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विशेषज्ञों ने बताया ऐसे मास्क को लगाना-न लगाना है बराबर, जानें क्या आपका मास्क देता है कोरोनावायरस से सुरक्षा की गारंटी?

Sun, 04 Apr 2021 02:28 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला Published by: Abhilash Srivastava Updated Sun, 04 Apr 2021 02:28 PM IST
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masks material and fabric layers can significantly affect exposure of virus
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए सुरक्षात्मक उपायों को प्रयोग में लाने को ही सबसे सुरक्षित तरीका माना जा रहा है। इसके लिए लोगों से बार-बार हाथों को धोने और मास्क पहनने की अपील की जाती रही है। लेकिन क्या आप मास्क पहनकर भी सुरक्षित हैं? ऐसा सवाल इसलिए किया जा रहा है क्योंकि हाल के ही एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि मास्क बनाने के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री और उसके फैब्रिक लेयर्स पर निर्भर करता है कि आप संक्रमण से कितना सुरक्षित रह सकते है? यानी अगर आपके मास्क की क्वालिटी सही नहीं है तो इसे पहनने के बाद भी आप खुद को सुरक्षित नहीं मान सकते हैं। 

masks material and fabric layers can significantly affect exposure of virus
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

अमेरिका के जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने एक हालिया अध्ययन के दौरान मास्क और इसके संक्रमण रोकने की क्षमता का जिक्र किया है। एयरोसोल साइंस एंड टेक्नोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में विशेषज्ञों ने तमाम तरह के फैब्रिक से होकर अत्यंत छोटे कणों के आर-पार निकलने के बारे में बताया है। 

masks material and fabric layers can significantly affect exposure of virus
Driving with Face Mask - फोटो : Pexels

विशेषज्ञों का कहना है कि मास्क बनाने में इस्तेमाल सामग्री यानी कि उसका फैब्रिक, मास्क कितना कसा है और साथ ही इसमें इस्तेमाल की गई परतें कोरोना वायरस के प्रसार को प्रभावित कर सकती हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि इंसानों के बाल का व्यास लगभग 50 माइक्रोन होता है, जबकि 1 मिलीमीटर आकार में 1,000 माइक्रोन होता है यानी कि अगर मास्क की क्वालिटी सही नहीं है तो कई तरह के छोटे कण और वायरस उससे आर पार हो सकते हैं।

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masks material and fabric layers can significantly affect exposure of virus
- फोटो : PTI

स्कूल ऑफ केमिकल एंड बायोमोलेक्युलर इंजीनियरिंग एंड स्कूल ऑफ अर्थ एंड एटमॉस्फेरिक साइंसेज में प्रोफेसर नांग ली के मुताबिक हवा में अतिसूक्ष्म कण कई घंटों से लेकर कई दिनों तक रह सकते है, यह आमतौर पर उस स्थान के वेंटिलेशन पर निर्भर करता है। यदि किसी स्थान पर हवा के निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है तो ये छोटे कण बहुत लंबे समय तक रह सकते हैं।

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- फोटो : PTI

वैज्ञानिकों शोध के दौरान 33 विभिन्न प्रकार के पदार्थों का परीक्षण किया जिनसे मास्क बनाए जाते हैं। इनमें सूती और पॉलिस्टर जैसे एक परत वाले बुने हुए कपड़े भी शामिल थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि एक ही तरह के कपड़े में से भी तमाम प्रकार के तत्वों के निकलने परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं। 

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