीं ठीक हो पाते।
डायबिटीज के कारण शरीर पर होने वाला असर
डॉ शेख बताते हैं, घावों को ठीक होने में अधिक समय लगने और संक्रमण बढ़ने का एक कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने को माना जाता है। कमजोर इम्युनिटी के कारण घावों पर बैक्टीरिया और फंगस को पनपने का मौका मिल जाता है, जिसके कारण कट पर संक्रमण होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
- इसके अलावा डायबिटीज की स्थिति शरीर की छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगती है। इससे उस हिस्से तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति कम हो जाती है जहां घाव है। इससे घाव की जगह नई कोशिकाओं का निर्माण धीमा हो जाता है, जिसके कारण घावों को ठीक होने में सामान्य से अधिक समय लग सकता है। चूंकि घाव ठीक होने में अधिक समय लग रहा होता है, इसलिए वहां पर संक्रमण होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
डायबिटीज के कारण सफेद रक्त कोशिकाओं की घट जाती है क्षमता
डायबिटीज और इसके कारण होने वाली समस्याओं के बारे में जर्नल ऑफ क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन (2019) के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों में सफेद रक्त कोशिकाओं की प्रभाविकता 40-50% तक घट जाती है, संक्रमण बढ़ने का ये प्रमुख कारण माना जाता रहा है।
डायबिटीज के मरीजों में डायबिटिक फुट नामक समस्या का खतरा अधिक रहता है। ये स्थिति में पैरों में अल्सर बनने लगता है जिसकी गंभीर स्थिति में लगभग 15% मामलों में पैर काटने तक की नौबत आ सकती है।
डॉ अल्तमश शेख कहते हैं, डायबिटीज में इस तरह के जोखिमों से बचे रहने के लिए सबसे जरूरी है कि आप ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें। नियमित रूप से पैरों और त्वचा की जांच करते रहें। किसी भी चोट या छोटा घाव होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।