Symptoms of Chronic Fatigue Syndrome: अक्सर ऐसा होता है कि कुछ लोगों के शरीर में बेवजह हमेशा आलस और थकान बनी रहती है। ऐसा होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, आमतौर पर इसके पीछे शरीर की कुछ आंतरिक बीमारी हो सकती है, लेकिन अगर आप स्वस्थ हैं और पूरी नींद भी ले रहे हैं इसके बावजूद भी शरीर में थकान बनी रहती है तो ये क्रॉनिक फटिग सिंड्रोम का संकेत हो सकता है।
Health Tips: आलस और थकान ने बजा दी है बैंड? कहीं ये क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम तो नहीं, जानें लक्षण
शरीर में सामान्य दर्द और थकान होना आम बात है, लेकिन अगर वो दर्द लंबे समय तक बना रहता है तो वो किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। कई बार ये क्रॉनिक फटिग सिंड्रोम का लक्षण भी हो सकता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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याददाश्त और एकाग्रता की समस्या
क्रॉनिक फटिग सिंड्रोम का एक बड़ा लक्षण है 'ब्रेन फॉग'। इसमें मरीजों की याददाश्त और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बहुत कम हो जाती है। उन्हें कोई भी बात याद रखने या किसी एक काम पर फोकस करने में बहुत मुश्किल आती है। इस वजह से उनका दफ्तर का काम और रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। यह सिर्फ थकान नहीं है, बल्कि मानसिक क्षमता पर सीधा असर डालती है, जिससे व्यक्ति हमेशा उलझन में महसूस करता है।
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थकान के साथ-साथ, क्रॉनिक फटिग सिंड्रोम के मरीजों को अक्सर बिना किसी खास वजह के गले में दर्द महसूस होता है। उन्हें गर्दन या बगल में लिम्फ नोड्स (गांठों) में दर्द और बार-बार सिरदर्द की शिकायत भी रहती है। ये सभी लक्षण किसी आम वायरल संक्रमण की तरह लगते हैं, लेकिन ये लंबे समय तक बने रहते हैं।
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क्रॉनिक फटिग सिंड्रोम का पता लगाना आसान नहीं होता, क्योंकि इसके लक्षण डिप्रेशन या थायरॉयड जैसी कई अन्य बीमारियों से मिलते-जुलते हैं। डॉक्टर इसका निदान तभी करते हैं जब व्यक्ति को छह महीने या उससे अधिक समय तक लगातार और गंभीर थकान बनी रहे, और सभी अन्य संभावित बीमारियों की जांच करके उन्हें खारिज कर दिया जाए। यह एक लंबी प्रक्रिया है, जिसके बाद ही क्रॉनिक फटिग सिंड्रोम की पुष्टि होती है।
क्रॉनिक फटिग सिंड्रोम का कोई एक जादुई इलाज उपलब्ध नहीं है। इसके प्रबंधन के लिए सबसे जरूरी है जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाना। ऐसे मरीजों को पर्याप्त और गहरी नींद लेनी चाहिए, साथ ही तनाव कम करने के तरीके सीखने चाहिए। शारीरिक गतिविधि को भी अचानक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से बढ़ाना जरूरी है। इन सब के अलावा भी अगर दर्द बना रहे तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
स्रोत और संदर्भ
Chronic Fatigue Syndrome
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।