अच्छी सेहत चाहते हैं तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ खान-पान में सुधार को सबसे जरूरी मानते हैं। कई अध्ययनों से स्पष्ट होता है कि अगर हम सभी सिर्फ डाइट में ही सुधार कर लें तो इससे कई तरह की बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है। डायबिटीज हो या हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारियां हों या लिवर-किडनी की समस्याएं, इन सभी के लिए डाइट में गड़बड़ी को एक बड़ा कारण माना जाता रहा है।
Healthy Diet: कहीं आपकी डाइट में भी तो नहीं है फाइबर की कमी? कैसे करें इसकी पहचान
फाइबर पाचन से लेकर दिल की सेहत तक, हर चीज में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए अपनी रोजाना की डाइट में फाइबर वाली चीजों को शामिल करना बहुत जरूरी है। क्या आपकी डाइट में तो फाइबर की कमी नहीं है?
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क्या कहती हैं विशेषज्ञ?
पुणे स्थित एक अस्पताल में डायटीशियन श्वेता गर्ग बताती हैं, फल-सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, नट्स और सीड्स फाइबर का स्रोत हैं। फाइबर को शरीर का क्लीनिंग सिस्टम भी कहा जाता है। यह आंतों को स्वस्थ रखता है और भोजन को सही तरीके से पचाने में मदद करता है।
हालांकि जिस तरह से लोगों के खान-पान के तरीके में बदलाव आ रहा है, जंक-प्रोसेस्ड फूड्स की तरफ लोगों की रुचि ज्यादा बढ़ रही है इसने फाइबर की कमी का खतरा भी बढ़ा दिया है। अच्छी बात ये है कि फाइबर की पूर्ति के लिए आपको महंगे सप्लीमेंट्स की नहीं, बल्कि खान-पान में बस छोटे-मोटे सुधार की जरूरत होती है।
अब सवाल ये है कि आखिर ये कैसे जाना जाए कि हमारी थाली में फाइबर की मात्रा ठीक है या नहीं?
कितना फाइबर अच्छी सेहत के लिए जरूरी?
डायटीशियन बताती हैं, वयस्कों को रोजाना लगभग 25-35 ग्राम फाइबर की जरूरत होती है, खान-पान में सुधार करके इसकी पूर्ति भी आसानी से की जा सकती है। हालांकि अगर आपकी डाइट में प्रोसेस्ड-फास्ट फूड और रिफाइंड आहार ज्यादा हैं तो ये शरीर में फाइबर की कमी करके कई तरह की दिक्कतें पैदा कर सकते हैं।
फाइबर के लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च करने की भी जरूरत नहीं है। दैनिक खानपान वाली चीजें भी इसकी जरूरतों को पूरा कर सकती हैं।
फाइबर की कमी शरीर को कई प्रकार से प्रभावित करती है। इससे कब्ज से लेकर सेहत से संबंधित कई दिक्कतें बढ़ जाती है। इन लक्षणों के आधार पर आप जान सकते हैं कि आपकी डाइट और शरीर में फाइबर की कमी तो नहीं है?
- जब भोजन में पर्याप्त फाइबर नहीं होता, तो पाचन खराब हो जाता है, मल सख्त हो जाता है और शौच में दिक्कत हो सकती है।
- पेट भारी लगना, गैस, एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याएं हो रही हैं तो ये फाइबर की कमी का संकेत हो सकती है।
- फाइबर की कमी से ब्लड शुगर तेजी से ऊपर-नीचे होने लगता है, क्योंकि फाइबर भोजन के पाचन को धीमा करता है, इसकी कमी में शुगर जल्दी बढ़ती है।
- लो फाइबर कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी बढ़ सकता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा बढ़ता है।
- फाइबर की कमी से आंतों के गुड बैक्टीरिया कमजोर होने लगते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है।
फाइबर की पूर्ति कैसे करें?
फाइबर की पूर्ति के लिए संतुलित भोजन सबसे जरूरी है। रोजाना की डाइट में साबुत अनाज जैसे ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस, जौ को शामिल करें।
- फल और सब्जियां फाइबर के बेहतरीन स्रोत हैं। सेब, नाशपाती, अमरूद, संतरा, पपीता में खूब फाइबर होता है।
- गाजर, चुकंदर, पालक, ब्रोकली और हरी पत्तेदार सब्जियां नियमित रूप से खानी चाहिए।
- फलों का जूस पीने के बजाय साबुत फल खाना ज्यादा फायदेमंद होता है।
- दालें, राजमा, चना, लोबिया, अलसी और चिया सीड्स भी फाइबर के अच्छे स्रोत हैं।
- भरपूर मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि फाइबर सही तरीके से काम तभी करता है जब शरीर हाइड्रेटेड हो।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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