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Health Alert: डायबिटीज से लेकर मानसिक रोगों तक, आपकी यह छोटी सी भूल बन सकती है कई क्रोनिक बीमारियों का कारण

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 05 Aug 2022 07:25 PM IST
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नींद की कमी के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Istock

पिछले कुछ वर्षों में डायबिटीज, हृदय रोग और कई तरह के मानसिक विकारों के मामले तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए गए हैं। आहार में गड़बड़ी के साथ नींद में कमी या नींद के पैटर्न में बदलाव को इसके लिए प्रमुख कारणों के तौर पर देखा जा रहा है। अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों की नींद पूरी नहीं हो पाती है या फिर जिनका सोने-जागने का चक्र गड़बड़ रहता है ऐसे लोगों में समय के साथ कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के विकसित होने का खतरा हो सकता है।



स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक सोने-जागने के समय में गड़बड़ी वाले लोगों में अन्य लोगों की तुलना में क्रोनिक बीमारियों का जोखिम भी अधिक पाया गया है।  

शोधकर्ता कहते हैं, यदि आपके सोने का समय सही नहीं है जैसे कि या तो आपकी नींद नहीं पूरी हो पा रही है या आप बहुत अधिक सोते हैं, हफ्ते भर की नींद को वीकेंड पर पूरी करने को कोशिश करते हैं तो ऐसी आदतें समय के साथ आपमें गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक बढ़ा देती हैं। अनियमित नींद का पैटर्न मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित करता है जिसके कारण कई तरह की गंभीर और क्रोनिक बीमारियों के विकसित होने का जोखिम हो सकता है।

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नींद पूरा न होना सेहत के लिए हानिकारक - फोटो : Pixabay

ऐसी गलतियों और बचें

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर देखने को मिलता है कि जिन लोगों की रोजाना नींद ठीक से पूरी नहीं हो पाती है वह वींकेड पर पूरे दिन सोकर इसे पूरा करने की कोशिश करते हैं। पर ऐसा करके न तो आप नींद पूरी कर सकते हैं न ही इससे कोई लाभ है। अध्ययनों में इस बात का भी जिक्र मिलता है कि अगर आपकी एक रात भी ठीक से नींद पूरी नहीं हो पाती है तो इसका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर हो सकता है, इस तरह के जोखिम से बचने के लिए नींद के पैटर्न को ठीक रखना सभी के लिए बहुत आवश्यक है।

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अनियमित नींद के पैटर्न से कई बीमारियों का खतरा - फोटो : iStock

इन क्रोनिक बीमारियों का बढ़ जाता है खतरा

अध्ययनों से पता चलता है कि यदि आपमें अनियमित नींद का पैटर्न लंबे समय से जारी है और आप नींद पूरी नहीं कर पा रहे हैं तो ऐसे लोगों में क्रोनिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम काफी बढ़ जाता है।  नींद की बीमारी वाले लोगों में वजन बढ़ने का खतरा सबसे अधिक होता है जिसके कारण समय के साथ डायबिटीज और हृदय रोग भी विकसित हो सकता है। कुछ अध्ययन इस बात की तरफ भी संकेत करते हैं कि ऐसे लोगों में मनोवैज्ञानिक समस्याएं भी विकसित हो सकती हैं। 

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नींद की गुणवत्ता और अवधि दोनों का रखें ध्यान - फोटो : iStock

सर्कैडियन रिदम में गड़बड़ी

डॉक्टरों का मानना है कि नींद के पैटर्न में अनियमितता का मुख्य कारण सर्कैडियन रिदम का ठीक न होना हो सकता है, यह सोने-जागने और आराम करने के लिए आवश्यक होता है। कुछ शोध में पाया गया है कि जिन लोगों का सर्कैडियन रिदम अव्यवस्थित बना रहता है ऐसे लोगों में अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसे गंभीर मनोरोगों के होने का खतरा अन्य लोगों की तुलना में अधिक होता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को समय पर सोने-जागने के समय को ठीक रखने और नींद को पूरा करने पर विशेष ध्यान देते रहने की सलाह देते हैं।

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सोने-जागने का समय करें निर्धारित - फोटो : istock

नींद के चक्र को ठीक कैसे करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सोने-जागने के चक्र को ठीक करके आप इन गंभीर समस्याओं के खतरे को कम कर सकते हैं। इसके लिए लाइफस्टाइल में स्वस्थ बदलाव बहुत आवश्यक होता है। अच्छी नींद पाने के लिए स्वस्थ पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन और नियमित व्यायाम करना सबसे आवश्यक है। इसके अलावा स्क्रीन टाइम को कम करके भी नींद की समस्याओं में सुधार किया जा सकता है। अच्छी नींद पाने के लिए विशेषज्ञ रात के समय कमरे को शांत और अंधेरा रखने की सलाह देते हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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