केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार (29 मई 2026) को राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस 6) की रिपोर्ट जारी की, जिसमें देश में स्वास्थ्य सुधार को लेकर किए जा रहे प्रयासों की साफ तस्वीर झलकती है। व्यापक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों के परिणामस्वरूप अब लाखों बच्चों को पहले की तुलना में बेहतर पोषण मिल रहा है। कुपोषण, डायरिया और शिशु मृत्यु दर में भी बेहतर सुधार देखा जा रहा है।
NFHS-6 Report: प्रसव, टीकाकरण और बच्चों की सेहत पर अच्छी खबर, जानिए स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 की महत्वपूर्ण बातें
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 देश में बदलती स्वास्थ्य तस्वीरें प्रस्तुत कर रहा है। इसमें मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक विकास में सुधार की जानकारी मिली है। भारत पूर्ण टीकाकरण के लक्ष्य की ओर लगातार मजबूत कदम बढ़ा रहा है।
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गर्भवती महिलाओं की देखभाल और बीमारियों के इलाज में सुधार
जनसंख्या, स्वास्थ्य, पोषण और परिवार कल्याण संकेतकों पर महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करने के लिए इस सर्वेक्षण के तहत 715 जिलों के लगभग 6.79 लाख परिवारों को कवर किया गया। शुक्रवार को जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 से पता चलता है कि देश में अब 95.9% गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व देखभाल मिल रही है। यही नहीं, अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में होने वाले प्रसव के मामले 88.6% से बढ़कर 90.6% पर पहुंच गए हैं।
- 96% से ज्यादा बच्चों का टीकाकरण हो रहा है और बीमा और वित्त पोषण योजनाओं ने इलाज के खर्च का बोझ घटाया है।
- सर्वेक्षण के मुताबिक, स्वास्थ्य बीमा/वित्तपोषण योजना का दायरा परिवारों के स्तर पर 41.0% से बढ़कर 60.2% हो गया है। जोकि स्वास्थ्य सेवा में वित्तीय सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई सरकारी पहलों की सफलता को दर्शाता है।
- आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य जैसी प्रमुख योजनाओं ने विशेष रूप से कमजोर आबादी के लिए सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
बाल मृत्युदर में कमी लाने में तेजी से प्रगति
पांच साल से कम उम्र के बच्चों में गंभीर दस्त या डायरिया के मामलों में गिरावट दर्ज की गई है, जिसमें बेहतर टीकाकरण कवरेज और सुरक्षित पेयजल तक पहुंच का बड़ा योगदान रहा है।
- स्वच्छ पेयजल और टीकों की वजह से बच्चों में दस्त और रोटावायरस का खतरा भी घटा है।
- ये प्रयासों की वजह से पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर को 2014 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 45 से घटाकर 2024 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 28 तक लाने की दिशा में तेजी से प्रगति हुई है।
- डायरिया की व्यापकता एनएफएचएस-5 में 0.7% से घटकर एनएफएचएस-6 में 0.5 प्रतिशत हो गई।
- 12-23 महीने की आयु के बच्चों में रोटावायरस वैक्सीन की तीनों खुराक का कवरेज 36.4 प्रतिशत से बढ़कर 85.4 प्रतिशत हो गया।
गर्भवती महिलाओं की देखभाल में सुधार
रिपोर्ट बताती हैं कि अब गर्भावस्था में महिलाओं को पहले की तुलना में अच्छी देखभाल भी मिल रही है।
- गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में देखभाल पाने वाली माताओं की संख्या 70.% से बढ़कर 76.2% हो गई है।
- कम से कम चार बार प्रसव पूर्व जांच कराने वाली माताओं की संख्या 58.5% से बढ़कर 65.2% हो गई है।
- अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले प्रसव 88.6%से बढ़कर 90.6% हो गए हैं।
- कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की मौजूदगी में होने वाले जन्म का आंकड़ा 89.4% से 91.3% हो गया है।
इन आंकड़ों में सुधार सीधे तौर पर स्वस्थ जन्म को बढ़ावा देने के साथ शिशु मृत्युदर को कम करने वाले माने जा रहे हैं।
ये सुधार भी महत्वपूर्ण
एनएफएचएस-6 के अनुसार भारत अब पूर्ण टीकाकरण के लक्ष्य की ओर लगातार मजबूत कदम बढ़ा रहा है।
- 12 से 23 महीने की उम्र के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण का दायरा 83.8% से बढ़कर 87.1% हो गया है। कम से कम 95.6% बच्चों को टीके सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए लगाए गए।
- खसरे के टीके की दूसरी खुराक का दायरा भी 58. प्रतिशत से काफी ज्यादा बढ़कर 71.8% हो गया है।
- भारत की कुल प्रजनन दर 2.0 पर स्थिर है। गर्भनिरोधक उपयोग दर 66.7% से बढ़कर 69.1% हो गई है। राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रमों के चलते ये परिणाम देखे जा रहे हैं।
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स्रोत:
union Health Ministry Releases National Family Health Survey – 6
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