मौसम बदलते ही बुखार होना काफी आम है, इसका कोई भी शिकार हो सकता है। हालांकि जब बुखार बरसात के दिनों में आ रहा हो, साथ में जोड़ों-पैरों में दर्द की समस्या भी बनी रहती हो तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। ये मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों जैसे डेंगू-मलेरिया या फिर चिकनगुनिया का संकेत भी हो सकता है।
Fever Risk Factors: बार-बार हो रहा है बुखार? कैसे जानें ये वायरल फीवर है या मलेरिया
World Malaria Day 2026: मलेरिया का खतरा उन इलाकों में ज्यादा होता है जहां पानी जमा रहता है, साफ-सफाई की कमी होती है और मच्छरों की संख्या अधिक होती है। कहीं आप भी इसका शिकार न हो जाएं? कैसे जानें बुखार मलेरिया के कारण है या फिर सामान्य है?
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मलेरिया और इसका खतरा
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023 में दुनिया भर में मलेरिया के लगभग 26 करोड़ से अधिक मामले सामने आए और 5.97 लाख लोगों की मौत हुई। मलेरिया को लेकर लोगों में देखी जा रही लापरवाही सबसे ज्यादा भारी पड़ रही है।
- मलेरिया सिर्फ एक साधारण बुखार नहीं, बल्कि एक परजीवी संक्रमण है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है।
- यह शरीर में जाकर लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है और धीरे-धीरे व्यक्ति को गंभीर रूप से कमजोर होता जाता है।
- मलेरिया का अगर सही से इलाज न किया जाए तो इससे ऑर्गन फेलियर तक का खतरा हो सकता है।
विशेषज्ञ कहते हैं, मलेरिया के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे ही लगते हैं जिसमें लोगों को सिर और बदन में दर्द, थकान, भूख न लगने के साथ बुखार की दिक्कत हो सकती है। यही कारण है कि कई लोग इसे वायरल या मौसम बदलने वाला फीवर मान लेते हैं।
लेकिन मलेरिया में बुखार का पैटर्न अलग हो सकता है। यही कारण है कि ये समझना जरूरी है कि आपको जो बुखार हो रहा है उसका कारण क्या है?
मलेरिया के कारण क्या-क्या दिक्कतें होती हैं?
मलेरिया का खतरा उन इलाकों में ज्यादा होता है जहां पानी जमा रहता है, साफ-सफाई की कमी होती है। गर्मी और बरसात का मौसम इसके जोखिमों को और बढ़ा देता है।
इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर रवि प्रकाश चौधरी कहते हैं, यह समझना भी जरूरी है कि हर तेज बुखार मलेरिया नहीं होता और हर मलेरिया को सिर्फ बुखार से नहीं पहचाना जा सकता। इसकी सही पहचान के लिए ब्लड टेस्ट और कुछ जरूरी जांच किए जाने चाहिए। हालांकि कुछ संकेत हैं जिनकी मदद से आप बुखार में आराम से अंतर कर सकते हैं।
- मलेरिया होने पर आपको बुखार के साथ ठंड लगने, कंपकंपी और फिर बहुत ज्यादा पसीना आने की दिक्कत होती है।
- सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, उल्टी, भूख न लगने, कमजोरी और चक्कर भी आ सकते हैं।
- कुछ गंभीर मामलों में सांस लेने में दिक्कत, बेहोशी, पीलिया जैसे संकेत भी दिख सकते हैं।
- यदि बुखार हर 24-48 घंटे में लौट रहा हो, तो ये मलेरिया की आशंकाओं को बढ़ा देता है।
कैसे जानें बुखार मलेरिया की वजह से है या सामान्य?
सामान्य वायरल बुखार और मलेरिया के बुखार में अंतर समझना जरूरी है।
- वायरल बुखार में आमतौर पर लगातार बुखार, गले में दर्द, खांसी, शरीर दर्द और कमजोरी होती है। व
- हीं मलेरिया में बुखार अक्सर ठंड और कंपकंपी से शुरू होता है, फिर तेज बुखार आता है और बाद में बहुत पसीना होता है।
- मलेरिया में बुखार एक निश्चित पैटर्न में बार-बार लौट सकता है, जबकि वायरल फीवर में ऐसा जरूरी नहीं।
- अगर आपको बार-बार ठंड के साथ बुखार हो तो अलर्ट हो जाएं।
- समय पर डॉक्टर की सलाह और दवाओं की मदद से आप किसी बड़े खतरे से बचाव कर सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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