दुनियाभर में तेजी से बढ़ती क्रॉनिक बीमारियों जैसे हृदय रोग-डायबिटीज और मेटाबॉलिज्म की समस्या के लिए लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी को प्रमुख कारण माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इसके अलावा सभी लोगों को अपने वजन को कंट्रोल में रखना भी बहुत जरूरी है। बढ़ते वजन या हाई बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की स्थिति को कई जानलेवा बीमारियों का प्रमुख कारण पाया गया है।
Obesity Risk: डायबिटीज, हृदय रोगों के साथ ब्रेन को भी खतरा, आप भी हैं मोटापे का शिकार तो हो जाइए सावधान
Obesity Health Issues: दुनिया के जाने-माने एक्सपर्ट्स ने कहा है कि ज्यादा वजन होने से डिमेंशिया का खतरा काफी बढ़ जाता है। मोटापा की स्थिति आपके दिमागी क्षमता को कम करने वाली हो सकती है जिसको लेकर सभी लोगों को पहले से ही सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
मोटापा के शिकार लोगों में डिमेंशिया का खतरा
इंग्लैंड की ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में हुए एक अध्ययन के आधार पर दुनिया के जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अलर्ट किया है कि वजन अधिक होने या मोटापे के कारण व्यक्ति में डिमेंशिया का खतरा काफी बढ़ सकता है। अगर समय रहते वजन कम कर लिया जाए और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल कर लेते हैं तो दुनियाभर में डिमेंशिया के लाखों मामलों को रोका जा सकता है।
द जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बीएमआई और वैस्कुलर डिमेंशिया के बीच सीधा संबंध पाया है।
- वैस्कुलर डिमेंशिया दिमाग में खून के प्रवाह में कमी के कारण होती है, जिससे दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और कोशिकाएं डेड होने लग जाती हैं।
- ऐसा दिमाग में छोटी खून की नसों के सिकुड़ने या उनके ब्लॉक होने की वजह से होता है, जिसे अक्सर लाइफस्टाइल कारकों या स्ट्रोक से जोड़कर माना जाता है।
- मोटापा के शिकार लोगों में स्ट्रोक का खतरा भी अधिक देखा गया है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को कम उम्र से ही अपने वजन को कंट्रोल रखने पर ध्यान देते रहने की सलाह देते हैं।
हाई बीएमआई और डिमेंशिया का क्या लिंक है?
उम्र से जुड़ी बीमारियों की चीफ फिजिशियन और एक्सपर्ट डॉ. रूथ फ्रिके-श्मिट कहती हैं, इस अध्ययन में हमने पाया कि हाई बीएमआई और हाई ब्लड प्रेशर डिमेंशिया के सीधे कारण हैं। बढ़े हुए वजन और ब्लड प्रेशर का इलाज और रोकथाम डिमेंशिया के रोकथाम में काफी मददगार हो सकता है।
- इस अध्ययन के लिए 5 लाख से अधिक प्रतिभागियों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों के वजन और उसके कारणों की जांच की गई।
- जिन लोगों का बीएमआई जेनेटिकली ज्यादा था उनमें वैस्कुलर डिमेंशिया होने की आशंका अधिक पाई गई।
- डिमेंशिया के बढ़े हुए खतरे का लगभग एक चौथाई हिस्सा हाई ब्लड प्रेशर की वजह से था।
- विशेषज्ञों ने कहा, ये अध्ययन दिखाता है कि वजन और ब्लड प्रेशर की रोकथाम के लिए किए गए उपाय आपमें दिमाग की इस खतरनाक बीमारी के खतरे को कम करने वाले हो सकते हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अध्ययन के लेखक और क्लिनिकल बायोकेमिस्ट्री के एक्सपर्ट डॉ. लिव टिबजर्ग नॉर्डेस्टगार्ड कहते हैं, डिमेंशिया एक खतरनाक बीमारी है जिससे अभी दुनिया भर में 50 मिलियन लोग प्रभावित हैं। दुर्भाग्य से इसके इलाज और बचाव के तरीके कम हैं। ये अध्ययन आपको डिमेंशिया से बचाव के लिए एक कारगर उपाय दे रहा है।
जिन लोगों के परिवार में पहले किसी को डिमेंशिया या फिर अधिक वजन की समस्या रही हो उन्हें इस बीमारी को लेकर और भी सतर्कता बरतनी चाहिए। कम उम्र से ही अगर आप वजन कंट्रोल करने वाले उपाय करते हैं तो इससे न सिर्फ ब्लड प्रेशर नियंत्रित होता है, साथ ही आप हृदय रोग, डायबिटीज और डिमेंशिया से भी काफी हद तक खुद को सुरक्षित कर सकते हैं।
कहीं आप भी मोटापे का शिकार तो नहीं?
डॉक्टर कहते हैं, जिन लोगों का वजन सामान्य से अधिक होता है उनमें दिल की बीमारी, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और जोड़ों की समस्याओं जैसे आर्थराइटिस का खतरा कई गुना अधिक हो सकता है। वजन चेक करने के लिए बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की जांच को कारगर तरीका माना जाता रहा है। पर हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने बताया है कि मोटापे के खतरे का पता लगाने में वेस्ट-टू-हाइट रेशियो (कमर की चौड़ाई और ऊंचाई का अनुपात) बीएमआई की तुलना में ज्यादा बेहतर हो सकता है। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
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स्रोत:
People with obesity may have a higher risk of dementia
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