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Air Pollution: प्रदूषण में खुद से एंटी एलर्जिक दवाएं लेना कितना सुरक्षित? जान लें इसके साइड इफेक्ट

Fri, 19 Dec 2025 06:54 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Fri, 19 Dec 2025 06:54 PM IST
सार

Side Effects Of Self-Medication: वायु प्रदूषण इन दिनों अपने चरम पर है। इसका सीधा असर अब लोगों के ऊपर देखने को भी मिल रहा है। अस्पतालों में मरीजों की लंबी लाइन लगी हैं। इसी बीच में बहुत से लोग खुद को स्वस्थ रखने के लिए एंटी एलर्जिक दवाओं का सेवन कर रहे हैं। आइए इस लेख में डॉक्टर से जानते हैं कि ये कितना सुरक्षित है?

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How safe is self-administering anti-allergic medication during pollution Learn about its side effects
एंटिएलर्जिक दवाएं - फोटो : Amar Ujala

Side Effect of Anti-Allergic Medicines: इन दिनों हवा में बढ़ते प्रदूषण और जहरीले कणों के कारण लोगों में एलर्जी, छींकने, नाक बहने और आंखों में जलन की समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं।  इन लक्षणों से तुरंत राहत पाने के लिए बहुत से लोग बिना किसी डॉक्टरी परामर्श के मेडिकल स्टोर से खुद ही एंटिएलर्जिक दवाएं खरीदकर खाना शुरू कर देते हैं। लेकिन क्या यह आदत वास्तव में सुरक्षित है? इस गंभीर विषय पर हमने ओडिशा के निजी अस्पताल के डॉक्टर रवि कुशवाहा से विशेष बातचीत की।



डॉ. कुशवाहा ने बताया कि प्रदूषण जनित एलर्जी के लिए लिवो सिट्राजिन, सिट्राजिन और फेक्सोफेनाडाइन 120 mg जैसी एंटीहिस्टामिनिक दवाएं प्रभावी तो हैं, लेकिन इनका सेवन केवल एक फिजिशियन की सलाह पर ही किया जाना चाहिए। बिना सोचे-समझे इन दवाओं को बार-बार लेना आपके शरीर के नेचुरल डिफेंस मैकेनिज्म को प्रभावित कर सकता है और कई अन्य अंगों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

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दवा - फोटो : Adobe Stock
बिना डॉक्टरी सलाह के न लें दवा
डॉ. रवि कुशवाहा के अनुसार, बिना डॉक्टर से पूछे दवा लेने का सबसे बड़ा रिस्क गलत खुराक है। हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और एलर्जी की गंभीरता अलग होती है। यदि आप बिना विशेषज्ञ की सलाह के ये दवाएं लेते हैं, तो यह आपके लिवर और किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, कुछ लोगों में ये दवाएं गंभीर सुस्ती, धुंधली दृष्टि और पेशाब करने में कठिनाई जैसी समस्याएं पैदा कर सकती हैं।

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बार-बार दवा खाने के नुकसान - फोटो : Freepik.com

बार-बार दवा लेना सेहत के लिए खतरा
अगर आप बार-बार या लंबे समय तक इन दवाओं का सेवन करते हैं, तो शरीर इनके प्रति 'टॉलरेंस' विकसित कर लेता है। इसका मतलब है कि भविष्य में आपको उसी एलर्जी को ठीक करने के लिए दवाओं की अधिक खुराक की आवश्यकता होगी। डॉ. कुशवाहा बताते हैं कि दवाओं पर अत्यधिक निर्भरता से शरीर का प्राकृतिक इम्यून रिस्पांस सुस्त पड़ जाता है, जिससे आप छोटी-मोटी बीमारियों के प्रति भी अतिसंवेदनशील हो सकते हैं।


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थकान - फोटो : Freepik

नींद और मानसिक एकाग्रता पर प्रभाव
ज्यादातर एंटी एलर्जिक दवाओं का एक सामान्य साइड इफेक्ट तेज सुस्ती या 'सेडेशन' है। सीट्रीजिन जैसी दवाएं लेने के बाद व्यक्ति को गहरी नींद आ सकती है या वह थकान महसूस कर सकता है। यदि आप गाड़ी चलाते हैं या भारी मशीनों पर काम करते हैं, तो बिना परामर्श के इन दवाओं का सेवन जानलेवा दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है। फेक्सोफेनाडिन जैसे कुछ विकल्प कम सुस्ती पैदा करते हैं, लेकिन उनकी खुराक भी डॉक्टर ही तय करें।

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सुरक्षित रहने के उपाय और विशेषज्ञ की सलाह-
डॉक्टर के सुझावों और प्रदूषण से बचाव के उपायों को आप नीचे बताए गए उपायों का जरूर पालन करें-
  • घर से बाहर निकलते समय हमेशा N95 मास्क लगाएं। यह हवा में मौजूद सूक्ष्म प्रदूषक कणों को फेफड़ों तक पहुँचने से रोकता है।
  • बाहर से घर लौटने पर गुनगुने पानी की भाप जरूर लें। इससे श्वसन नली में जमा धूल और प्रदूषक तत्व साफ हो जाते हैं और संक्रमण का खतरा कम होता है।
  • सुबह और शाम के समय बाहर टहलने या व्यायाम करने से बचें। सुबह-शाम प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक होता है, जो फेफड़ों के लिए घातक है।
  • अपने भोजन में एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा बढ़ा दें। इसके लिए खट्टे फल (विटामिन C), नट्स, हरी सब्जियां और हल्दी वाला दूध लें। ये शरीर के अंदरूनी अंगों को प्रदूषण के डैमेज से बचाते हैं।
  • अगर एलर्जी के लक्षण गंभीर हों, तो खुद से दवा न लें। डॉक्टर को अपनी मेडिकल हिस्ट्री बताएं और उनके द्वारा बताई गई सटीक दवा और समय का ही पालन करें।
  • याद रखें कि दवाएं केवल राहत देने के लिए होती हैं, बिना जानकारी के इनका बार-बार इस्तेमाल आपको दूसरी गंभीर बीमारियों की ओर धकेल सकता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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