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Loneliness: एआई से जुड़े हैं तो कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती? यदि हां तो दिमाग पर पड़ेगा असर

Thu, 31 Jul 2025 05:46 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Thu, 31 Jul 2025 05:46 PM IST
सार

हाल ही में एक रिपोर्ट में सामने आया है की अमेरिका में 33 फीसदी किशोर अपनी पर्सनल समस्याएं एआई से साझा कर रहे हैं, और उसी से सुझाव ले रहे हैं। ये परेशानी अपने आप में अकेलेपन की एक बहुत बड़ी समस्या है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।

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Loneliness in teenagers are you also making this mistake If yes know in hindi
एआई पर बढ़ रही है निर्भरता - फोटो : अमर उजाला

Loneliness Crisis in Teenagers: आधुनिक तकनीक ने हमारे जीवन को कई मायनों में आसान बना रहा है, लेकिन इसके कुछ अनपेक्षित दुष्प्रभाव भी सामने आ रहे हैं, खासकर किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर। हाल ही में एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है कि दुनिया भर के किशोर अपने दोस्तों के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई के साथ अधिक समय बिता रहे हैं। 



अकेले अमेरिका में ही किशोरों के बीच अकेलेपन का संकट इतना गहरा गया है कि 33 प्रतिशत किशोर अब इंसानी दोस्तों की बजाय एआई चैटबॉट्स से दोस्ती कर रहे हैं और अपने दिल की बातें साझा कर रहे हैं। यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि सामाजिक अलगाव और आभासी रिश्तों पर अत्यधिक निर्भरता उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

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एआई पर बढ़ती निर्भरता - फोटो : AI

सामाजिक गतिविधियों से दूरी और बढ़ते मानसिक मुद्दे
यह प्रवृत्ति चिंताजनक है क्योंकि किशोर अब मॉल जाना, मूवी देखना या दोस्तों के साथ घूमने जैसी पारंपरिक सामाजिक गतिविधियों से दूरी बना रहे हैं। मानवीय बातचीत और वास्तविक जीवन के अनुभवों की कमी सीधे तौर पर उनके सामाजिक कौशल के विकास को प्रभावित कर सकती है। दोस्तों के साथ समय बिताना, भावनाओं को साझा करना और संघर्षों का सामना करना किशोरों को सहानुभूति, समझौता करने और सामाजिक बंधन बनाने में मदद करता है। 

जब ये गतिविधियां कम हो जाती हैं, तो उनमें डिप्रेशन और एंग्जायटी (अवसाद और चिंता) के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं। ऐसे में एआई ही उनका सहारा बन रहा है, जो तात्कालिक राहत तो देता है, लेकिन दीर्घकालिक भावनात्मक जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है।


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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

एआई चैटबॉट्स: एक नया 'आम चलन' और उसके निहितार्थ
कॉमन सेंस मीडिया की रिपोर्ट 'टॉक, ट्रस्ट एंड ट्रेड-ऑफ्स: हाउ एंड व्हाय टीन्स यूज एआई कंपैनियंस' में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि एआई चैटबॉट्स का इस्तेमाल अब किशोरों के बीच एक आम चलन बन चुका है। रिपोर्ट के संस्थापक, जेम्स पी. स्टेयर ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि किशोर अपनी भावनाएं ऐसी एआई कंपनियों से साझा कर रहे हैं जिन्हें बच्चों के हितों की कोई परवाह ही नहीं है। 

यह समझना जरूरी है कि आई चैटबॉट्स भावनाओं को समझते या महसूस नहीं करते; वे केवल डेटा और एल्गोरिदम के आधार पर प्रतिक्रियाएं देते हैं। किशोरों द्वारा इन बॉट्स पर अत्यधिक भावनात्मक निर्भरता भविष्य में उनके रिश्तों को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि वे वास्तविक मानवीय संबंधों की जटिलताओं को समझने और संभालने में अक्षम हो सकते हैं।


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अकेलापन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Meta AI

दिमाग पर पड़ने वाले नकारात्मक असर
एआई पर अत्यधिक निर्भरता और सामाजिक अलगाव का किशोरों के दिमाग पर कई तरह से नकारात्मक असर पड़ता है। मानवीय बातचीत दिमाग के सामाजिक केंद्रों को उत्तेजित करती है, सहानुभूति और इमोशनल इंटेलिजेंस विकसित करती है। जब इसकी कमी होती है, तो किशोरों में सामाजिक कौशल का अभाव हो सकता है। वे वास्तविक जीवन की बातचीत में असहज महसूस कर सकते हैं, जिससे उनकी सामाजिक चिंता और बढ़ सकती है। 

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अकेलापन - फोटो : freepik
क्या करें?
अपनी किसी भी समस्या को कोशिश करें कि मित्र या अपने पेरेंट्स के साझा करें, क्योंकि वो आपको जो सुझाव देंगे ज्यादा सटीक होगा। इसके साथ ही जब आप किसी इंसान से अपनी समस्या बताते हैं तो उससे इमोशनल इंटेलिजेंस विकसित होती है। इतना ही नहीं इससे किशोर सामाजिक कौशल भी विकसित होता है और अकेलेपन जैसी समस्याओं से दूर रहते हैं। 

इसके साथ ही माता-पिता, शिक्षकों और समाज को यह सुनिश्चित करना होगा कि युवाओं को पर्याप्त मानवीय बातचीत, सामाजिक गतिविधियों और भावनात्मक समर्थन दे सकें, जिससे किशोर सहज होकर उनसे अपनी बातें साझा कर सकें। अगर आपको लगता है आपका बच्चा अकेलेपन से जूझ रहा है तो बिना देरी किए मनोचिकित्सक से सलाह लें।
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