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इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार है च्यवनप्राश, जानिए कैसे बनाया जाता है और किन चीजों का होता है इस्तेमाल
दुनियाभर के डॉक्टर और वैज्ञानिक कोरोना की वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं, लेकिन जब तक ये वैक्सीन नहीं बन जाती तब तक कोरोना वायरस से बचना ही एकमात्र उपाय है। इसके लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना बहुत जरुरी है। लोग इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए तरह-तरह की चीजों का सेवन कर रहे हैं, लेकिन इनके उपयोग से शरीर को नुकसान भी पहुंच सकता है। लेकिन च्यवनप्राश एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है, जिसके सेवन से आप बिना किसी नुकसान के अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बना सकते हैं और कोरोना से अपना बचाव कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि इसे बनाने में किन औषधियों का इस्तेमाल किया जाता है और इसे कैसे बनाते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
च्यवनप्राश को बनाने के लिए आंवला एक मुख्य घटक है, क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी होता है, जो शरीर की रक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। इसे पकाने के बाद भी विटामिन सी की मात्रा में कोई कमी नहीं आती है। इसमें लगभग 36 तरह की जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है। इसमें नागकेशर, सफेद मूसली, पिप्पली, शहद और तेजपत्ता, पाटला, अरणी, गंभारी, कमल गट्टा, विल्व और श्योनक की छाल, नागमोथा, पुष्करमूल, केशर, दालचीनी, आदि चीजें मिलाई जाती हैं।
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च्यवनप्राश बनाने के लिए सभी जड़ी बूटियों के द्रव्य को निकाल लें। ताजे आंवला को एक कपड़े की पोटली में बांधकर किसी बड़े बर्तन में कम से कम 12-13 लीटर पानी डालकर उबालें। जब पानी का आंठवा हिस्सा रह जाए तो आंवले को निकाल कर उसके बीजों को अलग कर दें और आंवले का पेस्ट बना लें। बचे पानी को भी छान कर रख लें। किसी कढ़ाई में तिल का तेल गर्म करें और आंवले को उसमें अच्छी तरह से पकाएं। उसके बाद बचे हुए पानी में आवश्यकतानुसार चीनी मिलाकर चाश्नी की तरह तैयार कर लें। इसके बाद इसमें आंवला डालकर पकाएं। जब इसका एक गाढ़ा पेस्ट जैसा तैयार हो जाए तो उसमें 200 ग्राम 200 ग्राम तुगाक्षिरी, 300 ग्राम शहद, 50 ग्राम छोटी इलायची, 100 ग्राम पिप्पली, 50 ग्राम तेजपत्र और 50 ग्राम नागकेसर मिलाएं। इस तरह से च्यवनप्राश बनकर तैयार हो जाएगा।
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जिन लोगों को महक की जानकारी होती है, वे च्यवनप्राश की खुशबू से उसे पहचान सकते हैं। इसमें पिप्पली और दालचीनी की खूशबू आती है। स्वाद में ये थोड़ा खट्टा होता है। अगर च्यव्यनप्राश ज्यादा मीठा लगता है, तो इसका मतलब है कि चीनी का प्रयोग ज्यादा किया गया है। च्यवनप्राश को पानी में डालने से वह डूब जाता है। अगर पानी में डालने पर उसके कण तैरते हुए नजर आते हैं, तो इसका मतलब है कि च्यवनप्राश पूरी तरह से पका नहीं है।
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