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NFHS-6 Report: प्रसव, टीकाकरण और बच्चों की सेहत पर अच्छी खबर, जानिए स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 की महत्वपूर्ण बातें

Sat, 30 May 2026 07:40 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sat, 30 May 2026 07:40 PM IST
सार

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 देश में बदलती स्वास्थ्य तस्वीरें प्रस्तुत कर रहा है। इसमें मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक विकास में सुधार की जानकारी मिली है। भारत पूर्ण टीकाकरण के लक्ष्य की ओर लगातार मजबूत कदम बढ़ा रहा है। 

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National Family Health Survey-6 report Child malnutrition falls diarrhoea prevalence falls know details in hin
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस 6) की रिपोर्ट - फोटो : Amarujala.com/AI

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार (29 मई 2026) को राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस 6) की रिपोर्ट जारी की, जिसमें देश में स्वास्थ्य सुधार को लेकर किए जा रहे प्रयासों की साफ तस्वीर झलकती है। व्यापक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों के परिणामस्वरूप अब लाखों बच्चों को पहले की तुलना में बेहतर पोषण मिल रहा है। कुपोषण, डायरिया और शिशु मृत्यु दर में भी बेहतर सुधार देखा जा रहा है।



अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मौत के सबसे बड़े कारण डायरिया यानी दस्त के मामलों में काफी कमी आई है, लिहाजा इसके कारण होने वाली मौत के मामले भी कम हुए हैं। आंगनवाड़ी सेवाओं से लेकर टीकाकरण अभियान, पोषण योजनाओं से लेकर स्वच्छता कार्यक्रमों तक, कई प्रयासों का असर अब साफ नजर आने लगा है।

हालांकि चुनौतियां अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। रिपोर्ट में लाइफस्टाइल से संबंधित बीमारियों के खतरे को लेकर अलर्ट किया गया है। लेकिन यह रिपोर्ट उम्मीद जगाती है कि सही दिशा में लगातार किए गए प्रयास बड़े बदलाव ला सकते हैं। खास बात यह है कि बच्चों की बेहतर सेहत का मतलब सिर्फ उनका स्वस्थ बचपन नहीं, बल्कि देश का मजबूत भविष्य भी है।

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बच्चों का टीकाकरण - फोटो : Freepik.com

गर्भवती महिलाओं की देखभाल और बीमारियों के इलाज में सुधार
 
जनसंख्या, स्वास्थ्य, पोषण और परिवार कल्याण संकेतकों पर महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करने के लिए इस सर्वेक्षण के तहत 715 जिलों के लगभग 6.79 लाख परिवारों को कवर किया गया। शुक्रवार को जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 से पता चलता है कि देश में अब 95.9% गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व देखभाल मिल रही है। यही नहीं, अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में होने वाले प्रसव के मामले 88.6% से बढ़कर 90.6% पर पहुंच गए हैं। 
 

  • 96% से ज्यादा बच्चों का टीकाकरण हो रहा है और बीमा और वित्त पोषण योजनाओं ने इलाज के खर्च का बोझ घटाया है।
  • सर्वेक्षण के मुताबिक, स्वास्थ्य बीमा/वित्तपोषण योजना का दायरा परिवारों के स्तर पर 41.0% से बढ़कर 60.2% हो गया है। जोकि स्वास्थ्य सेवा में वित्तीय सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई सरकारी पहलों की सफलता को दर्शाता है। 
  • आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य जैसी प्रमुख योजनाओं ने विशेष रूप से कमजोर आबादी के लिए सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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शिशु मृत्युदर में आई कमी - फोटो : Freepik.com

बाल मृत्युदर में कमी लाने में तेजी से प्रगति

पांच साल से कम उम्र के बच्चों में गंभीर दस्त या डायरिया के मामलों में गिरावट दर्ज की गई है, जिसमें बेहतर टीकाकरण कवरेज और सुरक्षित पेयजल तक पहुंच का बड़ा योगदान रहा है। 
 

  • स्वच्छ पेयजल और टीकों की वजह से बच्चों में दस्त और रोटावायरस का खतरा भी घटा है। 
  • ये प्रयासों की वजह से पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर को 2014 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 45 से घटाकर 2024 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 28 तक लाने की दिशा में तेजी से प्रगति हुई है।
  • डायरिया की व्यापकता एनएफएचएस-5 में 0.7% से घटकर एनएफएचएस-6 में 0.5 प्रतिशत हो गई।
  • 12-23 महीने की आयु के बच्चों में रोटावायरस वैक्सीन की तीनों खुराक का कवरेज 36.4 प्रतिशत से बढ़कर 85.4 प्रतिशत हो गया।
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गर्भावस्था देखभाल में सुधार - फोटो : Freepik.com

गर्भवती महिलाओं की देखभाल में सुधार

रिपोर्ट बताती हैं कि अब गर्भावस्था में महिलाओं को पहले की तुलना में अच्छी देखभाल भी मिल रही है।
 

  • गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में देखभाल पाने वाली माताओं की संख्या 70.% से बढ़कर 76.2% हो गई है। 
  • कम से कम चार बार प्रसव पूर्व जांच कराने वाली माताओं की संख्या 58.5% से बढ़कर 65.2% हो गई है। 
  • अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले प्रसव 88.6%से बढ़कर 90.6% हो गए हैं। 
  • कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की मौजूदगी में होने वाले जन्म का आंकड़ा 89.4% से 91.3% हो गया है।

 
इन आंकड़ों में सुधार सीधे तौर पर स्वस्थ जन्म को बढ़ावा देने के साथ शिशु मृत्युदर को कम करने वाले माने जा रहे हैं। 

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टीकाकरण सुधार से सेहत में सुधार - फोटो : Freepik.com

ये सुधार भी महत्वपूर्ण

एनएफएचएस-6 के अनुसार भारत अब पूर्ण टीकाकरण के लक्ष्य की ओर लगातार मजबूत कदम बढ़ा रहा है। 
 

  • 12 से 23 महीने की उम्र के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण का दायरा 83.8% से बढ़कर 87.1% हो गया है। कम से कम 95.6% बच्चों को टीके सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए लगाए गए।
  •  खसरे के टीके की दूसरी खुराक का दायरा भी 58. प्रतिशत से काफी ज्यादा बढ़कर 71.8% हो गया है। 
  • भारत की कुल प्रजनन दर 2.0 पर स्थिर है। गर्भनिरोधक उपयोग दर 66.7% से बढ़कर 69.1% हो गई है। राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रमों के चलते ये परिणाम देखे जा रहे हैं। 



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स्रोत: 
union Health Ministry Releases National Family Health Survey – 6


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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